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पर्यटन के नक्शे पर झांसी क्यों नहीं?
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:51 AM IST
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rani mehal. jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड में ऐतिहासिक, धार्मिक और खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों की कमी नहीं है, जिसके चलते यहां पर्यटन उद्योग असीम संभावनाएं हैं। इसके बावजूद अभी तक यह देश के पर्यटन मानचित्र में नहीं आ सका है। इस कारण देश और विदेशी के पर्यटक बड़ी संख्या में यहां नहीं आ पाते। भाजपा कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा झांसी आए हैं। क्या स्थानीय नेता उनका ध्यान इस तरफ दिलाएंगे? बुंदेलखंड को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। क्षेत्र के पर्यटक स्थलों पर अमर उजाला की रिपोर्ट...
- रानी का किला
शहर के बीचों बीच इस स्थित इस किले का निर्माण सन 1613 में हुआ था। चार सौ साल पुराना किला सन 1857 के गदर का साक्षी है। आज भी यह किला बुलंदी के साथ खड़ा हुआ है। किले में प्रतिदिन शाम को रानी की गौरव गाथा पर आधारित लाइट एंड साउंड कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
- रानी महल
किले के नजदीक ही रानी महल स्थित है। महल में रानी निवास करती थीं। महल में पूर्वोत्तर काल से लेकर मध्य काल तक की महत्वपूर्ण पुरातात्विक प्रतिमाएं रखी हुई हैं। इसके अलावा महल की छत पर दीवारों पर रंगबिरंगे भित्ती चित्र आज भी देखने को मिलते हैं।
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- झोकनबाग
1857 की गदर के दौरान क्रांतिकारियों ने अंग्रेज अधिकारियों का उनके परिवार समेत कत्ल कर दिया था। लाशें झोकनबाग स्थित कुएं में फेंक दी गईं थीं। इनकी स्मृति में ब्रिटिश शासन ने यहां एक स्मारक का निर्माण किया था। साथ ही घटना में मारे गए अंग्रेजों के नाम की सूची भी उपलब्ध है।
- लक्ष्मी ताल
शहर से सटा यह रमणीक स्थल है। बुंदेलों, मराठाओं व गुसाइयों ने इस ऐतिहासिक तालाब का विकास कराया था। तालाब के आसपास काली, लक्ष्मी, नवग्रह समेत अन्य कई मंदिर स्थित हैं। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
- नारायण बाग
106 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में नारायण बाग स्थित है। बाग में केवड़े की सुगंध महकती रहती है। इसके अलावा बड़े-बड़े अजगर भी यहां देखने को मिल जाते हैं। साथ ही अन्य जीव-जंतु खरगोश, लोमड़ी आदि भी देखने को मिल जाते हैं।
- कैमासन देवी मंदिर
झांसी - कानपुर राजमार्ग के नजदीक पहाड़ पर कैमासन देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर का निर्माण चंदेलकाल में हुआ था। मंदिर के पास दीप स्तंभ का निर्माण बुंदेला व मराठाकाल में हुआ। बारिश में मंदिर के इर्दगिर्द पहाड़ी पर चारों ओर हरियाली छाई हुई है। इससे नजारा खूबसूरत हो गया है।
- गढ़मऊ झील
झांसी से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के बीच में गढ़मऊ झील स्थित है। लगभग दस वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली इस झील में साल भर पानी भरा रहता है। जाड़े के दिनों में यहां विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का डेरा जमा रहता है।
- सुकवा - ढुकवा बांध
ललितपुर रोड के पास बेतवा नदी पर इस बांध का निर्माण 1909 में हुआ था। यह अपने आप में अनूठा है। बांध के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए लगभग एक किलोमीटर लंबी सुरंग है। सुरंग की खिड़कियों से बांध के ऊपर से गिरते पानी को देखना रोमांच पैदा करता है।
- माताटीला बांध
माताटीला बांध बेतवा नदी पर झांसी नगर से लगभग साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसमें 23 फाटक हैं, जिनमें से तेज बहाव के साथ गिरता पानी अद्भुत नजारा पैदा करता है। इसके पास ही उद्यान भी है, जिसे सिंचाई विभाग ने बनाया है।
10- सेंट ज्यूड श्राइन
ईसा मसीह द्वारा धर्म प्रचार के लिए नियुक्त किए गए बारह शिष्यों में एक संत ज्यूड को यह चर्च समर्पित है। यह चर्चा एशिया का सबसे बड़ा श्राइन है। यह देसी ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी ईसाई श्रद्धालु आते हैं। हर साल यहां 19 से 28 अक्तूबर तक विशेष आयोजन होता है।
यह भी हैं महत्वपूर्ण स्थल :-
- करगुंवा जी: जैन समाज का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल
- पानी वाली धर्मशाला: चंदेल काल का विशाल जलाशय व आसपास के प्राचीन मंदिर
- लहर की देवी मंदिर: चंदेल काल में आल्हा - ऊदल ने की थी स्थापना
- बरुआसागर किला व झील: 180 वर्ग किमी क्षेत्र में झील व पास में पहाड़ी पर किला
- राजा मर्दन सिंह किला: झांसी से 50 किमी की दूरी पर किला व पास में मानसरोवर झील
- देवगढ़: छठवीं शताब्दी की गुप्तकाल की वास्तु कला व मूर्ति कला का केंद्र
- ओरछा: झांसी से सिर्फ 16 किमी दूर बेतवा नदी के घाट का प्राकृतिक सौंदर्य व राम मंदिर
ये हैं जरूरतें
