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एनआरसी वार्ड में मासूम की मौत, परिजनों ने किया हंगामा
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में पिछले तीन दिनों से भर्ती मासूम की सोमवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। इस पर आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगा हंगामा किया। वहीं मौके पर पहुंचे एसडीएम ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। डाक्टर के अनुसार, बच्ची को निमोनिया था। रात को उसकी हालत बिगड़ गई थी।
सिकंदरा निवासी नौशाद ने बताया कि उसका एक बेटा अली और एक बेटी गुलफ्शा है। छह माह पहले उसने परिवार के ही क्षमा पत्नी आसिफ की बेटी रानी (7 माह) को गोद लिया था। नौशाद ने बताया कि वह ट्रक चालक है। गुरुवार को वह ट्रक लेकर पटना गया और रविवार को वहां से लौटा। वहीं, 8 जून को रानी को पेट में दर्द होने पर पत्नी परवीन ने उसे जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया। रविवार की देर शाम वह जिला अस्पताल गया। उस वक्त रानी की हालत में सुधार था।
आरोप लगाया कि रविवार की रात कोई डाक्टर और कर्मचारी रानी को देखने नहीं आया, जिससे सुबह अचानक उसकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। वार्ड में मौजूद स्टाफ नर्स ने उसे बाहर से दवा लाने के लिए कहा। जब तक वह दवा लेकर आया, तब तक रानी की मौत हो चुकी थी। इसकी खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल स्टाफ पर उपचार में लापरवाही व गलत दवा देने का आरोप लगाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल प्रबंधन को सख्त हिदायत दी। वहीं, परिजनों को शांत करा मामले की जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शव को लेकर घर चले गए।
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सीएमएस, डा. आरए मिर्जा ने बताया कि बच्ची को निमोनिया था और उसका वजन भी काफी कम था। हालत गंभीर होने पर परिजनों को रेफर कराने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजनों ने इसमें असमर्थता जाहिर की थी ।
एसडीएम सदर, आनंद कुमार सिंह ने कहा कि बच्ची के परिजनों से बात की गई थी, सीएमएस से रिपोर्ट तलब की जाएगी, लापरवाही उजागर होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सिकंदरा निवासी नौशाद ने बताया कि उसका एक बेटा अली और एक बेटी गुलफ्शा है। छह माह पहले उसने परिवार के ही क्षमा पत्नी आसिफ की बेटी रानी (7 माह) को गोद लिया था। नौशाद ने बताया कि वह ट्रक चालक है। गुरुवार को वह ट्रक लेकर पटना गया और रविवार को वहां से लौटा। वहीं, 8 जून को रानी को पेट में दर्द होने पर पत्नी परवीन ने उसे जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया। रविवार की देर शाम वह जिला अस्पताल गया। उस वक्त रानी की हालत में सुधार था।
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आरोप लगाया कि रविवार की रात कोई डाक्टर और कर्मचारी रानी को देखने नहीं आया, जिससे सुबह अचानक उसकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। वार्ड में मौजूद स्टाफ नर्स ने उसे बाहर से दवा लाने के लिए कहा। जब तक वह दवा लेकर आया, तब तक रानी की मौत हो चुकी थी। इसकी खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल स्टाफ पर उपचार में लापरवाही व गलत दवा देने का आरोप लगाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल प्रबंधन को सख्त हिदायत दी। वहीं, परिजनों को शांत करा मामले की जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शव को लेकर घर चले गए।
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सीएमएस, डा. आरए मिर्जा ने बताया कि बच्ची को निमोनिया था और उसका वजन भी काफी कम था। हालत गंभीर होने पर परिजनों को रेफर कराने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजनों ने इसमें असमर्थता जाहिर की थी ।
एसडीएम सदर, आनंद कुमार सिंह ने कहा कि बच्ची के परिजनों से बात की गई थी, सीएमएस से रिपोर्ट तलब की जाएगी, लापरवाही उजागर होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।