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अधिकारियों ने पेट्रोल पंप की जांच की
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Wed, 03 May 2017 11:47 PM IST
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जांच करती तकनीकी टीम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लखनऊ में पेट्रोल पंपों की मशीनों में चिप लगाकर डीजल, पेेट्रोल की चोरी का मामला सामने आया था। शासन के निर्देश पर बुधवार को जिले के आला-अधिकारियों ने कलक्ट्रेट सभागार में एक बैठक कर पेट्रोल पंपों पर तकनीकी टीम को साथ जांच शुरू कर दी है।
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बुधवार की देर शाम करीब छह बजे गायत्री पेट्रोल पंप पर छापेमारी की गई। इस मौके पर एसपी हरिश्चंद्र, एडीएम संतोष कुमार वैश्य, सदर एसडीएम डॉ. अरुण सिंह, डीएसओ संतोष कुमार सिंह, जिला पूर्ति निरीक्षक चक्रपाणि मिश्रा तकनीकी टीम के मेंबर के साथ जांच-पड़ताल में जुटे रहे। फिलहाल टीम को अपनी जांच-पड़ताल में इन पेट्रोल पंपों पर लगी मशीनों में कोई तकनीकी खामी पकड़ में नहीं आई।
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रिमोट से आपरेट की जाती है चिप
कन्नौज। पंपों में इलेक्ट्रानिक चिप मशीनों के पल्सर (पार्ट) में लगाई जाती है। इस समय पंप मालिक दो तरह की चिप 16 पिन और 10 पिन प्रयोग में ला रहे हैं। इस बाजार के जानकार बताते हैं कि वर्तमान में चिप की कीमत 80-100 रुपये के आस-पास होती है। पंप मालिक किसी भी कुशल साफ्टवेयर इंजीनियर को सेट कर प्रोग्रामिंग कर साफ्टवेयर डलवाते हैं। काम में लगे कारीगरों की माने तो 10 हजार रुपये लेकर एक इंजीनियर यह काम कर देता है। साफ्टवेयर में यह फीड रहता है कि कितना डीजल या पेट्रोल चोरी करना है, जैसे 10 प्रतिशत पेट्रोल चोरी करना है, तो एक लीटर में 10 मिलीग्राम चोरी होता है। इस चिप को पंप की रेंज 100 से 200 मीटर की दूरी से रिमोट के माध्यम से आपरेट किया जाता है। कुछ शहरवासियों का कहना है कि जांच की जाए तो कुछ पेट्रोल पंप इसमें फंसेेंगे।
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चोरी का ईधन खपाने को भी होता है खेल
कन्नौज। बाहर से आने वाले चोरी के पेट्रोल, डीजल को खपाने के लिए ऐसे लोग टोटलाइजर मीटर रीडिंग रोकने के लिए चिप का इस्तेमाल करते हैं। यह चिप चोरी र्के इंधन की खपत कम दिखाने के लिए लगवाई जाती है। दरअसल आयल कंपनी से पंप मालिकों को डीजल का हिसाब देना पड़ता है। ऐसे में पंप मालिक जब बाहर से आए चोरी के ईंधन को खरीदते हैं तो वे कंपनी के अधिकारियों को धोखा देने के लिए टोटलाइजर की रीडिंग को रोक देते हैं।
इन सबकी है जांच की जिम्मेदारी
कन्नौज। घटतौली व मिलावटखोरी की रोकथाम के लिए आपूर्ति विभाग, बांट-माप विभाग व संबंधित तेल कंपनियों के मार्केटिंग अधिकारी की सीधी जिम्मेदारी रहती है। इसमें पंप संचालन से पहले वितरण के लिए लगी डिस्पेंसर यूनिट की सीलिंग का अधिकार बांट-माप विभाग का होता है। रिमोट डिवाइस से चिप लगाकर लगाकर यदि चोरी हो रही है, तो ऐसे में बांट-माप विभाग के यह काम संभव नही हो सकता है, क्योंकि ऐसा करने में यूनिट की सील तोड़कर उससे छेड़छाड़ करनी पड़ेगी।