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गरीबों की मदद करना हज से बेहतर : मुफ्ती जाकिर
kannauj, uttar pradesh, india
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:06 AM IST
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जलसे में तकरीर करते मौलाना
- फोटो : amar ujala
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मुफलिसों (गरीबों) की मदद करना हज से बेहतर है। इससे समाज व देश की तरक्की होती है। समाज में सभी तबके की भलाई हो, इसका आज के नौजवान खास ख्याल रखें। गरीबी या बेबसी के चलते अगर पड़ोसी भूखा है तो हर मोमिन का फर्ज है कि वे उसकी मदद को आगे आएं। इससे परिवार व समाज की तरक्की होती है। साथ ही सबाब के हकदार होते हैं। यह तकरीर पंडवाह शरीफ से आए आलिम व मुफ्ती जाकिर साहब ने शनिवार की देरशाम आयोजित जलसे में की।
मालूम हो कि तीन दिवसीय आलमी (अंतर्राष्ट्रीय) सेमिनार व जश्ने मुजद्दिद अल्फेसानी का आयोजन शहर के हम्मालीपुरा मदरसे में आयोजित हो रहा है। शनिवार की देरशाम वारसी पब्लिक स्कूल परिसर में जलसे का प्रोग्राम हुआ। इसमें तकरीर करते हुए आलिम व मुफ्ती जाकिर साहब ने युवाओं को समाज की बेहतरी के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने बताया कि एक ओर तो यतीमों (अनाथों) व मुफलिसों (गरीबों) की मदद कर हम उन्हें अपने पैरों खड़े होकर आत्मनिर्भर बनाते हैं।
वहीं ऐसा करने वालों से अल्लाह तआला काफी खुश होता है। रहमतों व बरकतों की बारिश पूरे परिवार पर करता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से आए प्रो. डा. अब्दुस्सलाम जीलानी ने कहा कि मुसलमानों की मईशत की बदहाली उसी वक्त दूर हो सकती है जब वह खुद तरक्की करे और परिवार व समाज की भलाई की ओर ध्यान दे।
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स्वरोजगार अपनाए और दूसरे की तरक्की को देखकर खुद भी तरक्की करने की कोशिश करे। मौलाना अनवार शेरी ने कहा कि हदीश में आया है कि अल्लाह गरीबों की वजह से रोजी देता है तो फिर हमें भी गरीबों पर खर्च करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। मौलाना फहीम अज़हरी ने कहा कि हमारे नबी का पैगाम है कि खाने को बर्बाद नहीं करना चाहिए। जितनी जरूरत हो उतना ही लें ताकि बचा हुआ खाना किसी गरीब की भूख मिटा सके।
कार्यक्रम की सदारत कर रहे हजरत मौलाना आफाक अहमद मुजद्ददी ने कहा कि आमतौर पर लोग अपनी मेहनत की कमाई को खर्च करने में कंजूसी करते हैं। लेकिन बात जब शादी, पार्टी की आए तो फिजूलखर्ची जमकर होती है। इनसे बचने की हर मोमिन को कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर मौलाना अखलाक साहब, मौलाना अहमद सईद, मौलाना व कारी जिलाउल कमर, मौलाना मुईद, मौलाना नूरैन, मौलाना नूरूद्दीन आफाकी, मौलाना बरकात, मौलाना बिलाल सहित काफी लोग मौजूद रहे।
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मालूम हो कि तीन दिवसीय आलमी (अंतर्राष्ट्रीय) सेमिनार व जश्ने मुजद्दिद अल्फेसानी का आयोजन शहर के हम्मालीपुरा मदरसे में आयोजित हो रहा है। शनिवार की देरशाम वारसी पब्लिक स्कूल परिसर में जलसे का प्रोग्राम हुआ। इसमें तकरीर करते हुए आलिम व मुफ्ती जाकिर साहब ने युवाओं को समाज की बेहतरी के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने बताया कि एक ओर तो यतीमों (अनाथों) व मुफलिसों (गरीबों) की मदद कर हम उन्हें अपने पैरों खड़े होकर आत्मनिर्भर बनाते हैं।
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वहीं ऐसा करने वालों से अल्लाह तआला काफी खुश होता है। रहमतों व बरकतों की बारिश पूरे परिवार पर करता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से आए प्रो. डा. अब्दुस्सलाम जीलानी ने कहा कि मुसलमानों की मईशत की बदहाली उसी वक्त दूर हो सकती है जब वह खुद तरक्की करे और परिवार व समाज की भलाई की ओर ध्यान दे।
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स्वरोजगार अपनाए और दूसरे की तरक्की को देखकर खुद भी तरक्की करने की कोशिश करे। मौलाना अनवार शेरी ने कहा कि हदीश में आया है कि अल्लाह गरीबों की वजह से रोजी देता है तो फिर हमें भी गरीबों पर खर्च करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। मौलाना फहीम अज़हरी ने कहा कि हमारे नबी का पैगाम है कि खाने को बर्बाद नहीं करना चाहिए। जितनी जरूरत हो उतना ही लें ताकि बचा हुआ खाना किसी गरीब की भूख मिटा सके।
कार्यक्रम की सदारत कर रहे हजरत मौलाना आफाक अहमद मुजद्ददी ने कहा कि आमतौर पर लोग अपनी मेहनत की कमाई को खर्च करने में कंजूसी करते हैं। लेकिन बात जब शादी, पार्टी की आए तो फिजूलखर्ची जमकर होती है। इनसे बचने की हर मोमिन को कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर मौलाना अखलाक साहब, मौलाना अहमद सईद, मौलाना व कारी जिलाउल कमर, मौलाना मुईद, मौलाना नूरैन, मौलाना नूरूद्दीन आफाकी, मौलाना बरकात, मौलाना बिलाल सहित काफी लोग मौजूद रहे।