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मंदी: पेंट्स कारोबार भी 40 फीसदी तक गिरा
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तिर्वा क्रासिंग स्थित पेंट्स की दुकान।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। देश में छाई आर्थिक सुस्ती ने हर व्यापार की कमर तोड़ दी है। जिले का पेंट्स कारोबार भी मंदी की मार झेल रहा है। कारोबारियाें की मानें तो व्यापार में 35-40 फीसदी तक गिरावट आई है। पिछले तीन-चार माह से व्यापार को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। कारोबारियाें को उम्मीद है कि नवरात्र से व्यापार पटरी पर लौटने लगेगा।
पेंट्स कारोबारी रमेश सिंह के मुताबिक जिले में पेंट्स का कारोबार रोजाना करीब 20 लाख का है। यह इस समय यह दस लाख के आसपास ठहर गया है। कई दुकानों पर बोहनी भी मुश्किल से हो रही है। बड़े दुकानदार किसी तरह कर्मियों का मेहनताना और दुकान का किराया व्यवस्थित किए हुए हैं। छोटे दुकानदार खासी मुसीबत में हैं। कई छोटे दुकानदार जिनके पास एक ही कर्मी था, वह उसकी छुट्टी कर चुके हैं।
पुट्टी, पेंट कारीगर सुरेश, रामधन, शिरीष ने बताया कि तीन-चार माह पहले तक उनके पास अगले कई महीने तक के लिए काम था। अब जहां कर रहे हैं, वहीं खरखसा लग रहा है। यह रुक-रुक कर माल उपलब्ध करा रहे हैं। बाकी जगह जहां काम करना था, बात करने पर कहते हैं, कुछ महीने रुककर काम कराएंगे। इससे थोड़ी बहुत जमा पूंजी भी रोजाना के खर्चों में खत्म हो गई है। अगर यही हाल दो-तीन महीने और रहा तो रोजी-रोटी के लाले हो जाएंगे।
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पेंट्स कारोबारी रजनीश, सुमित बताते हैं कि व्यापार में मंदी आने से बाजार में पैसा फंस गया है। कंपनी से आए माल का पेमेंट करना ही पड़ रहा है। इससे जमा पूंजी फंसती जा रही है। जिन लोगों के यहां बराबर माल जा रहा था, वहां उधारी भी थी। व्यापार पटरी पर लौटे तो फंसा हुआ पैसा भी लौटना शुरू हो।
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पेंट्स कारोबारी रमेश सिंह के मुताबिक जिले में पेंट्स का कारोबार रोजाना करीब 20 लाख का है। यह इस समय यह दस लाख के आसपास ठहर गया है। कई दुकानों पर बोहनी भी मुश्किल से हो रही है। बड़े दुकानदार किसी तरह कर्मियों का मेहनताना और दुकान का किराया व्यवस्थित किए हुए हैं। छोटे दुकानदार खासी मुसीबत में हैं। कई छोटे दुकानदार जिनके पास एक ही कर्मी था, वह उसकी छुट्टी कर चुके हैं।
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पुट्टी, पेंट कारीगर सुरेश, रामधन, शिरीष ने बताया कि तीन-चार माह पहले तक उनके पास अगले कई महीने तक के लिए काम था। अब जहां कर रहे हैं, वहीं खरखसा लग रहा है। यह रुक-रुक कर माल उपलब्ध करा रहे हैं। बाकी जगह जहां काम करना था, बात करने पर कहते हैं, कुछ महीने रुककर काम कराएंगे। इससे थोड़ी बहुत जमा पूंजी भी रोजाना के खर्चों में खत्म हो गई है। अगर यही हाल दो-तीन महीने और रहा तो रोजी-रोटी के लाले हो जाएंगे।
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पेंट्स कारोबारी रजनीश, सुमित बताते हैं कि व्यापार में मंदी आने से बाजार में पैसा फंस गया है। कंपनी से आए माल का पेमेंट करना ही पड़ रहा है। इससे जमा पूंजी फंसती जा रही है। जिन लोगों के यहां बराबर माल जा रहा था, वहां उधारी भी थी। व्यापार पटरी पर लौटे तो फंसा हुआ पैसा भी लौटना शुरू हो।