{"_id":"683cb5b828b6979060085e55","slug":"women-empowerment-is-an-important-factor-in-making-india-a-developed-nation-jhansi-news-c-11-1-jhs1032-568308-2025-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: ‘भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महिला सशक्तीकरण महत्वपूर्ण कारक’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: ‘भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महिला सशक्तीकरण महत्वपूर्ण कारक’
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कलक्ट्रेट सभागार में हुई संगोष्ठी में समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एल वेंकटेश्वर लू ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महिला सशक्तिकरण अत्यधिक महत्वपूर्ण कारक है। माता ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो जन्म के बाद उसे आध्यात्म और सत्कर्म की शिक्षा प्रदान करती है। श्रेष्ठ कर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।
कर्मयोगी, अभ्युदय एवं विकसित भारत विषयक संगोष्ठी में प्रमुख सचिव बोले कि जिस व्यक्ति को आत्मज्ञान का अनुभव होता है, वह ईश्वरीय तत्व का आभास करने लगता है। हमारे देश में धार्मिक मतभेद विभिन्न धर्मों में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न किए गए हैं, जिन्होंने धर्म की परिभाषा को, धर्म का अनुसरण करने वाले लोगों के बीच गलत तरीके से प्रस्तुत किया। हम सभी को इस अवधारणा को दूर करने के लिए अपने विचारों में आपसी संवाद का समावेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को धरातल पर अवतरित करने के लिए हम सभी को आत्मचिंतन के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि जो धर्म समानता, एकता और प्रेम की शिक्षा दे, हमें उसी धर्म का पालन करना चाहिए। जो लोग इन शब्दों से विपरीत शिक्षा देते हैं, हमें उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का परित्याग करना चाहिए। आयुक्त बिमल कुमार दुबे ने कहा कि जीवन में दुख से वियोग हो जाना ही योग है और अभ्युदय का अर्थ विकार है। विकास की दो अवधारणाएं (पश्चिमी एवं पूर्वी) हैं। पश्चिमी अवधारणा भौतिकवादी विचारधारा और पूर्वी अवधारणा सांस्कृतिक समुदाय के भीतर सामूहिक कल्याण और परस्पर निर्भरता पर ध्यान केंद्रित करती है।
डीआईजी केशव कुमार चौधरी ने कहा कि हमें कर्मयोगी बनने के लिए अपने कार्यों में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाना होगा। देश का प्रत्येक नागरिक यदि हमारे संविधान में दिए गए कानून का अनुपालन करता है, तो वह अपने देश को विकसित भारत बनाने में भी सहयोगी बन सकता है। डीएम मृदुल चौधरी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शासकीय अंग की अहम भूमिका है। सीईओ प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि हमें अपने विकसित भारत बनाने के लिए सर्वप्रथम अपनी सोच (विचारों) को विकसित करना होगा। किसी भी कार्य के सफल परिणाम प्राप्त करने के लिए हमें अपने कार्य करने के तरीकों में सुधार लाना होगा। उप निदेशक समाज कल्याण एसएन त्रिपाठी, डॉ. चित्रलेखा, जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन कुमार मैत्रेय, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी जेबी शिंदे, एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ला, जीआईसी प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह, उपनिदेशक उद्यान विनय कुमार ने भी विचार रखे। इस दौरान संयुक्त विकास आयुक्त ऋषिमुनि उपाध्याय, एडी हेल्थ डॉ. सुमन, सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, एडीएम वरुण पांडेय, डीआईओएस रती वर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कलक्ट्रेट सभागार में हुई संगोष्ठी में समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एल वेंकटेश्वर लू ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महिला सशक्तिकरण अत्यधिक महत्वपूर्ण कारक है। माता ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो जन्म के बाद उसे आध्यात्म और सत्कर्म की शिक्षा प्रदान करती है। श्रेष्ठ कर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।
कर्मयोगी, अभ्युदय एवं विकसित भारत विषयक संगोष्ठी में प्रमुख सचिव बोले कि जिस व्यक्ति को आत्मज्ञान का अनुभव होता है, वह ईश्वरीय तत्व का आभास करने लगता है। हमारे देश में धार्मिक मतभेद विभिन्न धर्मों में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न किए गए हैं, जिन्होंने धर्म की परिभाषा को, धर्म का अनुसरण करने वाले लोगों के बीच गलत तरीके से प्रस्तुत किया। हम सभी को इस अवधारणा को दूर करने के लिए अपने विचारों में आपसी संवाद का समावेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को धरातल पर अवतरित करने के लिए हम सभी को आत्मचिंतन के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि जो धर्म समानता, एकता और प्रेम की शिक्षा दे, हमें उसी धर्म का पालन करना चाहिए। जो लोग इन शब्दों से विपरीत शिक्षा देते हैं, हमें उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का परित्याग करना चाहिए। आयुक्त बिमल कुमार दुबे ने कहा कि जीवन में दुख से वियोग हो जाना ही योग है और अभ्युदय का अर्थ विकार है। विकास की दो अवधारणाएं (पश्चिमी एवं पूर्वी) हैं। पश्चिमी अवधारणा भौतिकवादी विचारधारा और पूर्वी अवधारणा सांस्कृतिक समुदाय के भीतर सामूहिक कल्याण और परस्पर निर्भरता पर ध्यान केंद्रित करती है।
विज्ञापन
डीआईजी केशव कुमार चौधरी ने कहा कि हमें कर्मयोगी बनने के लिए अपने कार्यों में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाना होगा। देश का प्रत्येक नागरिक यदि हमारे संविधान में दिए गए कानून का अनुपालन करता है, तो वह अपने देश को विकसित भारत बनाने में भी सहयोगी बन सकता है। डीएम मृदुल चौधरी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शासकीय अंग की अहम भूमिका है। सीईओ प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि हमें अपने विकसित भारत बनाने के लिए सर्वप्रथम अपनी सोच (विचारों) को विकसित करना होगा। किसी भी कार्य के सफल परिणाम प्राप्त करने के लिए हमें अपने कार्य करने के तरीकों में सुधार लाना होगा। उप निदेशक समाज कल्याण एसएन त्रिपाठी, डॉ. चित्रलेखा, जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन कुमार मैत्रेय, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी जेबी शिंदे, एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ला, जीआईसी प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह, उपनिदेशक उद्यान विनय कुमार ने भी विचार रखे। इस दौरान संयुक्त विकास आयुक्त ऋषिमुनि उपाध्याय, एडी हेल्थ डॉ. सुमन, सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, एडीएम वरुण पांडेय, डीआईओएस रती वर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन