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खपत कम होने से गिरे दूध के दाम, पशुपालक परेशान
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तालग्राम(कन्नौज)। कोरोना कर्फ्यू में पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है। खपत न होने से दूध के दाम 10 से 12 रुपये लीटर तक गिरे हैं। इससे इनके माथे पर चिंता की लकीरें हैं। परिवार के पालन पोषण की समस्या बनने लगी है।
देहात में पशु पालक दूध बिक्री कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कोरोना कर्फ्यू से पहले दूध के दाम 50 रुपये लीटर थे। कोरोना कर्फ्यू लागू होने के बाद से दाम गिरने लगे। अब 38 से 40 रुपये लीटर दूध बिक रहा है। वजह खपत का गिरना है। रेस्टोरेंट, होटल, चाय की दुकानें बंद हैं। मिठाई भी नहीं बन रही हैं। इससे दिक्कत हुई है। वहीं दाना महंगा हुआ है। डीजल के दाम बढ़े होने से हरे चारा की लागत भी बढ़ गई है। दूध के दाम गिरने से पशु पालक घाटे में हैं। वहीं डेयरी संचालक भी दूध का उठान न होने से चिंतित हैं। कई कंपनियों ने गांव के कलेक्शन सेंटर बंद कर दिए हैं।
पशुपालन विभाग की ओर से पुरस्कृत पिपड़ाखेड़ा निवासी पशुपालक उमाशंकर ने बताया कि इलाके के गांवों के कई कलेक्शन केंद्रों से कंपनियों ने दूध लेना बंद कर दिया है। इससे खपत कम हुई है। दूध का मूल्य घट गया है। 50 रुपये लीटर बिकने वाले दूध को दूधिया 40 और 38 रुपये लीटर खरीद रहे हैं।
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देहात में पशु पालक दूध बिक्री कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कोरोना कर्फ्यू से पहले दूध के दाम 50 रुपये लीटर थे। कोरोना कर्फ्यू लागू होने के बाद से दाम गिरने लगे। अब 38 से 40 रुपये लीटर दूध बिक रहा है। वजह खपत का गिरना है। रेस्टोरेंट, होटल, चाय की दुकानें बंद हैं। मिठाई भी नहीं बन रही हैं। इससे दिक्कत हुई है। वहीं दाना महंगा हुआ है। डीजल के दाम बढ़े होने से हरे चारा की लागत भी बढ़ गई है। दूध के दाम गिरने से पशु पालक घाटे में हैं। वहीं डेयरी संचालक भी दूध का उठान न होने से चिंतित हैं। कई कंपनियों ने गांव के कलेक्शन सेंटर बंद कर दिए हैं।
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पशुपालन विभाग की ओर से पुरस्कृत पिपड़ाखेड़ा निवासी पशुपालक उमाशंकर ने बताया कि इलाके के गांवों के कई कलेक्शन केंद्रों से कंपनियों ने दूध लेना बंद कर दिया है। इससे खपत कम हुई है। दूध का मूल्य घट गया है। 50 रुपये लीटर बिकने वाले दूध को दूधिया 40 और 38 रुपये लीटर खरीद रहे हैं।
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