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‘ईश्वरीय शक्ति सर्व व्यापक’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 18 Feb 2016 11:48 PM IST
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सत्संग में महात्मा हरिमानंद ने कहा कि भरी सभा में द्रोपदी के पुकारने पर
भगवान ने आकर लाज बचाई थी। अगर भगवान एक ही जगह होता तो कैसे आता। ईश्वरीय
शक्ति सर्व व्यापक है, तभी तो वह हर जगह मौजूद है पर नजर नहीं आता।
उन्होंने कहा कि योग साधना के बगैर कोई भगवान को पाता नहीं है। उस शक्ति को भक्ति द्वारा कहीं भी प्रकट किया जा सकता है। कहा कि जिस तरह दूध में मक्खन और तिल में तेल छिपा है, उसी तरह तुम्हारे अंदर भी वह शक्ति छिपी है। उसे समय के तत्वदर्शी महापुरुषों से प्राप्त किया जाता है, इसलिए कहा भी है कि तबहि होय संशय सब भंगा, जब बहु काल करिए सत्संगा।
उन्होंने भजन ..निंदा न करो नफरत न करो जो अपने प्रभु को रिझाना है.. सुनाकर श्रद्धालुओं में चेतना जागृत की। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि इस घोर कलिकाल में संसार की चकाचौंध में मानव सुख को ढूंढ रहा है, जबकि सुख तो केवल हरि की शरण में ही है।
उन्होंने कहा भी है कि नानक दुखिया अब संसारा, सुखी सोई जो नाम अधारा। उन्होंने भजन दरबार में सच्चे सदगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते हैं, दुनिया में सताए लोग यहां सीने से लगाए जाते हैं सुनाकर प्रेम भाव की गंगा बहा दी।
इसके अलावा रामपुर बैजू के मोहनलाल वर्मा, रुद्रपुर के महिपाल सिंह, असालतनगर के रामजीत सक्सेना और खल्ला रूपमंगदपुर के उमेशचंद्र ने भी भजन सुनाकर वाहवाही लूटी। करनौली निवासी नत्थू सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम का समापन रमाकांत दीक्षित ने आरती व प्रसाद वितरण के साथ किया।
उन्होंने कहा कि योग साधना के बगैर कोई भगवान को पाता नहीं है। उस शक्ति को भक्ति द्वारा कहीं भी प्रकट किया जा सकता है। कहा कि जिस तरह दूध में मक्खन और तिल में तेल छिपा है, उसी तरह तुम्हारे अंदर भी वह शक्ति छिपी है। उसे समय के तत्वदर्शी महापुरुषों से प्राप्त किया जाता है, इसलिए कहा भी है कि तबहि होय संशय सब भंगा, जब बहु काल करिए सत्संगा।
उन्होंने भजन ..निंदा न करो नफरत न करो जो अपने प्रभु को रिझाना है.. सुनाकर श्रद्धालुओं में चेतना जागृत की। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि इस घोर कलिकाल में संसार की चकाचौंध में मानव सुख को ढूंढ रहा है, जबकि सुख तो केवल हरि की शरण में ही है।
उन्होंने कहा भी है कि नानक दुखिया अब संसारा, सुखी सोई जो नाम अधारा। उन्होंने भजन दरबार में सच्चे सदगुरु के दुख दर्द मिटाए जाते हैं, दुनिया में सताए लोग यहां सीने से लगाए जाते हैं सुनाकर प्रेम भाव की गंगा बहा दी।
इसके अलावा रामपुर बैजू के मोहनलाल वर्मा, रुद्रपुर के महिपाल सिंह, असालतनगर के रामजीत सक्सेना और खल्ला रूपमंगदपुर के उमेशचंद्र ने भी भजन सुनाकर वाहवाही लूटी। करनौली निवासी नत्थू सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम का समापन रमाकांत दीक्षित ने आरती व प्रसाद वितरण के साथ किया।