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झुलसा की चपेट में आई आलू की फसल

Mon, 04 Jan 2021 11:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 11:32 PM IST
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hulasa kee chapet mein aaee aaloo kee phasal
आलू के खेत में दवा का छिड़काव करता किसान। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कड़ाके की ठंड और रात में पाला गिरने से आलू की फ सल में झुलसा रोग लगने लगा है। इससे किसान परेशान हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय तकरीबन पांच से सात फीसदी फसल झुलसा की चपेट में है। इससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। झुलसा से तकरीबन 30 फीसदी उत्पादन गिर जाता है। ऐसे में किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा। दो दिन से फसलों को खुली धूप नहीं मिली है। इससे झुलसा से प्रभावित फसल का रकबा और बढ़ सकता है। वहीं आलू में परपरा रोग भी लग रहा है।
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इस बार जिले में 48 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल की गई है। मौसम में बदलाव से आलू की फसल झुलसा की चपेट में आने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार अभी पांच से सात फीसदी फसल झुलसा की चपेट में है। मौसम ऐसा ही रहा तो झुलसा का दायरा और बढ़ेगा। पत्तियां और डंठल झुलसने से आलू कंद का बढ़ना रुक जाता है। इससे 30 फीसदी के करीब पैदावार गिरने की आशंका है। वहीं मटर व सरसों में माहू और अरहर की फ सल में पत्ती लपेटक कीट लगने की आशंका है।
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अनौगी केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमर सिंह ने बताया कि किसानों को आलू की फ सल में लगने वाले झुलसा से सावधान रहने और समय रहते बचाव के इंतजाम करने की जरूरत है। वहीं अरहर व सरसों की फसलों में नुकसान होने से किसान मायूस हैं।
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फ सल बचाने के लिए करें हल्की सिंचाई
कृषि वैज्ञानिक ने पाले से फसलों को बचाने के लिए हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। आलू की फ सल में झुलसा रोग, मटर व सरसों में माहू और अरहर की फ सल में पत्ती लपेटक कीट लगने की आशंका रहती है। इससे किसान कीटनाशकों का छिड़काव करें। अरहर व फ ली वाली सरसों की फ सलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करें। आलू की फ सल में 0.5 प्रतिशत मैंकोजेब का छिड़काव कर सकते हैं। मटर की फ सल को बुकनी रोग से बचाने के लिए 0.5 फीसदी कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
माहू कीट से फैलता है मोजैक रोग
आलू की फ सल में मोजैक रोग का प्रसार माहू कीट से होता है। इसमें पत्तियों पर हरी-पीली धारियां पड़ जाती हैं। आकार भी छोटा हो जाता है। पत्तियां मुड़ जाती हैं। पौधे की बढ़वार कम हो जाती है। इससे माहू कीट का प्रकोप होने पर डाईमेथियोएट अथवा मिथाइल-ओ-डिमेटॉन की एक लीटर मात्रा 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। पानी की अनुपलब्धता होने पर मिथाइल पैराथियॉन 2 प्रतिशत या मैलाथियॉन 5 प्रतिशत या कार्बारिल 10 प्रतिशत चूर्ण का 20-25 किलोग्राम मात्रा का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सुबह या शाम को भुरकाव करना चाहिए।

बूंदाबांदी और बदली आलू के लिए आफत
तालग्राम। इलाकाई किसानों के अनुसार पाले के बाद हल्की बारिश और बदली छाई रहने से आलू फसल को नुकसान हुआ है। बूंदाबांदी और बदली छाने से झुलसा और परपरा रोग लग गया है। किसान क्षेत्र में 30 प्रतिशत उत्पादन में गिरावट की आशंका जता रहे हैं। अगैती आलू की 90 फीसदी खुदाई हो गई है। पिछैती आलू फसल को तगड़ा झटका लग गया है।
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