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मेडिकल कालेज में जांच रिपोर्ट पर होगा बार कोड
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तिर्वा। मरीजों की जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो पाए इसलिए मेडिकल प्रशासन ने प्रत्येक जांच मे बार कोड की सुविधा जारी कर दी है। अब मरीजों को बार कोड के नंबर पर मरीज की जांच उपलब्ध कराई जाएगी। इसका कार्य शुरू कर दिया गया है।
राजकीय मेडिकल कालेज में प्रतिदिन एक हजार से लेकर दो हजार तक मरीज ओपीडी से लेकर आईपीडी तक आते है। वहां पर तैनात डाक्टर दवाइयां देने के साथ-साथ उनके रोग से संबंधित जांचें भी कराते हैं। कभी-कभी मरीजों द्वारा दिए गए सैंपल अधिक मरीज होने के कारण इधर-उधर हो जाते हैं। मरीजों को समय पर उनकी जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। इसके साथ ही कभी-कभी मरीज स्वयं ही अपनी रिपोर्ट नहीं ले पाता है। अधिक दिन हो जाने के कारण उसकी रिपोर्ट नहीं मिल पाती थी। मरीजों की समस्या को देखते हुए मेडिकल कालेज ने प्रत्येक मरीज की जांच पर बार कोड अनिवार्य कर दिया है। अब मरीजों को बार कोड नंबर के आधार पर उनकी जांचे मिलेगी। मरीज अपना बार कोड जब भी बताएं उसकी जांच तत्काल उसे उपलब्ध कराई जाएगी। पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अनीता ओमहरे ने बताया अभी तक मरीजों को जांच रिपोर्ट लेने मे परेशानी आती थी। परेशानियों को देखते हुए प्रत्येक जांच रिपोर्ट पर एक बार कोड अंकित होगा। मरीज कभी भी अपना बार कोड लाकर कालेज से अपनी जांच रिपोर्ट निकलवा सकता है। उसकी जांच रिपोर्ट हमेशा कालेज में सुरक्षित रहेगी।
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राजकीय मेडिकल कालेज में प्रतिदिन एक हजार से लेकर दो हजार तक मरीज ओपीडी से लेकर आईपीडी तक आते है। वहां पर तैनात डाक्टर दवाइयां देने के साथ-साथ उनके रोग से संबंधित जांचें भी कराते हैं। कभी-कभी मरीजों द्वारा दिए गए सैंपल अधिक मरीज होने के कारण इधर-उधर हो जाते हैं। मरीजों को समय पर उनकी जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। इसके साथ ही कभी-कभी मरीज स्वयं ही अपनी रिपोर्ट नहीं ले पाता है। अधिक दिन हो जाने के कारण उसकी रिपोर्ट नहीं मिल पाती थी। मरीजों की समस्या को देखते हुए मेडिकल कालेज ने प्रत्येक मरीज की जांच पर बार कोड अनिवार्य कर दिया है। अब मरीजों को बार कोड नंबर के आधार पर उनकी जांचे मिलेगी। मरीज अपना बार कोड जब भी बताएं उसकी जांच तत्काल उसे उपलब्ध कराई जाएगी। पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अनीता ओमहरे ने बताया अभी तक मरीजों को जांच रिपोर्ट लेने मे परेशानी आती थी। परेशानियों को देखते हुए प्रत्येक जांच रिपोर्ट पर एक बार कोड अंकित होगा। मरीज कभी भी अपना बार कोड लाकर कालेज से अपनी जांच रिपोर्ट निकलवा सकता है। उसकी जांच रिपोर्ट हमेशा कालेज में सुरक्षित रहेगी।
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