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कैंसर मरीजों की अनदेखी, इलाज की दरकार
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फोटो 14- मेडिकल कॉलेज तिर्वा में बनकर तैयार हुआ कैंसर अस्पताल। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जनपद समेत आसपास जिले के कैंसर मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके, इसके लिए शासन ने मंडल स्तरीय कैंसर अस्पताल का निर्माण कराया। इसके बावजूद लापरवाही के चलते तैयार भवन में चिकित्सा सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकी। इसका खामियाजा प्रतिदिन जिले से पांच से 10 मरीजों को भुगतना पड़ता है और उन्हें कानपुर, लखनऊ और मुंबई के लिए रेफर किया जाता हैं। परिजनों के साथ महानगरों की दौड़ लगाने वाले कैंसर मरीजों का कोई हाल पूछने वाला नहीं है।
जानलेवा कैंसर से मृत्युदर की रोकथाम के लिए देश में सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरुकता अभियान दिवस मनाया जाता है। जिले में हर साल यह दिवस महज सामान्य दिवसों की तरह ही निकल जाता है, वह भी तब जब जिले में करोड़ों की लागत से बने कैैंसर अस्पताल में चिकित्सीय सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी। दरअसल, वर्ष 2013 में तत्कालीन सपा सरकार ने मेडिकल कॉलेज तिर्वा में मंडल स्तरीय कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कराया था जो वर्ष 2016 में तैयार हो गया था। लोगों को उम्मीद हुई थी कि अब कैंसर के उपचार के लिए उन्हें अन्य शहरों की दौड़ लगानी नहीं पड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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एक नजर में कैंसर अस्पताल
-163.31 करोड़ रुपये की लागत से हुआ निर्माण
-मंडल स्तरीय अस्पताल की 220 बेड की क्षमता
-वर्ष 2013 से शुरू हुआ निर्माण कार्य
-वर्ष 2016 में बनकर तैयार, नहीं शुरू हुई चिकित्सीय सेवाएं
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इनसेट---
मुंह और गले में कैंसर के बढ़ रहे मरीज
जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी डॉ. मोनिका सचान ने बताया कि पान, मसाला और सिगरेट के कारण मुंह और गले में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इस खतरनाक बीमारी की चपेट में युवा अधिक आ रहे हैं। जिले में अगर कैंसर अस्पताल शुरू होता है, तो समय रहते कई मरीजों की जान बच सकती।
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शासन को भेजा पत्र, बैठक में करेंगे मांग
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने बताया कि दो बार शासन को पत्र भेज चुके हैं, जल्द लखनऊ में शासन की बैठक होगी। इसमें वह कैंसर अस्पताल और कॉडियोलॉजी शुरू कराने की मांग करेंगे। उनका प्रयास है कि साल के अंत तक दोनों अस्पताल शुरू हो जाएं।
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जानलेवा कैंसर से मृत्युदर की रोकथाम के लिए देश में सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरुकता अभियान दिवस मनाया जाता है। जिले में हर साल यह दिवस महज सामान्य दिवसों की तरह ही निकल जाता है, वह भी तब जब जिले में करोड़ों की लागत से बने कैैंसर अस्पताल में चिकित्सीय सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी। दरअसल, वर्ष 2013 में तत्कालीन सपा सरकार ने मेडिकल कॉलेज तिर्वा में मंडल स्तरीय कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कराया था जो वर्ष 2016 में तैयार हो गया था। लोगों को उम्मीद हुई थी कि अब कैंसर के उपचार के लिए उन्हें अन्य शहरों की दौड़ लगानी नहीं पड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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एक नजर में कैंसर अस्पताल
-163.31 करोड़ रुपये की लागत से हुआ निर्माण
-मंडल स्तरीय अस्पताल की 220 बेड की क्षमता
-वर्ष 2013 से शुरू हुआ निर्माण कार्य
-वर्ष 2016 में बनकर तैयार, नहीं शुरू हुई चिकित्सीय सेवाएं
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मुंह और गले में कैंसर के बढ़ रहे मरीज
जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी डॉ. मोनिका सचान ने बताया कि पान, मसाला और सिगरेट के कारण मुंह और गले में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इस खतरनाक बीमारी की चपेट में युवा अधिक आ रहे हैं। जिले में अगर कैंसर अस्पताल शुरू होता है, तो समय रहते कई मरीजों की जान बच सकती।
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शासन को भेजा पत्र, बैठक में करेंगे मांग
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने बताया कि दो बार शासन को पत्र भेज चुके हैं, जल्द लखनऊ में शासन की बैठक होगी। इसमें वह कैंसर अस्पताल और कॉडियोलॉजी शुरू कराने की मांग करेंगे। उनका प्रयास है कि साल के अंत तक दोनों अस्पताल शुरू हो जाएं।