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कानपुर में साल भर में होगी 20000 कुत्तों की नसबंदी, प्रदेश को 10 करोड़ आवंटित
Tue, 30 Jul 2019 02:46 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 30 Jul 2019 02:46 PM IST
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20000 कुत्तों की साल भर में होगी नसबंदी
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में नगर विकास विभाग ने नगर निगम को एक साल में 20 हजार कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य दिया है। इसके लिए प्रदेश भर के नगर निगमों को 10 करोड़ रुपये भी आवंटित कर दिए हैं। सितंबर से इसके लिए वृहद अभियान चलाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
अभियंत्रण विभाग से कुत्तों की नसबंदी के लिए एक महीने में अस्पताल का हाल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सब कुछ तय रणनीति के हिसाब से हुआ तो शहरवासियों को कुछ सालों में ही आवारा कुत्तों से निजात मिल सकती है। हालांकि नगर निगम का पुराना रिकार्ड देखते हुए इस अभियान पर भी संशय के बादल हैं।
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अभियंत्रण विभाग से कुत्तों की नसबंदी के लिए एक महीने में अस्पताल का हाल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सब कुछ तय रणनीति के हिसाब से हुआ तो शहरवासियों को कुछ सालों में ही आवारा कुत्तों से निजात मिल सकती है। हालांकि नगर निगम का पुराना रिकार्ड देखते हुए इस अभियान पर भी संशय के बादल हैं।
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शासन ने पुन: आवारा कुत्तों की वृहद स्तर पर नसबंदी कराने के आदेश दिए हैं। 28 जुलाई को नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ में सभी नगर निगमों की बैठक की।
कहा गया कि कानपुर सहित प्रत्येक नगर निगम को एक साल में 20 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी करानी है। इसके लिए पहले चरण में 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। नसबंदी के लिए टेंडर राज्य स्तर पर भी हो सकते हैं।
कहा गया कि कानपुर सहित प्रत्येक नगर निगम को एक साल में 20 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी करानी है। इसके लिए पहले चरण में 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। नसबंदी के लिए टेंडर राज्य स्तर पर भी हो सकते हैं।
एक महीने में अस्पताल ठीक कराने के निर्देश
नगर निगम ने फूलबाग स्थित कुत्तों की नसबंदी वाले अस्पताल में टिनशेड की जगह स्लैब डालकर हाल और उसके ऊपर कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनाने के लिए टेंडर किए हैं। निर्माण लागत 20 लाख रुपये है। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता कैलाश सिंह को एक महीने में निर्माण पूरा के निर्देश दिए हैं। सोमवार को वहां मरम्मत के लिए तोड़फोड़ भी शुरू हो गई।
पहले फ्लाप हो चुका अभियान
शासन के आदेश पर नगर निगम ने ढाई साल पहले कुुत्तों की नसबंदी के लिए फूलबाग स्थित कांजी हाउस को अस्पताल में तब्दील किया था। इसमें आपरेशन थियेटर के साथ ही प्री-आपरेटिव वार्ड, पोस्ट-आपरेटिव वार्ड बनाए गए थे। समाजोत्थान सेवा संस्थान को नसबंदी का एक साल का ठेका दिया गया था, पर यह संस्था साल भर में 365 कुत्तों की नसबंदी भी नहीं कर पाई। नगर निगम के अफसरों ने ठेका अवधि समाप्त होने से पहले टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की। देर से टेंडर कराने के बाद पुन: इसी संस्था को ठेका दिया गया, पर संस्था ने अस्पताल में कमियां बताकर एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की। इससे शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़कर 50 हजार से ज्यादा हो गई है। इन कुत्तों के काटने के बाद लगने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शनों की किल्लत होने लगी है।
नगर निगम ने फूलबाग स्थित कुत्तों की नसबंदी वाले अस्पताल में टिनशेड की जगह स्लैब डालकर हाल और उसके ऊपर कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनाने के लिए टेंडर किए हैं। निर्माण लागत 20 लाख रुपये है। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता कैलाश सिंह को एक महीने में निर्माण पूरा के निर्देश दिए हैं। सोमवार को वहां मरम्मत के लिए तोड़फोड़ भी शुरू हो गई।
पहले फ्लाप हो चुका अभियान
शासन के आदेश पर नगर निगम ने ढाई साल पहले कुुत्तों की नसबंदी के लिए फूलबाग स्थित कांजी हाउस को अस्पताल में तब्दील किया था। इसमें आपरेशन थियेटर के साथ ही प्री-आपरेटिव वार्ड, पोस्ट-आपरेटिव वार्ड बनाए गए थे। समाजोत्थान सेवा संस्थान को नसबंदी का एक साल का ठेका दिया गया था, पर यह संस्था साल भर में 365 कुत्तों की नसबंदी भी नहीं कर पाई। नगर निगम के अफसरों ने ठेका अवधि समाप्त होने से पहले टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की। देर से टेंडर कराने के बाद पुन: इसी संस्था को ठेका दिया गया, पर संस्था ने अस्पताल में कमियां बताकर एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की। इससे शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़कर 50 हजार से ज्यादा हो गई है। इन कुत्तों के काटने के बाद लगने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शनों की किल्लत होने लगी है।