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तबाही की राह पर किसान, सूख रहा हालैंड, चिप्सोना आलू
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तालग्राम। आलू किसान फिर से तबाही की राह पर हैं। बाहरी प्रांतों में ज्यादा डिमांड न होने की वजह से भाव गिर गए हैं। इन दिनों कोल्ड स्टोरेज में आलू पैकेट वजन 50 से 55 किलो तक 380 रुपये में बिक रहा है। ऐसे में कोल्ड भाड़ा और अन्य खर्च के बाद लागत निकलना मुश्किल लग रहा है। आलू के भावाें में उछाल न आने से शीतगृहों से केवल 25 से 30 फीसदी निकासी हो पाई है।
किसानों ने आलू मंदी के हालात पहले भी देखे हैं। मंदी से किसान आलू को कोल्ड स्टोरेज में छोड़ देते हैं। ऐसे में शीतगृह मालिक बाहर निकाल कर सड़क के किनारे फेंक देते हैं। वर्ष 1997, 2006, 2012 और 2017 में आलू फेंका जा चुका है। इलाकाई किसानों का कहना है कि जिले में आलू आधारित उद्योग की दरकार है। ज्यादा उत्पादन करने के बावजूद किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो रही है। राजनीतिक पार्टियां लोकसभा और विधानसभा चुनाव में किसानों को भरोसा देकर वोट बटोर लेती हैं।
किसानों के भले के लिए कुछ नहीं होता। वहीं दूसरी ओर आलू के भाव गिरने के बावजूद फुटकर विक्रेताओं की चांदी है। भाव में कोई विशेष अंतर नहीं आया है। लोगों को चिप्सोना 20 रुपये और सामान्य आलू 12 से 15 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
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मायापुर्वा निवासी किसान लाखन सिंह का कहना है कि हालैंड और ऊर्जा रहित चिप्सोना के भाव 380 से 400 रुपये पैकेट हैं। लाल गुलाल, सिंदूरी श्रीनाथ करीब 350 रुपये और सफेद प्रजातियों के भाव 300 रुपये पर ठहरे हैं। शीतगृह में रखने का प्रति क्विंटल 250 रुपये भाड़ा देना पड़ता है। इसके अलावा पल्लेदारी, खेत से स्टोर तक लाने का खर्च अलग है। ऐसे में लागत नहीं निकल पा रही है।
चंदापुर्वा निवासी किसान सुरजीत का कहना है कि कोल्ड से बारदाना(पैकट)और खुदाई, ढुलाई के लिए रुपये उधार लिए थे। अब आने-पौने दामों में बेच कर कोल्ड स्टोरेज का कर्ज चुकाने में लगे हैं। किसान फेंकने की आशंका से खासे चिंतित हैं। इनका कहना है कि सरकार को इस ओर पहल करनी चाहिए। सही भाव न मिले तो कर्ज में डूब जाएंगे। अगली फसल करना मुश्किल होगा।
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किसानों ने आलू मंदी के हालात पहले भी देखे हैं। मंदी से किसान आलू को कोल्ड स्टोरेज में छोड़ देते हैं। ऐसे में शीतगृह मालिक बाहर निकाल कर सड़क के किनारे फेंक देते हैं। वर्ष 1997, 2006, 2012 और 2017 में आलू फेंका जा चुका है। इलाकाई किसानों का कहना है कि जिले में आलू आधारित उद्योग की दरकार है। ज्यादा उत्पादन करने के बावजूद किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो रही है। राजनीतिक पार्टियां लोकसभा और विधानसभा चुनाव में किसानों को भरोसा देकर वोट बटोर लेती हैं।
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किसानों के भले के लिए कुछ नहीं होता। वहीं दूसरी ओर आलू के भाव गिरने के बावजूद फुटकर विक्रेताओं की चांदी है। भाव में कोई विशेष अंतर नहीं आया है। लोगों को चिप्सोना 20 रुपये और सामान्य आलू 12 से 15 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
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मायापुर्वा निवासी किसान लाखन सिंह का कहना है कि हालैंड और ऊर्जा रहित चिप्सोना के भाव 380 से 400 रुपये पैकेट हैं। लाल गुलाल, सिंदूरी श्रीनाथ करीब 350 रुपये और सफेद प्रजातियों के भाव 300 रुपये पर ठहरे हैं। शीतगृह में रखने का प्रति क्विंटल 250 रुपये भाड़ा देना पड़ता है। इसके अलावा पल्लेदारी, खेत से स्टोर तक लाने का खर्च अलग है। ऐसे में लागत नहीं निकल पा रही है।
चंदापुर्वा निवासी किसान सुरजीत का कहना है कि कोल्ड से बारदाना(पैकट)और खुदाई, ढुलाई के लिए रुपये उधार लिए थे। अब आने-पौने दामों में बेच कर कोल्ड स्टोरेज का कर्ज चुकाने में लगे हैं। किसान फेंकने की आशंका से खासे चिंतित हैं। इनका कहना है कि सरकार को इस ओर पहल करनी चाहिए। सही भाव न मिले तो कर्ज में डूब जाएंगे। अगली फसल करना मुश्किल होगा।