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बालिका की सुपुर्दगी पर किया हंगामा
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
Updated Fri, 16 Jan 2015 11:46 PM IST
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बाल संरक्षण विभाग ने नाले में पड़ी मिली बालिका को शुक्रवार को माता-पिता के सुपर्द कर दिया। हालांकि ग्रामीणों ने बालिका को नहीं दिए जाने पर काफी देर हंगामा काटा। बाद में पुलिस के आ जाने पर ग्रामीण शांत हुए।
सात जनवरी को एक बालिका छह माह की लावारिस हालत में फत्तेहपुर गांव के पास नाले में पड़ी मिली। पुलिस ने बालिका को पालन-पोषण के लिए गांव के कुशलपाल को सौंप दी। बालिका के संबंध में बाल कल्याण समिति न्यायपीठ ने पत्राचार किया कि बालिका को बाल कल्याण समिति में पेश किया जाए।
बालिका किशोर न्याय अधिनियम के तहत बालिका को बाल संरक्षण अधिकारी ने बालिका के जैविक माता-पिता को सौंप दिया। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि उक्त बालिका अपनी ननिहाल ईशेपुर शिवराजपुर में रह रही थी। बालिका के पिता विनोद व दादी बच्ची को वहां से ले आए, और उन्होंने उक्त बालिका को नाले में फेंक दिया था।
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जो कि बाद में चौकी पुलिस को मिलने पर ग्रामीण कुशलपाल के सुपर्द में पोषण के लिए दे दी गई थी। शुक्रवार को माता-पिता के सुपुर्दगी में दिए जाने का ग्रामीण ने विरोध किया। बाल संरक्षण अधिकारी ने कहा कि पिता व दादी से एक शपथ पत्र भी लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह संपत्ति को बच्ची के नाम कर देंगे। उधर बालिका की दादी का कहना था कि वह उनके हाथ से छूट गई थी। उन्होंने काफी खोजा, लेकिन वह नहीं मिली।
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सात जनवरी को एक बालिका छह माह की लावारिस हालत में फत्तेहपुर गांव के पास नाले में पड़ी मिली। पुलिस ने बालिका को पालन-पोषण के लिए गांव के कुशलपाल को सौंप दी। बालिका के संबंध में बाल कल्याण समिति न्यायपीठ ने पत्राचार किया कि बालिका को बाल कल्याण समिति में पेश किया जाए।
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बालिका किशोर न्याय अधिनियम के तहत बालिका को बाल संरक्षण अधिकारी ने बालिका के जैविक माता-पिता को सौंप दिया। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि उक्त बालिका अपनी ननिहाल ईशेपुर शिवराजपुर में रह रही थी। बालिका के पिता विनोद व दादी बच्ची को वहां से ले आए, और उन्होंने उक्त बालिका को नाले में फेंक दिया था।
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जो कि बाद में चौकी पुलिस को मिलने पर ग्रामीण कुशलपाल के सुपर्द में पोषण के लिए दे दी गई थी। शुक्रवार को माता-पिता के सुपुर्दगी में दिए जाने का ग्रामीण ने विरोध किया। बाल संरक्षण अधिकारी ने कहा कि पिता व दादी से एक शपथ पत्र भी लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह संपत्ति को बच्ची के नाम कर देंगे। उधर बालिका की दादी का कहना था कि वह उनके हाथ से छूट गई थी। उन्होंने काफी खोजा, लेकिन वह नहीं मिली।