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कन्नौज की ऐतिहासिक विरासत पर संकट
Kannauj
Updated Fri, 18 Apr 2014 05:32 AM IST
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कन्नौज। एएसआई की उदासीनता और लापवाही के चलते हर्षवर्धन और राजा जयचंद्र के नगर की ऐतिहासिक विरासत दिनोदिन छीज रही है । विभागीय देखरेख के अभाव में जिले की संरक्षित 13 विशिष्ट पुरातात्विक धरोहरें अब हमेशा के लिए गुमनामी के अंधेर में विलुप्त होने की कगार पर हैं। हालात यह है राजा जयचंद्र के किले में आलीशान बैठकों और महलों के ध्वंसाशेषों पर कब्जा करने की कोशिशें नहीं धम रही हैं।
एएसआई की ढिलाई के कारण राजा जयचंद्र के भव्य महल के ध्वंसावशेष और बैठकों को असरदार दबंगों ने हथियाना शुरू कर दिया है। महल के कई हिस्से पहले ही बढ़ती आबादी की भेट चढ़ चुके हैं। जिन क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया वहां भी लोग कब्जा करने से नहीं चूक रहे। बालापीर के मकबरे, मकदूम जहांनिया, जीटी रोड का रोजा में बस रही आबादी सैकड़ों साल पुरानी विरासत को लील लेने पर आमदा है। एएसआई के सुपरवाइजर अरविंद बाबू पाल ने बताया आगरा जोन के अधिकारियों ने करीब 10 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति उप मंडलीय कार्यालय में कर रखी है। कब्जे की सूचना पर कर्मियों द्वारा कोतवाली में सूचना दी जाती है, लेकिन स्थानीय नेताओं के दबाब में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। विश्व विरासत दिवस पर भी विभाग ने कोई कार्यक्रम आयोजित नही किया है।
आगरा स्थित पुरातत्व विभाग के संरक्षण जोनल अधिकारी संरक्षण स्थल एनके पाठक की माने तो जर्जर संरक्षित स्थलों की देख रेख के लिए विभाग समय-समय पर पर्याप्त काम करवाता है। कन्नौज में मकदूम जहांनिया और बालापीर के मकबरे के जीर्णोद्धार के लिए स्टीमेट तैयार किया गया है। संभावना है जल्द छूटे काम पूरे करा लिए जाएंगे। संरक्षित स्थलों पर कब्जे संबंधी कई मामले कोर्ट में है। आदेश के बाद विभागीय कार्यवाई की जाएगी।
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एएसआई की ढिलाई के कारण राजा जयचंद्र के भव्य महल के ध्वंसावशेष और बैठकों को असरदार दबंगों ने हथियाना शुरू कर दिया है। महल के कई हिस्से पहले ही बढ़ती आबादी की भेट चढ़ चुके हैं। जिन क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया वहां भी लोग कब्जा करने से नहीं चूक रहे। बालापीर के मकबरे, मकदूम जहांनिया, जीटी रोड का रोजा में बस रही आबादी सैकड़ों साल पुरानी विरासत को लील लेने पर आमदा है। एएसआई के सुपरवाइजर अरविंद बाबू पाल ने बताया आगरा जोन के अधिकारियों ने करीब 10 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति उप मंडलीय कार्यालय में कर रखी है। कब्जे की सूचना पर कर्मियों द्वारा कोतवाली में सूचना दी जाती है, लेकिन स्थानीय नेताओं के दबाब में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। विश्व विरासत दिवस पर भी विभाग ने कोई कार्यक्रम आयोजित नही किया है।
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आगरा स्थित पुरातत्व विभाग के संरक्षण जोनल अधिकारी संरक्षण स्थल एनके पाठक की माने तो जर्जर संरक्षित स्थलों की देख रेख के लिए विभाग समय-समय पर पर्याप्त काम करवाता है। कन्नौज में मकदूम जहांनिया और बालापीर के मकबरे के जीर्णोद्धार के लिए स्टीमेट तैयार किया गया है। संभावना है जल्द छूटे काम पूरे करा लिए जाएंगे। संरक्षित स्थलों पर कब्जे संबंधी कई मामले कोर्ट में है। आदेश के बाद विभागीय कार्यवाई की जाएगी।
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