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जिले के 44 फीसदी तालाब सूखे

Tue, 26 Apr 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज Updated Tue, 26 Apr 2016 11:33 PM IST
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44 per cent of the dry lake district
उमर्दा का सूखा तालाब। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गांवों में पालतू मवेशियों व जंगली जानवरों व पशु पक्षियों के सामने इन दिनों पीने के पानी के लिए भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। इनके लिए पेयजल का मुख्य साधन जगह-जगह खुदे पड़े तालाब सूखकर खंखड़ हो गए हैं। ऐसे में उन्हें चारा या भोजन करने के बाद पीने के पानी के लिए इधर-उधर चक्कर लगाना पड़ रहा है। हालात कितने भयावह हैं इसका अंदाजा सरकारी आंकड़ों को देखकर ही लगाया जा सकता है। जिले के राजस्व विभाग के सरकारी आंकड़ों में मुख्य तौर पर कुल 1492 बड़े तालाब हैं।
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इनमें से 650 तालाब यानि 44 फीसदी तालाब सूखे पड़े हैं। जिले के कमोवेश आठों विकास खंडों में तालाब मवेशियों के पेयजल का मुख्य साधन हैं। बीते वर्ष बारिश कम होने की वजह से तालाब पूरी क्षमता से नहीं भर पाए है। विकास खंड छिबरामऊ व उमर्दा में सर्वाधिक तालाब हैं। जंगली जीव जंतु, पक्षु पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए इन्हीं तालाबों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों की मानें तो तालाब सूख जाने के कारण प्यास लगने पर अक्सर जंगली पशु व जीव जंतु गांवों की ओर आ रहे हैं।
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गुगरापुर क्षेत्र में कई गांवों व काली नदी किनारे इन दिनों लकड़बग्घा, सियार, वनरोज (नीलगाय) आदि की धमाचौकड़ी बढ़ गई है। बताते हैं कि पानी के चक्कर में ये भटकते हुए वहां पहुंचे हैं। वहीं जिले भर में कुल 785 तालाब ऐसे हैं जहां पर थोड़ी मात्रा में ही पानी बचा है। जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है उससे आने वाले कुछ दिनों के अंदर इनमें से भी ज्यादातर तालाब सूख जाएंगे। ऐसे में पेयजल संकट कम होने के बजाय और बढ़ जाएगा।
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इस संबंध में श्रम एवं रोजगार मनरेगा के उपायुक्त इंद्रपाल सिंह ने बताया कि तालाब सूखने की जानकारी मिली है। अब तक 57 तालाबों को भराया भी जा चुका है। इनमें से सरकारी नलकूप से 10, नहरों से 18 व अन्य साधनों से 29 तालाब भरवा दिए गए हैं। इन तालाबों में पानी पहुंचने से जनता को राहत मिली है अन्य सूखे तालाबों को भराने के लिए युद्धस्तर से प्रयास चल रहे हैं। रोजाना ब्लाकों से तालाब भराने के कार्य की प्रगति रिपोर्ट तलब की जा रही है। जल्द ही सारे सूखे तालाब भरा दिए जाएंगे।
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