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Kannauj News: 26 हजार किसानों की फार्मर रजिस्ट्री ऑनलाइन खतौनी के अभाव में रुकी
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कन्नौज। तहसील छिबरामऊ क्षेत्र के 34 गांवों में किसानों को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। 35 वर्ष पहले राजस्व अभिलेख जल गए थे जो अभी तक तैयार नहीं हो सके हैं। इस कारण 26 हजार किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। गेहूं खरीद के लिए शासन ने क्रय केंद्र पर आने वाले किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसान अब क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच सकेंगे। 26 हजार किसानों के पास पिछले 35 साल से अपने खेतों की ऑनलाइन खतौनी तक नहीं है। पहले किसान ऑफलाइन खतौनी से अपना पंजीकरण कराकर गेहूं बेचते थे। अब वे परेशान हैं और डीएम को पत्र लिखकर समस्या निस्तारण की मांग की है। किसानों ने ऑनलाइन खतौनी देने की मांग की है ताकि वे गेहूं सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
किसान रमेश चंद्र ने बताया कि इस बार शासन की ओर से फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य की गई है। इससे कस्बे के किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों के पास ऑनलाइन खतौनी नहीं है, जिससे वे फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनवा पा रहे हैं। बिना फार्मर रजिस्ट्री के गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। किसान अरविंद का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री के बिना किसान सम्मान निधि भी नहीं मिल रही है। बोआई के समय बीज भी नहीं मिल पाता है।
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प्रशासन का समाधान
डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि जिले की 34 ग्राम पंचायतों के राजस्व अभिलेख जले हैं। इस कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इन ग्राम पंचायत के किसानों को गेहूं खरीद केंद्र पर बेचना है तो चकबंदी विभाग से उपज सत्यापित कर बेचा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जले गांवों का रिकॉर्ड तैयार कराया जा रहा है। प्रशासन जल्द से जल्द किसानों को ऑनलाइन खतौनी देने की व्यवस्था करे, ऐसी किसानों की मांग है।
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किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। गेहूं खरीद के लिए शासन ने क्रय केंद्र पर आने वाले किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसान अब क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच सकेंगे। 26 हजार किसानों के पास पिछले 35 साल से अपने खेतों की ऑनलाइन खतौनी तक नहीं है। पहले किसान ऑफलाइन खतौनी से अपना पंजीकरण कराकर गेहूं बेचते थे। अब वे परेशान हैं और डीएम को पत्र लिखकर समस्या निस्तारण की मांग की है। किसानों ने ऑनलाइन खतौनी देने की मांग की है ताकि वे गेहूं सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
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किसान रमेश चंद्र ने बताया कि इस बार शासन की ओर से फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य की गई है। इससे कस्बे के किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों के पास ऑनलाइन खतौनी नहीं है, जिससे वे फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनवा पा रहे हैं। बिना फार्मर रजिस्ट्री के गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। किसान अरविंद का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री के बिना किसान सम्मान निधि भी नहीं मिल रही है। बोआई के समय बीज भी नहीं मिल पाता है।
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प्रशासन का समाधान
डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि जिले की 34 ग्राम पंचायतों के राजस्व अभिलेख जले हैं। इस कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इन ग्राम पंचायत के किसानों को गेहूं खरीद केंद्र पर बेचना है तो चकबंदी विभाग से उपज सत्यापित कर बेचा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जले गांवों का रिकॉर्ड तैयार कराया जा रहा है। प्रशासन जल्द से जल्द किसानों को ऑनलाइन खतौनी देने की व्यवस्था करे, ऐसी किसानों की मांग है।