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पत्ता गोभी फसल में लगा झुलसा रोग
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज।
Updated Thu, 06 Oct 2016 11:44 PM IST
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फसल में लगा गला रोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सप्ताह भर में पूरे जिले में हुई बारिश से सब्जी पैदा करने वाले किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। अच्छी पत्ता गोभी पैदावार की आस लगाए किसान बताते हैं कि खेत में बारिश होने के कारण पत्ता गोभी में झुलसा रोग लग गया है। पत्ता भी गलने लगा है जिसके चलते उनके खेत की करीब 30 फीसदी फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि नीम तेल और गोमूत्र के मिश्रण का छिड़काव कर फसल को रोग से बचाया जा सकता है।
किसान रामेंद्र ने बताया कि उमस भर्री गर्मी में पत्ता गोभी में गलना रोग लगा दिया है। बाहर से लगे रोग पर तो छिड़काव कर काम चल जाएगा। लेकिन अंदर लगे रोग पर काबू पाना मुश्किल है। उन्होंने दो बीघा में बंद गोभी लगाई थी। एक बीघा में अच्छी पैदावार हो तो करीब 7000 हजार फल आ जाते हैं, लेकिन बेमौसम बरसात के चलते करीब 30 फीसदी फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। वहीं जिला कृषि अधिकारी नीरज राज का कहना है कि पत्ता गोभी की अच्छी पैदावार के लिए ठंडी आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
इसमें पाले और अधिक तापमान को सहन करने की विशेष क्षमता होती है। पत्ता गोभी के बीज का अंकुरण 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अच्छा होता है। जलवायु की उपयुक्तता के कारण इसकी दो फसल ली जाती है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की अगेती फ सल लेने के लिए रेतीली दोमट भूमि ही सबसे अच्छी पैदावार देती है। जबकि पछेती और अधिक उपज लेने के लिए भारी भूमि जैसे मृतिका सिल्ट तथा दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की फसल को लगातार नमी की आवश्यकता होती है इसलिए इसकी सिंचाई करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी में कैबेज मैगट नाम का यह कीड़ा पौधाें की जड़ों पर आक्रमण करता है जिसके कारण पौधे सूख जाते हैं। बताया कि इसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम की खाद का उपयोग करें । इसी के साथ चैंपा नाम का कीड़ा जब पौधे में लग जाता है, तो यह पत्तियाें का रस चूसता रहता है। जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। उन्हाेंने इसकी रोकथाम के लिए किसानों को नीम का काढ़ा और गोमूत्र का मिश्रण तैयार कर 500 ग्राम मिश्रण को प्रति पंप के माध्यम से छिड़काव करने की सलाह दी है। उन्हाेंने बताया कि ऐसा करने सेे तैयार हुई फसल को भी काफी हद तक रोगों से बचाया जा सकता है।
किसान रामेंद्र ने बताया कि उमस भर्री गर्मी में पत्ता गोभी में गलना रोग लगा दिया है। बाहर से लगे रोग पर तो छिड़काव कर काम चल जाएगा। लेकिन अंदर लगे रोग पर काबू पाना मुश्किल है। उन्होंने दो बीघा में बंद गोभी लगाई थी। एक बीघा में अच्छी पैदावार हो तो करीब 7000 हजार फल आ जाते हैं, लेकिन बेमौसम बरसात के चलते करीब 30 फीसदी फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। वहीं जिला कृषि अधिकारी नीरज राज का कहना है कि पत्ता गोभी की अच्छी पैदावार के लिए ठंडी आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
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इसमें पाले और अधिक तापमान को सहन करने की विशेष क्षमता होती है। पत्ता गोभी के बीज का अंकुरण 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अच्छा होता है। जलवायु की उपयुक्तता के कारण इसकी दो फसल ली जाती है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की अगेती फ सल लेने के लिए रेतीली दोमट भूमि ही सबसे अच्छी पैदावार देती है। जबकि पछेती और अधिक उपज लेने के लिए भारी भूमि जैसे मृतिका सिल्ट तथा दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की फसल को लगातार नमी की आवश्यकता होती है इसलिए इसकी सिंचाई करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी में कैबेज मैगट नाम का यह कीड़ा पौधाें की जड़ों पर आक्रमण करता है जिसके कारण पौधे सूख जाते हैं। बताया कि इसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम की खाद का उपयोग करें । इसी के साथ चैंपा नाम का कीड़ा जब पौधे में लग जाता है, तो यह पत्तियाें का रस चूसता रहता है। जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। उन्हाेंने इसकी रोकथाम के लिए किसानों को नीम का काढ़ा और गोमूत्र का मिश्रण तैयार कर 500 ग्राम मिश्रण को प्रति पंप के माध्यम से छिड़काव करने की सलाह दी है। उन्हाेंने बताया कि ऐसा करने सेे तैयार हुई फसल को भी काफी हद तक रोगों से बचाया जा सकता है।
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