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बारात में घोड़ी बिदकी तो घोड़ीवाले को मार डाला
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
Updated Fri, 04 Mar 2016 01:09 AM IST
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बारात में लोगों की शरारत पर घोड़ी के बिदकने से कुछ कुर्सियां टूट गईं। बस इतनी सी बात पर बारात में शामिल लोगों ने घोड़ी मालिक को पीट-पीटकर मार डाला।
तालग्राम थाने के बमरौली गांव के सदानंद दुबे ने बताया कि उनका छोटा भाई ज्ञानीचंद दुबे उर्फ नारद (35) बुधवार को मछरिया गांव के धीरेंद्र पुत्र सुरेश की बारात में हरदोई जिले के थाना बिलग्राम के गांव निजामपुर गया था।
दूल्हे के भाई लालू ने उसकी घोड़ी किराए पर ली थी। घोड़ी को लोडर पर लादकर ज्ञानीचंद गांव निजामपुर पहुंचा। द्वारचार व जयमाल के समय नाच-गाने के दौरान किसी की शरारत पर घोड़ी बिदक गई। इससे कुर्सियां टूट गईं। इससे गुस्साए लोगों ने ज्ञानीचंद की जमकर पिटाई कर दी। इससे उसकी मौत हो गई।
लोग गुरुवार सुबह घोड़ी को बमरौली गांव के बाहर छोड़ गए। ज्ञानीचंद के न आने पर परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो सुरेश व उसके साथियों ने गुमराह कर दिया।
बाद में कुछ लोग उसके शव को लोडर पर लादकर जा रहे थे। ज्ञानीचंद के भाई सदानंद ने कुशलपुरवा के समीप इन लोगों को देख लिया। इस पर सुरेश ने कहा कि जयमाल व द्वारचार के समय बारातियों व जनातियों में मारपीट हो गई थी। इसमें ज्ञानीचंद घायल हो गया। उसे अस्पताल ला रहे थे, तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
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सदानंद के भाई ने आरोप लगाया कि हत्या करने के बाद ये लोग शव भी गायब करने के प्रयास में थे। उसने घटना की सूचना तालग्राम थाने में दी। थानाध्यक्ष मो. अनवर अहमद ने घटनास्थल बिलग्राम थाना क्षेत्र का बताकर वहीं रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा। खबर लिखे जाने तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी।
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तालग्राम थाने के बमरौली गांव के सदानंद दुबे ने बताया कि उनका छोटा भाई ज्ञानीचंद दुबे उर्फ नारद (35) बुधवार को मछरिया गांव के धीरेंद्र पुत्र सुरेश की बारात में हरदोई जिले के थाना बिलग्राम के गांव निजामपुर गया था।
दूल्हे के भाई लालू ने उसकी घोड़ी किराए पर ली थी। घोड़ी को लोडर पर लादकर ज्ञानीचंद गांव निजामपुर पहुंचा। द्वारचार व जयमाल के समय नाच-गाने के दौरान किसी की शरारत पर घोड़ी बिदक गई। इससे कुर्सियां टूट गईं। इससे गुस्साए लोगों ने ज्ञानीचंद की जमकर पिटाई कर दी। इससे उसकी मौत हो गई।
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लोग गुरुवार सुबह घोड़ी को बमरौली गांव के बाहर छोड़ गए। ज्ञानीचंद के न आने पर परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो सुरेश व उसके साथियों ने गुमराह कर दिया।
बाद में कुछ लोग उसके शव को लोडर पर लादकर जा रहे थे। ज्ञानीचंद के भाई सदानंद ने कुशलपुरवा के समीप इन लोगों को देख लिया। इस पर सुरेश ने कहा कि जयमाल व द्वारचार के समय बारातियों व जनातियों में मारपीट हो गई थी। इसमें ज्ञानीचंद घायल हो गया। उसे अस्पताल ला रहे थे, तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
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सदानंद के भाई ने आरोप लगाया कि हत्या करने के बाद ये लोग शव भी गायब करने के प्रयास में थे। उसने घटना की सूचना तालग्राम थाने में दी। थानाध्यक्ष मो. अनवर अहमद ने घटनास्थल बिलग्राम थाना क्षेत्र का बताकर वहीं रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा। खबर लिखे जाने तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी।