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Kannauj News: आखिरी सांस तक निभाई दोस्ती, साथ-साथ जलीं चिताएं

Thu, 17 Oct 2024 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2024 11:57 PM IST
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Friendship maintained till last breath, pyres burnt together
कन्नौज। बचपन की दोस्ती आखिरी सांस तक निभाई। यहां तक की दोनों की चिताएं भी साथ-साथ जलीं तो हर किसी की आंख से आंसू बहने लगी। पतित पावनी गंगा के महादेवी घाट पर समाजसेवी मनोज शुक्ल और अविनाश चंद्र दुबे का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले अंतिम दर्शनों के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
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शहर के मोहल्ला ग्वाल मैदान में धर्म धाम पर डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल, एडीएम आशीष कुमार सिंह, पूर्व सांसद सुब्रत पाठक समेत कई राजनीतिक दलों के लोग, पत्रकार और अफसर पहुंचे। मनोज शुक्ल के पिता डॉ. जीवन शुक्ल को सांत्वना दी। वहीं, मकरंदनगर स्थित सूर्य निवास पर भी अविनाश चंद्र दुबे को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। दोनों बचपन के मित्र थे, इसलिए इनकी अर्थियां भी साथ-साथ उठीं। दोपहर के समय महादेवी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया तो हर किसी की आंख नम थी।
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कामदगिरि परिक्रमा की हसरत रह गई अधूरी
मनोज शुक्ल और अविनाश दुबे धार्मिक प्रवृत्ति के थे और हमेशा तीर्थ स्थलों का भ्रमण साथ-साथ करते थे। इस बार उन्होंने शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में कामदगिरि परिक्रमा की योजना बनाई थी। हाईकोर्ट जाने के बाद वह चित्रकूट के लिए निकले तभी फतेहपुर में हादसे का शिकार हो गए। दोनों मित्रों की कामदगिरि की परिक्रमा की हसरत अधूरी रह गई।
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पिता जी... खजुहा के हाल आकर बताएंगे
मनोज शुक्ल के पिता डॉ. जीवन शुक्ल मूल रूप से जनपद फतेहपुर की बिंदकी तहसील के अंतर्गत खजुहा कस्बे के शुक्ला गली के रहने वाले हैं। पीएसएम डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर बनने के बाद उन्होंने कन्नौज शहर के ग्वाल मैदान मोहल्ले में मकान बना लिया। उसका नाम धर्म धाम रख दिया था। जाने से पहले मनोज शुक्ल ने पिता को बताया था कि इस बार वह पैतृक गांव जाएंगे और वहां के हाल आकर बताएंगे। यही बात याद कर उनके पिता के आंसू नहीं थम रहे थे। मनोज शुक्ल के परिवार में पत्नी मधू, बेटे सचिन व नितिन व एक बेटी पूजा का रो-रोकर बुरा हाल था।
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