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बरईगढ़ झील में सिंघाड़े की फसल की गई नीलाम
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:19 AM IST
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भीतरगांव (कानपुर)। विकास खंड के बरईगढ़ गांव की झील को अवैध रूप से किराए पर देकर की जा रही सिंघाड़े की खेती को एसडीएम घाटमपुर के आदेश के बाद बुधवार को 1.20 लाख रुपये की बोली में नीलाम कर दिया गया। वहीं, अवैध कब्जे के आरोपी के खिलाफ राजस्व अधिनियम की धारा 67 के तहत नर्वल तहसीलदार की अदालत में मुकदमा दर्ज किया गया है।
गांव की ऐतिहासिक झील के बड़े हिस्से को किराये पर उठाकर उसमें चोरी से सिंघाड़े की खेती कराई जा रही थी। अमर उजाला ने बीते 16 नवंबर को इस मामले की खबर को प्रमुखता से उजागर किया था। खबर छपने के बाद 21 नवंबर को एसडीएम (नर्वल) ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने राजस्व निरीक्षक को मामले की जांच के लिए भेजकर रिपोर्ट तलब की थी। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के बाद एसडीएम के निर्देश पर बुधवार को गांव में मुनादी कराने के बाद झील पर खड़ी फसल को जब्त कर उसकी नीलामी कराई गई।
नीलामी अधिकारी और नायब तहसीलदार राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि नीलामी बोली के दौरान गांववालों की भीड़ मौजूद रही। बाद में सबसे अधिक 1.20 लाख रुपये की बोली अवैध कब्जेदार रातेपुर गांव निवासी राजेंद्र गोड़िया की ही रही। उसीके नाम नीलामी दर्ज की गई। बताया कि बोलीदाता को तय रकम एक लाख बीस हजार रुपये 10 दिसंबर तक तहसील कोषागार में जमा करने और झील से 5 जनवरी 2019 तक हरहाल में कब्जा छोड़ देने के लिखित निर्देश दिए गए हैं। राजस्व निरीक्षक मुकेश कुमार और राजस्व लेखपाल त्रिशूल चंद्र पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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गांव की ऐतिहासिक झील के बड़े हिस्से को किराये पर उठाकर उसमें चोरी से सिंघाड़े की खेती कराई जा रही थी। अमर उजाला ने बीते 16 नवंबर को इस मामले की खबर को प्रमुखता से उजागर किया था। खबर छपने के बाद 21 नवंबर को एसडीएम (नर्वल) ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने राजस्व निरीक्षक को मामले की जांच के लिए भेजकर रिपोर्ट तलब की थी। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के बाद एसडीएम के निर्देश पर बुधवार को गांव में मुनादी कराने के बाद झील पर खड़ी फसल को जब्त कर उसकी नीलामी कराई गई।
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नीलामी अधिकारी और नायब तहसीलदार राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि नीलामी बोली के दौरान गांववालों की भीड़ मौजूद रही। बाद में सबसे अधिक 1.20 लाख रुपये की बोली अवैध कब्जेदार रातेपुर गांव निवासी राजेंद्र गोड़िया की ही रही। उसीके नाम नीलामी दर्ज की गई। बताया कि बोलीदाता को तय रकम एक लाख बीस हजार रुपये 10 दिसंबर तक तहसील कोषागार में जमा करने और झील से 5 जनवरी 2019 तक हरहाल में कब्जा छोड़ देने के लिखित निर्देश दिए गए हैं। राजस्व निरीक्षक मुकेश कुमार और राजस्व लेखपाल त्रिशूल चंद्र पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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