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Kannauj News: अगस्त्य तारा अस्त होने के बाद सताएगा नौतपा
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तालग्राम। आसमान में दक्षिण की ओर रात में दिखने वाला अगस्त्य तारा अस्त होने के बाद नौतपा सताएगा। इससे धरती पर तपिश और तेज हो जाएगी। नौतपा के नौ दिन आम की फसल के लिए महत्वपूर्ण है। आम के पकने में मिठास भी बढ़ेगी। अगस्त्य तारा अस्त होने के बाद 25 मई से दो जून तक नौतपा प्रभावी होगा।
आचार्य पंडित कमलेश मिश्रा ने बताया कि भवानी शंकर पंचांग के अनुसार अगस्त्य तारा इस बार 22 मई को अस्त हो रहा है और दोबारा सितंबर में उदित होगा। अस्त होने से बादल बारिश के आसार बनने लग जाते हैं और उदित होने पर चौमासे की बारिश थम जाती है। इसके अस्त होने एवं सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर नौतपा का प्रभाव शुरू होगा। सनातन धर्म के मुताबिक अगस्त्य तारा का नाम महर्षि अगस्त्य के नाम पर रखा गया है।
मान्यता है कि उन्होंने ही इस तारे की खोज की, जिसके कारण उनका नाम इस तारे को मिला। तारा अस्त होने के बाद मौसम के रुख में परिवर्तन की संभावना बनती है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अमर सिंह ने बताया कि नौतपा में गर्मी चरम पर रहती है, जिससे आम की फसल पकनी शुरू हो जाती है और मिठास भी बढ़ती है। अधिक गर्मी के कारण पकने की प्रक्रिया से फल फटने लगते हैं। इस कारण सिंचाई की बेहद जरूरत होती है। यदि बारिश हो जाए तो वह सोने पर सुहागा का काम करती है। इससे आम की पैदावार अच्छी होती है।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र यादव का कहना है कि नौतपा में सूर्य हमारी पृथ्वी के सबसे करीब होता है। इस कारण गर्मी स्वाभाविक रूप से बढ़ी जाती है। इसका प्रभाव नौ दिन तक रहता है। इसलिए इसे नौतपा कहा जाता है। इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से ही तापमान में अधिकता बनी है। इन दो घरों से निकलते समय सावधानी बरतें, बदन को ढककर रखें।
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आचार्य पंडित कमलेश मिश्रा ने बताया कि भवानी शंकर पंचांग के अनुसार अगस्त्य तारा इस बार 22 मई को अस्त हो रहा है और दोबारा सितंबर में उदित होगा। अस्त होने से बादल बारिश के आसार बनने लग जाते हैं और उदित होने पर चौमासे की बारिश थम जाती है। इसके अस्त होने एवं सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर नौतपा का प्रभाव शुरू होगा। सनातन धर्म के मुताबिक अगस्त्य तारा का नाम महर्षि अगस्त्य के नाम पर रखा गया है।
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मान्यता है कि उन्होंने ही इस तारे की खोज की, जिसके कारण उनका नाम इस तारे को मिला। तारा अस्त होने के बाद मौसम के रुख में परिवर्तन की संभावना बनती है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अमर सिंह ने बताया कि नौतपा में गर्मी चरम पर रहती है, जिससे आम की फसल पकनी शुरू हो जाती है और मिठास भी बढ़ती है। अधिक गर्मी के कारण पकने की प्रक्रिया से फल फटने लगते हैं। इस कारण सिंचाई की बेहद जरूरत होती है। यदि बारिश हो जाए तो वह सोने पर सुहागा का काम करती है। इससे आम की पैदावार अच्छी होती है।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र यादव का कहना है कि नौतपा में सूर्य हमारी पृथ्वी के सबसे करीब होता है। इस कारण गर्मी स्वाभाविक रूप से बढ़ी जाती है। इसका प्रभाव नौ दिन तक रहता है। इसलिए इसे नौतपा कहा जाता है। इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से ही तापमान में अधिकता बनी है। इन दो घरों से निकलते समय सावधानी बरतें, बदन को ढककर रखें।