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Kannauj News: गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, बक्सीपुर्वा में जलभराव
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कन्नौज। गंगा का जलस्तर सोमवार को धीरे-धीरे फिर बढ़ने लगा है। बक्सीपुर्वा गांव में बाढ़ का पानी भरने के कारण ग्रामीण गांव छोड़ने के लिए विवश हैं। ग्रामीण सड़क पर झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। जलभराव के कारण फसलें चौपट हो गई हैं। वहीं, पीड़ित ग्रामीण गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
गंगा का जलस्तर 125.550 मीटर से बढ़कर 125.560 मीटर हो गया। गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बाढ़ के प्रकोप से कटरी क्षेत्र के 20 गांव जलमग्न हैं। काली नदी के उफान से ग्रामीण दहशतजदा हैं। घरों के किनारे पानी भरने से ग्रामीणों को मकान गिरने का भय सता रहा है। कासिमपुर व बक्सीपुर्वा के ग्रामीणों ने कन्नौज-हरदोई मुख्य सड़क पर डेरा जमा लिया है और झोपड़ी बनाकर बाढ़ की त्रासदी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे सब्जी किसानों को नुकसान हुआ है। आवागमन के लिए ग्रामीण का साधन नाव हैं। ग्रामीण नाव पर गृहस्थी का सामान आदि लादकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। जिला प्रशासन की कई टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बचाव एवं राहत कार्य में जुटी हैं। गंगा व काली नदी का उफान कटरी के बाशिंदों की धड़कनें बढ़ा रहा है। इलाके के बक्सीपुर्वा, सलेमपुर तारा बांगर, जुकइया आदि गांवों की सड़कें जलमग्न हैं। अपर जिलाधिकारी आशीष कुमार सिंह का कहना है कि गंगा का जलस्तर स्थिर है। बाढ़ प्रभावितों सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं। चौरा चांदपुर की गोशाला के गोवंशों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। छाया की कमी है तो उसके लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा कि वह गोवंशों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करें।
गोशाला में भरा पानी, जीवन संकट में
बाढ़ प्रभावित गांव चौरा चांदपुर स्थित गोशाला जलमग्न हो गई है। गोवंशों को सुरक्षित करने के लिए ऊंचे क्षेत्र में अस्थाई गोशाला बनाई गई है। जहां कुछ टेंट लगाकर गोवंशों को सुरक्षा दिए जाने का दावा किया जा रहा है जबकि गोवंश बरसात में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में गोवंशों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है।
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गंगा का जलस्तर 125.550 मीटर से बढ़कर 125.560 मीटर हो गया। गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बाढ़ के प्रकोप से कटरी क्षेत्र के 20 गांव जलमग्न हैं। काली नदी के उफान से ग्रामीण दहशतजदा हैं। घरों के किनारे पानी भरने से ग्रामीणों को मकान गिरने का भय सता रहा है। कासिमपुर व बक्सीपुर्वा के ग्रामीणों ने कन्नौज-हरदोई मुख्य सड़क पर डेरा जमा लिया है और झोपड़ी बनाकर बाढ़ की त्रासदी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे सब्जी किसानों को नुकसान हुआ है। आवागमन के लिए ग्रामीण का साधन नाव हैं। ग्रामीण नाव पर गृहस्थी का सामान आदि लादकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। जिला प्रशासन की कई टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बचाव एवं राहत कार्य में जुटी हैं। गंगा व काली नदी का उफान कटरी के बाशिंदों की धड़कनें बढ़ा रहा है। इलाके के बक्सीपुर्वा, सलेमपुर तारा बांगर, जुकइया आदि गांवों की सड़कें जलमग्न हैं। अपर जिलाधिकारी आशीष कुमार सिंह का कहना है कि गंगा का जलस्तर स्थिर है। बाढ़ प्रभावितों सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं। चौरा चांदपुर की गोशाला के गोवंशों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। छाया की कमी है तो उसके लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा कि वह गोवंशों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करें।
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गोशाला में भरा पानी, जीवन संकट में
बाढ़ प्रभावित गांव चौरा चांदपुर स्थित गोशाला जलमग्न हो गई है। गोवंशों को सुरक्षित करने के लिए ऊंचे क्षेत्र में अस्थाई गोशाला बनाई गई है। जहां कुछ टेंट लगाकर गोवंशों को सुरक्षा दिए जाने का दावा किया जा रहा है जबकि गोवंश बरसात में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में गोवंशों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है।
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