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मरीजों के लिए बंद रहे नर्सिंगहोम के दरवाजे

Wed, 07 Jun 2017 12:39 AM IST
Updated Wed, 07 Jun 2017 12:39 AM IST
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मरीजों के लिए बंद रहे नर्सिंगहोम के दरवाजे
मरीजों के लिए बंद रहे नर्सिंगहोम के दरवाजे
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उरई (जालौन)। सरकारी उपेक्षा व उत्पीड़न के विरोध में मंगलवार को जिले भर के नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालक हड़ताल पर रहे। मरीज नर्सिंग होम के गेट तक तो पहुंचे लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल सका। कई नर्सिंगहोम के बाहर तो मरीजों की भीड़ लगी रही लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें देखना तो दूर उनसे बात तक करना मुनासिब नहीं समझा। इस कारण भीषण गर्मी और उमस में तीमारदार अपने मरीजों को लेकर इधर-उधर भटकते रहे।

आईएमए के तत्वावधान में प्राइवेट डॉक्टरों ने मंगलवार को जिले भर के सभी नर्सिंग होम व क्लीनिक बंद रखे। बताते चलें कि जिले में 18 प्राइवेट नर्सिंग होम हैं। नर्सिंग होम बंद होने से मरीजों की भीड़ इनके बाहर लगी रही। कुछ मरीज तो पुराने पर्चे की दवा लेकर लौट गए। जबकि कुछ मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार ही करते रहे।
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वहीं दूसरी ओर डाक्टरों का कहना है कि एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्र सरकार को सात सूत्री मांग पत्र दिया है। इसमें डॉक्टरों के प्रति होने वाली हिंसा के लिए अलग से कानून बनाए जाने की मांग की गई है। साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर बनाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन को रोकने की मांग की गई है। मेडिकल कॉलेजोें से पास होने वाले विद्यार्थियों को पंजीयन से पूर्व परीक्षा पास करने की बाध्यता के प्रस्ताव पर भी रोक लगाई जाए।
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कोई दर्द लेकर लौटा तो कोई बिना
आंदोलन के नाम पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों ने मानवता की सभी हदें पार कर दी। प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीज दर्द से कहराते रहे और उनके परिजन डॉक्टर खोजते रहे। यही हाल बाहर से डॉक्टरों को दिखाने आए मरीजों का भी रहा। कोई अपने शरीर पर लगे टांकों का दर्द लेकर लौट गया तो किसी को बिना दवा के ही घर जाना पड़ा। लुहरगांव से शहर के एक नर्सिंग होम आई सरोज का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं था कि आज डॉक्टर नहीं देखेंगे, वर्ना इतनी दूर से वे दिखाने नहीं आतीं। गांव से सीधा मुख्यालय के लिए वाहन न होने से परेशानी होती है। नौशादा महोबा के जयसिंह कहते हैं कि मंगलवार को उनके बेटे के टांके कटने थे लेकिन डॉक्टर के न आने से उन्हें कल फिर आना पड़ेगा। पटेल नगर की कृष्णा जब कानपुर रोड स्थित एक नर्सिंग होम पहुंचीं तो वहां काफी देर इंतजार करने के बाद पता चला कि आज डॉक्टर नहीं आएंगे। उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। जबकि उनका आज आपरेशन होना था।


सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़
उरई। प्राइवेट अस्पतालों में हो रही अनदेखी के कारण मंगलवार को सरकारी अस्पतालों में मरीजों की काफी भीड़ रही। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाओं में पूरे दिन मरीजों की आवाजाही लगी रही। यही हाल कोंच, कालपी, जालौन, माधौगढ़ के सीएचसी और पीएचसी का भी था। यहां भी मरीज रोज की अपेक्षा अधिक आए।

- चौखट पर डटे रहे तीमारदार, डॉक्टरों ने दोहराई मांगे
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