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आवासीय सुविधा का सपना चूर
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:02 AM IST
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समाज कल्याण विभाग की लापरवाही से शहर के मोहल्ला
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मकरंदनगर में दलित छात्रों के लिए बनाया गया छात्रावास भूत बंगले में
तब्दील हो गया है। दिन में जहां यहां आवारा मवेशी विचरण करते हैं, वहीं
अंधेरा होते ही जुआरी और नशेड़ियों का जमघट लगता है।
शासन ने गरीब छात्रों को पढ़ने के लिए आवासीय सुविधा देने का जो सपना देखा था वह चकनाचूर हो गया है। समाज कल्याण विभाग ने मकरंदनगर में विनोद दीक्षित अस्पताल के ठीक सामने पश्चिम दिशा में करोड़ों रुपये की जमीन अधिग्रहीत कर भव्य छात्रावास भवन बनवाया था।
लाखों रुपये बिल्डिंग बनाने पर खर्च हुए। दो मंजिला इस हास्टल में 17 कमरे बने हैं। यहां एक साथ 48 छात्र रहकर पढ़ाई कर सकते हैं, पर अफसरों की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से एक भी छात्र को रहने के लिए यहां कमरा नहीं मिल सका है।
कई साल तक यहां पुलिस लाइन संचालित रहने के बाद करीब आठ माह पहले यह पुलिस के कब्जे से मुक्त हुआ था। फिलहाल समाज कल्याण विभाग के हवाले यह छात्रावास है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले हास्टल में छात्रों के रहने लायक व्यवस्थाएं करने के दावे करने वाले अफसरों की बातें हवाई साबित हुई हैं।
इसका खामियाजा सरकारी सुविधा से गरीब तबके के छात्रों को वंचित होकर चुकानी पड़ रही हैं। कोई कई किमी का चक्कर लगाकर साइकिल से कालेज तक आने को मजबूर है तो कोई रिश्तेदार के घर पर रहकर या किराए पर कमरा लेकर पढ़ने को मजबूर है।
उधर, छात्रों से जुड़े इस समस्या का समाधान कराने को कोई छात्रनेता या राजनैतिक दलों के छात्र संगठन आगे नहीं आ रहे हैं। पीएसएम कालेज में छात्रसंघ चुनाव के बाद नेता खामोश हो गए हैं, इसलिए सुस्ती बरत रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के कानों पर भी जूं नहीं रेंग रही है।
शासन ने गरीब छात्रों को पढ़ने के लिए आवासीय सुविधा देने का जो सपना देखा था वह चकनाचूर हो गया है। समाज कल्याण विभाग ने मकरंदनगर में विनोद दीक्षित अस्पताल के ठीक सामने पश्चिम दिशा में करोड़ों रुपये की जमीन अधिग्रहीत कर भव्य छात्रावास भवन बनवाया था।
लाखों रुपये बिल्डिंग बनाने पर खर्च हुए। दो मंजिला इस हास्टल में 17 कमरे बने हैं। यहां एक साथ 48 छात्र रहकर पढ़ाई कर सकते हैं, पर अफसरों की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से एक भी छात्र को रहने के लिए यहां कमरा नहीं मिल सका है।
कई साल तक यहां पुलिस लाइन संचालित रहने के बाद करीब आठ माह पहले यह पुलिस के कब्जे से मुक्त हुआ था। फिलहाल समाज कल्याण विभाग के हवाले यह छात्रावास है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले हास्टल में छात्रों के रहने लायक व्यवस्थाएं करने के दावे करने वाले अफसरों की बातें हवाई साबित हुई हैं।
इसका खामियाजा सरकारी सुविधा से गरीब तबके के छात्रों को वंचित होकर चुकानी पड़ रही हैं। कोई कई किमी का चक्कर लगाकर साइकिल से कालेज तक आने को मजबूर है तो कोई रिश्तेदार के घर पर रहकर या किराए पर कमरा लेकर पढ़ने को मजबूर है।
उधर, छात्रों से जुड़े इस समस्या का समाधान कराने को कोई छात्रनेता या राजनैतिक दलों के छात्र संगठन आगे नहीं आ रहे हैं। पीएसएम कालेज में छात्रसंघ चुनाव के बाद नेता खामोश हो गए हैं, इसलिए सुस्ती बरत रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के कानों पर भी जूं नहीं रेंग रही है।