{"_id":"66d4de0fe78dd7d0750140e4","slug":"farmers-should-protect-ladyfinger-from-pests-during-rainy-season-kannauj-news-c-214-1-knj1005-117983-2024-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: बरसाती मौसम में भिंडी को कीटों से बचाएं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: बरसाती मौसम में भिंडी को कीटों से बचाएं किसान
विज्ञापन
तालग्राम। इलाके में किसान परंपरागत खेती छोड़ सब्जी फसलों की ओर रुझान बढ़ रहा है। बरसात में काफी क्षेत्रफल में भिंडी खेती की गई है। अब भिंडी की खेती करने वाले किसान इस समय कीटों के प्रकोप से परेशान हैं। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि यदि समय रहते कीटों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल की उत्पादकता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही गुणवत्ता युक्त फसल के लिए भी किसानों को अलग से प्रयास करना होगा।
खरीफ की खेती के तहत किसानों ने अमोलर, कैथनपुर्वा, चौतराहार, सकरवारा, सलेमपुर, पुखरायां, अतरौली, किशनपुर आदि गांवों में भिंडी की खेती की है। इस समय विभिन्न प्रकार के कीटों ने फसल को अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है। पत्तियों के निचले भाग में छिपकर बैठे कीड़े पत्तियों का रस चूसते रहते हैं। वहीं फल भेदक सुंडी कीट के प्रकोप से किसान परेशान हैं। कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह का कहना है कि नीम का तेल तीन मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने से काफी फायदा होता है।
उन्होंने बताया कि तना और फल छेदक कीटों के प्रकोप से भी काफी नुकसान होता है। इन कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल के छिड़काव के बाद मीडाक्लोर प्रिड और डाइक्लोरोवास एक मिली प्रतिलीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि भिंडी की अच्छी फसल के लिए सूक्ष्म तत्व मिश्रण दो ग्राम प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करने से गुणवत्तायुक्त फसल प्राप्त होती है। साथ ही उपज में भी अप्रत्याशित वृद्धि होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खरीफ की खेती के तहत किसानों ने अमोलर, कैथनपुर्वा, चौतराहार, सकरवारा, सलेमपुर, पुखरायां, अतरौली, किशनपुर आदि गांवों में भिंडी की खेती की है। इस समय विभिन्न प्रकार के कीटों ने फसल को अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है। पत्तियों के निचले भाग में छिपकर बैठे कीड़े पत्तियों का रस चूसते रहते हैं। वहीं फल भेदक सुंडी कीट के प्रकोप से किसान परेशान हैं। कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह का कहना है कि नीम का तेल तीन मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने से काफी फायदा होता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि तना और फल छेदक कीटों के प्रकोप से भी काफी नुकसान होता है। इन कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल के छिड़काव के बाद मीडाक्लोर प्रिड और डाइक्लोरोवास एक मिली प्रतिलीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि भिंडी की अच्छी फसल के लिए सूक्ष्म तत्व मिश्रण दो ग्राम प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करने से गुणवत्तायुक्त फसल प्राप्त होती है। साथ ही उपज में भी अप्रत्याशित वृद्धि होती है।
विज्ञापन