जीबी सिंड्रोम नाम की घातक बीमारी से जंग लड़ रहा इटावा का एथलीट चैंपियन अंश, सरकार से है मदद की दरकार
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उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई स्थित मेजर ध्यानचंद्र स्पोर्ट्स कालेज का एथलीट चैंपियन अंश यादव नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में एक साल से जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ रहा है। अंश यादव को बेहद खतरनाक माने जाने वाले जी.बी.सिंड्रोम नामक घातक बीमारी ने अपनी जकड़ में लिया हुआ है।
इटावा के जिला अधिकारी जे.बी.सिंह ने आज यहां बताया कि यह लाइलाज बीमारी है और इनकी मदद पहले भी सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की रकम देकर की जा चुकी है लेकिन अभी उनके बच्चे के इलाज के लिए पैसे की और आवश्यकता है। जिसके लिए हम शासन को पत्र लिखा गया है। इटावा के जिला खेल अधिकारी एस.के.लहरी का कहना है कि अंश के उपचार के लिए खेल विभाग की ओर से जो भी मदद संभव है वो की जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी अंश के इलाज में फंडिंग के लिहाज से कैम्पेन चल रहा है जिससे अंश की जिंदगी बचाई जा सके। पिछले एक साल से लगातार जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। 18 वर्षीय स्टेट एथलीट चैंपियन अंश के पिता राजीव यादव जसवंतनगर नगर पालिका में सभासद हैं। उनके पास जो जमापूंजी थी अपने बेटे अंश के इलाज में लगा चुके हैं लेकिन अंश पिछले एक वर्ष से वेंटिलेटर पर अपनी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है, फिर भी अब लगने लगा है कि अंश इस जंग को हारता जा रहा हैं।
अंश के पिता ने मीडिया और प्रशासन के सामने अंश के इलाज के लिए लगाई गुहार
अंश के पिता इटावा डीएम से मिले, जहां उन्होंने सरकार से अपने बच्चे की मदद करने के लिए गुहार लगाई है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उत्तर प्रदेश स्टेट एथलीट चैंपियन अंश यादव वेंटिलेटर पर है। उसके इलाज के लिए अंश के पिता आज तक एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 25 लाख रुपये 3 किश्तों में अंश के इलाज के लिए दिए हैं।
तीन महीने तक यहां पर उपचाराधीन रहने के बाद 23 अक्टूबर 2018 को डॉक्टर ने आंशिक स्वस्थ होने पर घर से नियमित इलाज और फिजिओथेरपी कराने को कहकर अस्पताल से हटा दिया। इसके बावजदू अंश दिल्ली में ही अपने रिश्तेदार के यहां रहकर इलाज करा रहा था, लेकिन अचानक 30 अक्टूबर 2018 को दोबारा फिर दिक्कत हुई और अस्पताल में ही ब्रेन हेमरेज हो गया, तब से वो कोमा में है। अंश के पिता राजीव कुमार यादव जसवंतनगर इटावा के रहने वाले हैं वो आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। अंश के इलाज पर अब तक एक करोड़ से अधिक का खर्चा हो चुका है।