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स्वरोजगार योजना में लापरवाही बैंकों को पड़ेगी भारी
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कानपुर देहात। स्वरोजगार योजनाओं में सहयोग न करने वाली बैंकों का बड़ा नुकसान हो सकता है। सीडीओ ने ऐसी बैंकों को चिह्नित कराना शुरू किया है। ऋण पत्रावलियां स्वीकृत करने में मनमानी करने वाली शाखाओं से सरकारी खाते हटा लिए जाएंगे।
प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से स्वरोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन बैंकों की मनमानी से बेरोजगारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में स्वरोजगार योजनाएं बैंकर्स की मनमानी की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और एक जनपद एक उत्पाद जैसी योजनाएं जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित हैं। जिला उद्योग केंद्र विभाग बेरोजगार युवाओं को चयन कर ऋण स्वीकृत करने के लिए 200 आवेदन पत्र संबंधित बैंकों को भेजे गए थे। इसके बाद आवेदक बैंकों के चक्कर लगाते थक जाते हैं और उनका लोन स्वीकृत नहीं हो पाता है। जिले में 150 आवेदनपत्र बैंकों में धूल खा रहे हैं। स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा में बैंकर्स की लापरवाही उजागर होने पर सीडीओ ने कड़ी नाराजगी जताई है।
उद्योग केंद्र विभाग से उन बैंकों की सूची मांगी है जिन्होंने स्वरोजगार योजनाओं में रुचि नहीं ली है। सीडीओ जोगिंदर सिंह ने बताया कि बैंकों की लापरवाही से 42 लाख रुपये का बजट सरेंडर करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार योजनाओं में सबसे ज्यादा लापरवाही करने वाली बैंकों को चिह्नित उनके यहां से सरकारी खाते हटाए जाएंगे। बता दें कि जिले में कुल 165 बैंकें हैं। इन बैंकों में ग्राम पंचायत, स्कूल, सीएचसी, पीएचसी, ब्लाक, बीआरसी आदि विभागों के सरकारी खाते हैं। सरकारी खाते होने से लाखों रुपये का टर्नओवर बैंकों का हो रहा है। सीडीओ ने कहा कि उन बैंकों में यह खाते कराए जाएंगे जिन्होंने स्वरोजगार योजनाओं में अच्छा काम किया होगा।
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स्वरोजगार योजना में लापरवाही बैंकों को पड़ेगी भारी
सीडीओ ने ऋण आवेदन स्वीकृत न करने वाले बैंकों की सूची मांगी
क्रासर
बैंकों से सरकारी खाते हटाने की चेतावनी भी दी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से स्वरोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन बैंकों की मनमानी से बेरोजगारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में स्वरोजगार योजनाएं बैंकर्स की मनमानी की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और एक जनपद एक उत्पाद जैसी योजनाएं जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित हैं। जिला उद्योग केंद्र विभाग बेरोजगार युवाओं को चयन कर ऋण स्वीकृत करने के लिए 200 आवेदन पत्र संबंधित बैंकों को भेजे गए थे। इसके बाद आवेदक बैंकों के चक्कर लगाते थक जाते हैं और उनका लोन स्वीकृत नहीं हो पाता है। जिले में 150 आवेदनपत्र बैंकों में धूल खा रहे हैं। स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा में बैंकर्स की लापरवाही उजागर होने पर सीडीओ ने कड़ी नाराजगी जताई है।
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उद्योग केंद्र विभाग से उन बैंकों की सूची मांगी है जिन्होंने स्वरोजगार योजनाओं में रुचि नहीं ली है। सीडीओ जोगिंदर सिंह ने बताया कि बैंकों की लापरवाही से 42 लाख रुपये का बजट सरेंडर करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार योजनाओं में सबसे ज्यादा लापरवाही करने वाली बैंकों को चिह्नित उनके यहां से सरकारी खाते हटाए जाएंगे। बता दें कि जिले में कुल 165 बैंकें हैं। इन बैंकों में ग्राम पंचायत, स्कूल, सीएचसी, पीएचसी, ब्लाक, बीआरसी आदि विभागों के सरकारी खाते हैं। सरकारी खाते होने से लाखों रुपये का टर्नओवर बैंकों का हो रहा है। सीडीओ ने कहा कि उन बैंकों में यह खाते कराए जाएंगे जिन्होंने स्वरोजगार योजनाओं में अच्छा काम किया होगा।
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स्वरोजगार योजना में लापरवाही बैंकों को पड़ेगी भारी
सीडीओ ने ऋण आवेदन स्वीकृत न करने वाले बैंकों की सूची मांगी
क्रासर
बैंकों से सरकारी खाते हटाने की चेतावनी भी दी
अमर उजाला ब्यूरो