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औद्योेगिक कचरे से बनेगी बिजली, प्रदूषण में कमी आएगी

Wed, 05 Jul 2017 12:47 AM IST
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:47 AM IST
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औद्योेगिक कचरे से बनेगी बिजली, प्रदूषण में कमी आएगी
उन्नाव। सूबे के साथ जिले में भी बढ़ते प्रदूषण में कमी लाने की कवायद शुरू की गई है। जिले में स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे को दूसरे कामों में प्रयोग करने के लिए शासन स्तर पर मंथन किया जा रहा है। फिलहाल औद्योगिक कचरे से बिजली बनाने की योजना तैयार की गई है। नेडा को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने कोलकाता के एक निजी कंपनी के जरिये सर्वे का काम शुरू करा दिया है।
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जिले में आधा सैकड़ा से अधिक फैक्ट्रियां हैं जो बंथर, मगरवारा, दही चौकी व अकरमपुर में संचालित हैं। इनमें से करीब एक दर्जन ऐसी फैक्ट्रियां हैं जो अपने परिसर में ही निजी खर्च से ईटीपी (इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट) प्लांट लगाए हैं। शेष औद्योगिक इकाइयाें के संचालकों का दावा है कि वह बंथर और दही चौकी में स्थित कामन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) के जरिये अपने यहां का पानी शोधन करती हैं।
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जानकारों की मानें तो इसके बाद भी फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी खासा प्रदूषित रहता है। यही पानी गंगा में गिराया जाता है। जिससे गंगा का पानी साफ होने की बजाए लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। इसको संज्ञान में लेते हुए अब शासन ने इस दूषित पानी से निकलने वाले कचरे के जरिये पर्यावरण संरक्षण के उपाय तलाशने शुरू कर दिए हैं।
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पहला उपाय इस कचरे से बिजली बनाना है। इसके लिए वैकल्पिक ऊर्जा विभाग यानि नेडा को जिम्मेदारी दी गई है। नेडा ने औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले बायोवेस्ट (कचरे) के सर्वे के लिए कोलकाता की एबीबीपी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की मदद ली है।

30 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना: जिन फैक्ट्रियों से रोजाना 1200 किलोलीटर पानी निकलता है, वहां पर बिजली का उत्पादन हो सकता है। नेडा के परियोजना अधिकारी एसडी दुबे ने बताया प्रदेश सरकार ने बिजली उत्पादन प्लांट लगाने के लिए औद्योगिक इकाइयों को 50 प्रतिशत तक छूट दे रही है।

फैक्ट्री संचालकों को प्लांट लगाना होगा। जिसमें जो बिजली बनेगी वह उसे पहले खुद प्रयोग कर सकेगा। यदि बिजली सरप्लस होती है तो वह बिजली बोर्ड को बेच भी सकता है। उन्हाेंने बताया 1200 किलोलीटर डिस्चार्ज से एक मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है। फिलहाल जिले में 30 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

मीथेन गैस उत्सर्जन की भी तैयारी: कोलकाता की कंपनी से कराए जा रहे सर्वे में एक तरफ बिजली उत्पादन और दूसरी तरफ गैस उत्सर्जन की दिशा में भी काम किया जा रहा है। नेडा पीओ की मानें तो सर्वे कंपनी के अधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्र की टेनरियों से बायो ग्रीन गैस तैयार किए जाने की संभावना जताई है।


उन्होंने बताया कि निजी फैक्ट्रियों के लगवाए गए ईटीपी से निकलने वाला वेस्ट प्रदूषित ही रहता है। ऐसे वेस्ट से बिजली व गैस उत्पादन किया जा सकता है। पश्चिम भारत में जहरीले कचरे से बिजली व गैस बनाने का प्रयोग सफल रहा है। ऐसे में अपने यहां भी ऐसी ही संभावना जताई जा रही है।

-कचरे से पर्यावरण संरक्षण के काम आने के उपाय तलाशने में जुटा शासन
-नेडा को दी गई जिम्मेदारी, कोलकाता की निजी कंपनी ने शुरू किया सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
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