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विश्व रीढ़ दिवस: स्मार्टफोन चलाते समय यह मुद्रा बेहद घातक, बैठते और खड़े होते समय इन बातों का रखें ध्यान
Thu, 16 Oct 2025 02:29 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 16 Oct 2025 02:29 PM IST
सार
मोबाइल की स्क्रीन पर झुककर देखने से गर्दन 45 डिग्री के कोण पर झुक जाती है, जिससे रीढ़ पर चार गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। यही आगे चलकर सर्वाइकल दर्द और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का कारण बनता है।
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सर्वाइकल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आधुनिक जीवनशैली और स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल ने रीढ़ की सेहत को कमजोर करना शुरू कर दिया है। मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटों झुककर बैठने की आदत युवाओं की रीढ़ पर बुरा असर डाल रही है। रीढ़ शरीर की मुख्य धुरी है लेकिन गलत मुद्रा, व्यायाम की कमी और लंबे समय तक झुककर बैठने से युवाओं में रीढ़ से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व रीढ़ दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों को बैठने की मुद्रा, चलने के तरीके और दैनिक दिनचर्या में सुधार की सलाह दी है।
बढ़ रहे सर्वाइकल दर्द के मरीज
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश राजपूत का कहना है कि 30 से 40 वर्ष के लोगों में स्लिप डिस्क और सर्वाइकल दर्द के मामले पहले की तुलना में दोगुने हो चुके हैं। भागमभाग जिंदगी में लोग अपने शरीर पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे कई तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं। दफ्तरों में आरामदायक कुर्सी पर घंटों बैठे रहने से भी दिक्कत बढ़ती है। मोबाइल की स्क्रीन पर झुककर देखने से गर्दन 45 डिग्री के कोण पर झुक जाती है, जिससे रीढ़ पर चार गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। यही आगे चलकर सर्वाइकल दर्द और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का कारण बनता है। सुबह से शाम तक दफ्तर के अंदर रहने की दिनचर्या की वजह से विटामिन-डी की कमी होने से भी दिक्कत बढ़ती जाती है।
स्वस्थ रीढ़ हमारे शरीर का आधार
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. अरविंद कनकने का कहना है कि जिनकी बैठने मुद्रा सही और सक्रिय जीवनशैली होती है, उन्हें रीढ़ की दिक्कत नहीं होती। सरल आदतों को अपनाकर रीढ़ की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। न्यूरो सर्जन डॉ. दिनेश शुक्ला ने बताया कि विश्व रीढ़ दिवस याद दिलाता है कि स्वस्थ रीढ़ हमारे शरीर का आधार है। इस बार थीम ‘मूव योर स्पाइन’ है, जो संदेश देती है कि सक्रिय जीवनशैली अपनाकर रीढ़ को स्वस्थ रखा जा सकता है। युवा और बुजुर्गों को दिनचर्या में योग, हल्की स्ट्रेचिंग व वॉकिंग शामिल करनी चाहिए।
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बैठते और खड़े होते समय सही मुद्रा बनाएं।
रोजाना पैदल चलें, योग अथवा स्ट्रेचिंग करें। सही ऊंचाई की कुर्सी-टेबल का प्रयोग करें। वजन नियंत्रित रखें, विटामिन-डी भरपूर लें। सीधे बैठें, लगातार झुककर मोबाइल न देखें। काम के हर 30 मिनट बाद उठकर चलें। किसी भारी वस्तु को झटके से न उठाएं।
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बढ़ रहे सर्वाइकल दर्द के मरीज
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश राजपूत का कहना है कि 30 से 40 वर्ष के लोगों में स्लिप डिस्क और सर्वाइकल दर्द के मामले पहले की तुलना में दोगुने हो चुके हैं। भागमभाग जिंदगी में लोग अपने शरीर पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे कई तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं। दफ्तरों में आरामदायक कुर्सी पर घंटों बैठे रहने से भी दिक्कत बढ़ती है। मोबाइल की स्क्रीन पर झुककर देखने से गर्दन 45 डिग्री के कोण पर झुक जाती है, जिससे रीढ़ पर चार गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। यही आगे चलकर सर्वाइकल दर्द और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का कारण बनता है। सुबह से शाम तक दफ्तर के अंदर रहने की दिनचर्या की वजह से विटामिन-डी की कमी होने से भी दिक्कत बढ़ती जाती है।
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स्वस्थ रीढ़ हमारे शरीर का आधार
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. अरविंद कनकने का कहना है कि जिनकी बैठने मुद्रा सही और सक्रिय जीवनशैली होती है, उन्हें रीढ़ की दिक्कत नहीं होती। सरल आदतों को अपनाकर रीढ़ की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। न्यूरो सर्जन डॉ. दिनेश शुक्ला ने बताया कि विश्व रीढ़ दिवस याद दिलाता है कि स्वस्थ रीढ़ हमारे शरीर का आधार है। इस बार थीम ‘मूव योर स्पाइन’ है, जो संदेश देती है कि सक्रिय जीवनशैली अपनाकर रीढ़ को स्वस्थ रखा जा सकता है। युवा और बुजुर्गों को दिनचर्या में योग, हल्की स्ट्रेचिंग व वॉकिंग शामिल करनी चाहिए।
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बैठते और खड़े होते समय सही मुद्रा बनाएं।
रोजाना पैदल चलें, योग अथवा स्ट्रेचिंग करें। सही ऊंचाई की कुर्सी-टेबल का प्रयोग करें। वजन नियंत्रित रखें, विटामिन-डी भरपूर लें। सीधे बैठें, लगातार झुककर मोबाइल न देखें। काम के हर 30 मिनट बाद उठकर चलें। किसी भारी वस्तु को झटके से न उठाएं।