- सड़क कनेक्टिविटी दुरुस्त की जाए
- बांधों के आसपास आकर्षक उद्यान विकसित किए जाएं
- पुरातत्व धरोहरों के संरक्षण के विशेष इंतजाम हों
- पर्यटक स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए सर्किट बनाया जाए
- समय - समय पर विशेष आयोजन किए जाएं
- हवाई अड्डे की स्थापना की जाए
- एडवेंचर खेल का आयोज हो
- होटल व रिसॉर्ट का जाल बिछाया जाए
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- रानी का किला
शहर के बीचों बीच इस स्थित इस किले का निर्माण सन 1613 में हुआ था। चार सौ साल पुराना किला सन 1857 के गदर का साक्षी है। आज भी यह किला बुलंदी के साथ खड़ा हुआ है। किले में प्रतिदिन शाम को रानी की गौरव गाथा पर आधारित लाइट एंड साउंड कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
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- रानी महल
किले के नजदीक ही रानी महल स्थित है। महल में रानी निवास करती थीं। महल में पूर्वोत्तर काल से लेकर मध्य काल तक की महत्वपूर्ण पुरातात्विक प्रतिमाएं रखी हुई हैं। इसके अलावा महल की छत पर दीवारों पर रंगबिरंगे भित्ती चित्र आज भी देखने को मिलते हैं।
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- झोकनबाग
1857 की गदर के दौरान क्रांतिकारियों ने अंग्रेज अधिकारियों का उनके परिवार समेत कत्ल कर दिया था। लाशें झोकनबाग स्थित कुएं में फेंक दी गईं थीं। इनकी स्मृति में ब्रिटिश शासन ने यहां एक स्मारक का निर्माण किया था। साथ ही घटना में मारे गए अंग्रेजों के नाम की सूची भी उपलब्ध है।
- लक्ष्मी ताल
शहर से सटा यह रमणीक स्थल है। बुंदेलों, मराठाओं व गुसाइयों ने इस ऐतिहासिक तालाब का विकास कराया था। तालाब के आसपास काली, लक्ष्मी, नवग्रह समेत अन्य कई मंदिर स्थित हैं। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
- नारायण बाग
106 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में नारायण बाग स्थित है। बाग में केवड़े की सुगंध महकती रहती है। इसके अलावा बड़े-बड़े अजगर भी यहां देखने को मिल जाते हैं। साथ ही अन्य जीव-जंतु खरगोश, लोमड़ी आदि भी देखने को मिल जाते हैं।
- कैमासन देवी मंदिर
झांसी - कानपुर राजमार्ग के नजदीक पहाड़ पर कैमासन देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर का निर्माण चंदेलकाल में हुआ था। मंदिर के पास दीप स्तंभ का निर्माण बुंदेला व मराठाकाल में हुआ। बारिश में मंदिर के इर्दगिर्द पहाड़ी पर चारों ओर हरियाली छाई हुई है। इससे नजारा खूबसूरत हो गया है।
- गढ़मऊ झील
झांसी से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के बीच में गढ़मऊ झील स्थित है। लगभग दस वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली इस झील में साल भर पानी भरा रहता है। जाड़े के दिनों में यहां विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का डेरा जमा रहता है।
- सुकवा - ढुकवा बांध
ललितपुर रोड के पास बेतवा नदी पर इस बांध का निर्माण 1909 में हुआ था। यह अपने आप में अनूठा है। बांध के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए लगभग एक किलोमीटर लंबी सुरंग है। सुरंग की खिड़कियों से बांध के ऊपर से गिरते पानी को देखना रोमांच पैदा करता है।
- माताटीला बांध
माताटीला बांध बेतवा नदी पर झांसी नगर से लगभग साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसमें 23 फाटक हैं, जिनमें से तेज बहाव के साथ गिरता पानी अद्भुत नजारा पैदा करता है। इसके पास ही उद्यान भी है, जिसे सिंचाई विभाग ने बनाया है।
10- सेंट ज्यूड श्राइन
ईसा मसीह द्वारा धर्म प्रचार के लिए नियुक्त किए गए बारह शिष्यों में एक संत ज्यूड को यह चर्च समर्पित है। यह चर्चा एशिया का सबसे बड़ा श्राइन है। यह देसी ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी ईसाई श्रद्धालु आते हैं। हर साल यहां 19 से 28 अक्तूबर तक विशेष आयोजन होता है।
यह भी हैं महत्वपूर्ण स्थल :-
- करगुंवा जी: जैन समाज का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल
- पानी वाली धर्मशाला: चंदेल काल का विशाल जलाशय व आसपास के प्राचीन मंदिर
- लहर की देवी मंदिर: चंदेल काल में आल्हा - ऊदल ने की थी स्थापना
- बरुआसागर किला व झील: 180 वर्ग किमी क्षेत्र में झील व पास में पहाड़ी पर किला
- राजा मर्दन सिंह किला: झांसी से 50 किमी की दूरी पर किला व पास में मानसरोवर झील
- देवगढ़: छठवीं शताब्दी की गुप्तकाल की वास्तु कला व मूर्ति कला का केंद्र
- ओरछा: झांसी से सिर्फ 16 किमी दूर बेतवा नदी के घाट का प्राकृतिक सौंदर्य व राम मंदिर
ये हैं जरूरतें
- सड़क कनेक्टिविटी दुरुस्त की जाए
- बांधों के आसपास आकर्षक उद्यान विकसित किए जाएं
- पुरातत्व धरोहरों के संरक्षण के विशेष इंतजाम हों
- पर्यटक स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए सर्किट बनाया जाए
- समय - समय पर विशेष आयोजन किए जाएं
- हवाई अड्डे की स्थापना की जाए
- एडवेंचर खेल का आयोज हो
- होटल व रिसॉर्ट का जाल बिछाया जाए