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दो दल मिलने के बावजूद कम हो गए डिंपल के 24972 वोट

Sat, 25 May 2019 02:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2019 02:07 AM IST
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दो दल मिलने के बावजूद कम हो गए डिंपल के 24972 वोट
कानपुर देहात। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद भी इनके प्रत्याशियों को जातीय आंकड़ों के हिसाब से वोट नहीं मिला। सबसे अधिक वोट रसूलाबाद विधान सभा में कम हुए। पिछली बार की अपेक्षा डिंपल को इस बार 24972 वोट कम मिले। भोगनीपुर में गठबंधन प्रत्याशी भारी रहा उसे भाजपा प्रत्याशी से 3196 मत ज्यादा मिले। इटावा लोकसभा की सिकंदरा व अकबरपुर रनियां विधान सभा में गठबंधन के बाद भी दोनों दलों के वोट का ग्राफ गिरा है।
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सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेश के दो प्रमुख दलों से मिलकर एक प्रत्याशी लड़ने पर उसे वोट अधिक मिलेगा, लेकिन चुनाव परिणाम आने से खुलासा हुआ कि जिले की तीन विधानसभाओं में दोनों दलों के वोटों का ग्राफ गिरा है। इटावा लोकसभा का हिस्सा सिकंदरा विधानसभा सीट में गठबंधन प्रत्याशी के रूप में कमलेश कुमार मैदान में थे, उन्हें कुल 71739 वोट मिले, जबकि 2014 लोकसभा चुनाव में सपा व बसपा प्रत्याशी को मिलकर कुल 76668 वोट मिले थे। इस बार यहां दोनों दलों के मिलकर चुनाव लड़ने पर 71739 वोट ही मिले। इसी तरह से अकबरपुर लोकसभा की अकबरपुर रनियां विधान सभा में गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान को 77903 वोट मिले, जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में यहां सपा व बसपा दोनों दलों से प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। दोनों को मिलाकर कुल 91427 वोट मिले थे। इसकी अपेक्षा इस बार 13524 वोट कम हो गए। पिछले लोकसभा चुनाव में कन्नौज से बसपा प्रत्याशी निर्मल तिवारी मैदान में थे, जिन्हें 30919 वोट मिला था। जबकि डिंपल को 79594 वोट मिला था। दोनों दलों को मिलाकर कुल 110513 वोट पड़ा था। इस बार गठबंधन के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने डिंपल के पक्ष में चुनावी रैली भी की थी। इसके बावजूद डिंपल को 85541 वोट मिला। पिछली बार की अपेक्षा दोनों दलों को मिलने के बाद भी 24972 वोट कम मिला है। केवल भोगनीपुर विधानसभा गठबंधन का मामूली असर दिखा, यहां गठबंधन प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी से 3196 वोट अधिक मिले। इन चुनाव नतीजों से साफ है कि मतदाताओं की कसौटी में राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा खरी उतरी और जातीय आंकड़े की राजनीति कामयाब नहीं हो सकी।
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