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Kannauj News: ताक पर शिक्षा का अधिकार, 68,00 सीटों में सिर्फ 600 बच्चों का प्रवेश
Thu, 27 Mar 2025 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Thu, 27 Mar 2025 12:07 AM IST
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कन्नौज। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) को प्राइवेट स्कूल ठेंगा दिखा रहे हैं। जिले के 407 निजी स्कूलों में कुल 68,00 सीटों पर आरटीई के तहत जरूरतमंद लोगों के बच्चों का प्रवेश दिया जाना है। हालत यह है कि केवल 600 बच्चों को ही प्रवेश दिया गया है। वहीं, कई स्कूलों ने पोर्टल पर सीटें कम दिखाईं हैं, जबकि उनके विद्यालय में अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इस तरह कानून को ताक पर रख कर बच्चों को प्रवेश देने से वंचित किया जा रहा है। शिक्षा विभाग और प्रशासन इस तरफ ध्यान भी नहीं दे रहा है।
निशुल्क बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी बच्चों को प्रवेश देना होता है। ऐसा करने में निजी स्कूल आनाकानी करते हैं। बताते हैं कि पोर्टल पर पंजीकरण कराते समय कई निजी स्कूलों ने प्री-प्राइमरी का जिक्र ही नहीं किया है। सीटें भी कम दिखाई हैं। शिक्षा विभाग भी निजी स्कूलों से कानून का पालन नहीं करवा पाता है। इधर-उधर की बातों में उलझा कर निजी स्कूल बच्चों को प्रवेश देने से वंचित कर देते हैं।
जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में चार चरणों में आरटीई के तहत अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश दिया गया है। प्रथम चरण में 57, दूसरे चरण में 202, तीसरे चरण में 203 और चौथे चरण में 138 बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में कराया गया है। इसके लिए 900 से अधिक आवेदन आए थे। जांच के दौरान कई आवेदन अपात्र मिले इस वजह से उन्हें निरस्त कर दिया गया।
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जिले में 407 प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर पंजीकृत हैं। जो नए पंजीकृत हुए हैं, उनकी मैपिंग कराई जा रही है। पोर्टल पर दर्ज जानकारी का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। प्रयास है कि नवीन सत्र में इस बार लक्ष्य के सापेक्ष सभी बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश मिल सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारी भले ही प्रयास करने की बात कह रहे हैं, लेकिन कानून का पालन कराने में वह विफल नजर आ रहे हैं। जिले में जितनी सीटें हैं उसके सापेक्ष यदि केवल 600 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है, तो यह विभाग की नाकामी ही मानी जाएगी। कानून का सही तरह से पालन हो यह शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। जानकार कहते हैं कि इस मामले में डीएम को भी हस्तक्षेप करना चाहिए। अभिभावकों को भी अपनी आवाज उठानी चाहिए।
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आरटीई के तहत चार चरणों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की गई है। जो निजी स्कूल पोर्टल पर सही जानकारी अपलोड नहीं कर रहे हैं, उनकी क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी और सीटें कम या प्री-प्राइमरी का जिक्र नहीं हुआ तो मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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निशुल्क बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी बच्चों को प्रवेश देना होता है। ऐसा करने में निजी स्कूल आनाकानी करते हैं। बताते हैं कि पोर्टल पर पंजीकरण कराते समय कई निजी स्कूलों ने प्री-प्राइमरी का जिक्र ही नहीं किया है। सीटें भी कम दिखाई हैं। शिक्षा विभाग भी निजी स्कूलों से कानून का पालन नहीं करवा पाता है। इधर-उधर की बातों में उलझा कर निजी स्कूल बच्चों को प्रवेश देने से वंचित कर देते हैं।
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जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में चार चरणों में आरटीई के तहत अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश दिया गया है। प्रथम चरण में 57, दूसरे चरण में 202, तीसरे चरण में 203 और चौथे चरण में 138 बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में कराया गया है। इसके लिए 900 से अधिक आवेदन आए थे। जांच के दौरान कई आवेदन अपात्र मिले इस वजह से उन्हें निरस्त कर दिया गया।
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जिले में 407 प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर पंजीकृत हैं। जो नए पंजीकृत हुए हैं, उनकी मैपिंग कराई जा रही है। पोर्टल पर दर्ज जानकारी का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। प्रयास है कि नवीन सत्र में इस बार लक्ष्य के सापेक्ष सभी बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश मिल सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारी भले ही प्रयास करने की बात कह रहे हैं, लेकिन कानून का पालन कराने में वह विफल नजर आ रहे हैं। जिले में जितनी सीटें हैं उसके सापेक्ष यदि केवल 600 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है, तो यह विभाग की नाकामी ही मानी जाएगी। कानून का सही तरह से पालन हो यह शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। जानकार कहते हैं कि इस मामले में डीएम को भी हस्तक्षेप करना चाहिए। अभिभावकों को भी अपनी आवाज उठानी चाहिए।
आरटीई के तहत चार चरणों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की गई है। जो निजी स्कूल पोर्टल पर सही जानकारी अपलोड नहीं कर रहे हैं, उनकी क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी और सीटें कम या प्री-प्राइमरी का जिक्र नहीं हुआ तो मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी