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कैसे दूर हो बेरोजगारी, मैनेजर मांग रहे हिस्सेदारी
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मामले की जानकारी देते डीएम रवींद्र कुमार।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। बेरोजगारी दूर करने में प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों को बैंक अफसर पलीता लगा रहे हैं। ताजा मामला कन्नौज शहर से जुड़ा है। यहां के एक युवक ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत इत्र कारखाना लगाने के लिए लोन लेना चाहा तो बैंक मैनेजर ने कमीशन की मांग कर दी। युवक को करीब दो महीने तक दौड़ाया। डीएम रवींद्र कुमार के आदेश के बाद भी बैंक मैनेजर ने अड़ियल रुख अख्तियार रखा। लोन स्वीकृत नहीं किया। शुक्रवार को युवक ने डीएम को पूरे मामले से अवगत कराया तो उनका पारा चढ़ गया। एलडीएम को फोन कर संबंधित बैंक मैनेजर को कार्यालय तलब कर लिया। यहां लापरवाही बरतने पर बैंक मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और हिरासत में लेने के लिए सदर कोतवाल को बुला लिया। काफी देर तक चले मामले में बैंक मैनेजर पांच लाख रुपये का लोन देने को राजी हुआ। लिखित रूप से डीएम को इसके लिए पत्र सौंपा। इसके बाद डीएम ने उसे जाने दिया।
शहर के बगिया सलेमपुर रमई निवासी रोहित राजपूत पुत्र हरिश्चंद्र राजपूत गांव में ही गुलाब जल का छोटा कारखाना लगाए हैं। काम को बढ़ाने के लिए रोहित ने ओडीपी योजना के तहत सवा 14 लाख रुपये के लोन के लिए एक बैंक की शाखा में प्रोजेक्ट दाखिल किया था। चार नवंबर को विकास भवन में साक्षात्कार हुआ। इसमें वह सफल रहे। रोहित राजपूत ने बताया कि 16 नवंबर को वह बैंक की शाखा गए तो बैंक मैनेजर ने लोन स्वीकृत करने से पहले सर्वे का आश्वासन देकर भेज दिया। पहले 22 और फिर 28 नवंबर को वह फिर बैंक गए। उन्होंने सर्वे कराने के लिए कहा। बैंक मैनेजर ने फिर टहला दिया। नौ दिसंबर को जिलाधिकारी रवींद्र कुमार से इसकी शिकायत की। डीएम ने जीएम डीआईसी से जांच कराई तो बैंक मैनेजर ने प्रस्ताव सर्विस एरिया के बाहर का बता दिया। 13 दिसंबर को डीएम ने बैंक मैनेजर को तलब किया तो उन्होंने सवा 14 लाख रुपये का लोन देने के लिए हामी भर दी। इसके बाद 16 दिसंबर को बैंक बुलाकर जरूरी प्रपत्रों की लंबी सूची पकड़ा दी। इसे पूरा करने मुश्किल हो गया। रोहित राजपूत का आरोप है कि उन्होंने जमीन गिरवी रखकर लोन देने के लिए भी कहा लेकिन बात नहीं बनी। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने दस फीसदी कमीशन देने की मांग की। इसे देने से इनकार कर दिया।
शुक्रवार को रोहित ने पूरे मामले की जानकारी डीएम को दी तो वह भड़क गए। एलडीएम मनोज सिन्हा को फोन कर संबंधित बैंक मैनेजर को साथ लेकर आने के निर्देश दिए। मैनेजर के आने पर डीएम ने लोन स्वीकृत न करने का कारण पूछा तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने कमीशन मांगने के आरोप में बैंक मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए सदर कोतवाली प्रभारी विनोद मिश्रा को कार्यालय बुला लिया। रोहित के दिए गए आरोप पत्र को कोतवाल को दे दिया। एलडीएम को निर्देश दिए कि बैंक मैनेजर ने अपने कार्यकाल में जितने लोन स्वीकृत किए, उनकी जांच कराई जाए। पता लगाएं कि स्वीकृत लोन में उन्होंने कितने प्रपत्र जमा कराए हैं। यह सुनकर बैंक मैनेजर के हाथ पांव फूल गए। काफी देर तक चले मामले में बाद में जीएम डीआईसी हरिराम राजपूत और एलडीएम की मौजूदगी में बैंक मैनेजर ने लिखित रूप से पांच लाख का लोन स्वीकृत करने का पत्र दिया। तब डीएम ने कार्यालय से जाने दिया।
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बैंक मैनेजर ने कहा कि रोहित राजपूत ने सवा 14 लाख रुपये का लोन मांगा था। दस लाख से ज्यादा का लोन देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लोन डूबने का भी डर था। इससे स्वीकृत नहीं किया। अब पांच लाख रुपये का लोन देने पर सहमति बनी है। जैसे ही रोहित जरूरी प्रपत्र देंगे, लोन स्वीकृत कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि सरकार की योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैंक मैनेजर ने उनके आदेश की भी अवहेलना की। उनके सामने लोन देने की हामी भरने के बाद भी आवेदक को टहलाया गया। युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शहर के बगिया सलेमपुर रमई निवासी रोहित राजपूत पुत्र हरिश्चंद्र राजपूत गांव में ही गुलाब जल का छोटा कारखाना लगाए हैं। काम को बढ़ाने के लिए रोहित ने ओडीपी योजना के तहत सवा 14 लाख रुपये के लोन के लिए एक बैंक की शाखा में प्रोजेक्ट दाखिल किया था। चार नवंबर को विकास भवन में साक्षात्कार हुआ। इसमें वह सफल रहे। रोहित राजपूत ने बताया कि 16 नवंबर को वह बैंक की शाखा गए तो बैंक मैनेजर ने लोन स्वीकृत करने से पहले सर्वे का आश्वासन देकर भेज दिया। पहले 22 और फिर 28 नवंबर को वह फिर बैंक गए। उन्होंने सर्वे कराने के लिए कहा। बैंक मैनेजर ने फिर टहला दिया। नौ दिसंबर को जिलाधिकारी रवींद्र कुमार से इसकी शिकायत की। डीएम ने जीएम डीआईसी से जांच कराई तो बैंक मैनेजर ने प्रस्ताव सर्विस एरिया के बाहर का बता दिया। 13 दिसंबर को डीएम ने बैंक मैनेजर को तलब किया तो उन्होंने सवा 14 लाख रुपये का लोन देने के लिए हामी भर दी। इसके बाद 16 दिसंबर को बैंक बुलाकर जरूरी प्रपत्रों की लंबी सूची पकड़ा दी। इसे पूरा करने मुश्किल हो गया। रोहित राजपूत का आरोप है कि उन्होंने जमीन गिरवी रखकर लोन देने के लिए भी कहा लेकिन बात नहीं बनी। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने दस फीसदी कमीशन देने की मांग की। इसे देने से इनकार कर दिया।
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शुक्रवार को रोहित ने पूरे मामले की जानकारी डीएम को दी तो वह भड़क गए। एलडीएम मनोज सिन्हा को फोन कर संबंधित बैंक मैनेजर को साथ लेकर आने के निर्देश दिए। मैनेजर के आने पर डीएम ने लोन स्वीकृत न करने का कारण पूछा तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने कमीशन मांगने के आरोप में बैंक मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए सदर कोतवाली प्रभारी विनोद मिश्रा को कार्यालय बुला लिया। रोहित के दिए गए आरोप पत्र को कोतवाल को दे दिया। एलडीएम को निर्देश दिए कि बैंक मैनेजर ने अपने कार्यकाल में जितने लोन स्वीकृत किए, उनकी जांच कराई जाए। पता लगाएं कि स्वीकृत लोन में उन्होंने कितने प्रपत्र जमा कराए हैं। यह सुनकर बैंक मैनेजर के हाथ पांव फूल गए। काफी देर तक चले मामले में बाद में जीएम डीआईसी हरिराम राजपूत और एलडीएम की मौजूदगी में बैंक मैनेजर ने लिखित रूप से पांच लाख का लोन स्वीकृत करने का पत्र दिया। तब डीएम ने कार्यालय से जाने दिया।
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बैंक मैनेजर ने कहा कि रोहित राजपूत ने सवा 14 लाख रुपये का लोन मांगा था। दस लाख से ज्यादा का लोन देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लोन डूबने का भी डर था। इससे स्वीकृत नहीं किया। अब पांच लाख रुपये का लोन देने पर सहमति बनी है। जैसे ही रोहित जरूरी प्रपत्र देंगे, लोन स्वीकृत कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि सरकार की योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैंक मैनेजर ने उनके आदेश की भी अवहेलना की। उनके सामने लोन देने की हामी भरने के बाद भी आवेदक को टहलाया गया। युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।