{"_id":"59273e0c4f1c1b812d535ae6","slug":"where-there-is-faith-and-reverence-progress-there","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहां आस्था और श्रद्धा, वहां उन्नति ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहां आस्था और श्रद्धा, वहां उन्नति
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 May 2017 01:56 AM IST
विज्ञापन
यति सम्मेलन
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करगुवां जी जैन तीर्थ में चल रहे युग प्रतिक्रमण एवं यति सम्मेलन का समापन बृहस्पतिवार को हुआ। इस अवसर पर तीर्थ परिसर में गाजे - बाजे के साथ श्री जी की शोभायात्रा निकाली गई।
सुबह शोभायात्रा से पहले भव्य विमान में श्री जी को विराजमान किया गया। इसके बाद विमान का तिलक हुआ। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं के साथ आगे गणाचार्य विराग सागर ससंघ चल रहे थे। भक्ति संगीत की धुनों पर श्रद्धालु थिरकते चल रहे थे। विद्या सागर सभागार से प्रारंभ हुई शोभायात्रा का परिसर में परिक्रमा के बाद बडे़ बाबा के दरबार में समापन हुआ। इसके बाद हुए धर्मसभा में गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि आध्यात्म का शंखनाद करने वाले तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रवचनों का सार जिनवाणी है। जहां आस्था और श्रद्धा जुड़ती है, वहां उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं। जैन समाज के उद्योगपतियों को आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वह अपने प्रतिष्ठानों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे जैन समाज के लोगों को काम पर लगाएं। धर्मसभा में आचार्य विशुद्ध सागर, आचार्य विनिश्चय सागर, क्षुल्लक मुनि प्रज्ञान सागर ने भी प्रवचन दिए। इससे पूर्व डा. उदय कुमार जैन ने चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया। संध्या जैन ने मंगलाचरण किया। कार्याध्यक्ष राजीव जैन सिर्स चक्रवर्ती परिवार को स्थापित मंगल कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
आध्यात्म सूर्य की उपाधि से नवाजा
लगभग 70 हजार किमी पदयात्रा कर यति सम्मेलन में आए श्वेतांबर समाज के संत स्वामी कपिल मुनि कमलेश व संत स्वामी आत्मानंदी जी ने गणाचार्य विराग सागर जी को श्वेतांबर समाज की ओर से आध्यात्म सूर्य की उपाधि से नवाजा।
विज्ञापन
चार्तुमास का निवेदन
गणाचार्य विराग सागर जी को श्रीफल भेंटकर कई शहरों से आए दिगंबर पंचायतों के प्रतिनिधियों ने चार्तुमास करने का निवेदन किया। इनमें जयपुर के शांति लाल बड़जात्या, वीरेंद्र कुमार, गजेंद्र कुमार, सूरत के अमृत कुमार, गाजियाबाद के जम्मू प्रसाद जैन, झांसी के प्रकाश चंद्र जैन, ललितपुर के नेमिचंद जैन आदि रहे।
व्यवस्था में सहयोग देने वाले सम्मानित
यति सम्मेलन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग देने वालों को महोत्सव समिति ने सम्मानित किया। इनमें जैन वीर सेवा दल जयपुर, स्काउट गाइड के बच्चों, सब इंस्पेक्टर महेश यादव, मक्खन लाल जैन, विनय उपाध्याय, मनीराम कुशवाहा, विष्णु जैन, राजकुमार जैन, सरोज जैन, संध्या सराफ, प्रमोद जैन, जिनेंद्र सराफ, आलोक जैन, अमीश जैन, आशीष जैन, रीतू जैन, अरुण जैन, अजीत शास्त्री, अशोक क्रांतिकारी आदि रहे। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष प्रदीप जैन आदित्य, महामंत्री प्रवीण जैन, सुभाष जैन, राजीव जैन सिर्स, पुरुषोत्तम पुरवार, प्रदीप पाटनी, प्रसन्न नायक, विनोद जैन, जिनेंद्र जैन, यूथप जैन, डा. एसके द्विवेदी, डा. प्रतीक गुबरेले, संजय सिंघई आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सुबह शोभायात्रा से पहले भव्य विमान में श्री जी को विराजमान किया गया। इसके बाद विमान का तिलक हुआ। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं के साथ आगे गणाचार्य विराग सागर ससंघ चल रहे थे। भक्ति संगीत की धुनों पर श्रद्धालु थिरकते चल रहे थे। विद्या सागर सभागार से प्रारंभ हुई शोभायात्रा का परिसर में परिक्रमा के बाद बडे़ बाबा के दरबार में समापन हुआ। इसके बाद हुए धर्मसभा में गणाचार्य विराग सागर ने कहा कि आध्यात्म का शंखनाद करने वाले तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रवचनों का सार जिनवाणी है। जहां आस्था और श्रद्धा जुड़ती है, वहां उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं। जैन समाज के उद्योगपतियों को आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वह अपने प्रतिष्ठानों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे जैन समाज के लोगों को काम पर लगाएं। धर्मसभा में आचार्य विशुद्ध सागर, आचार्य विनिश्चय सागर, क्षुल्लक मुनि प्रज्ञान सागर ने भी प्रवचन दिए। इससे पूर्व डा. उदय कुमार जैन ने चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया। संध्या जैन ने मंगलाचरण किया। कार्याध्यक्ष राजीव जैन सिर्स चक्रवर्ती परिवार को स्थापित मंगल कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
विज्ञापन
आध्यात्म सूर्य की उपाधि से नवाजा
लगभग 70 हजार किमी पदयात्रा कर यति सम्मेलन में आए श्वेतांबर समाज के संत स्वामी कपिल मुनि कमलेश व संत स्वामी आत्मानंदी जी ने गणाचार्य विराग सागर जी को श्वेतांबर समाज की ओर से आध्यात्म सूर्य की उपाधि से नवाजा।
विज्ञापन
चार्तुमास का निवेदन
गणाचार्य विराग सागर जी को श्रीफल भेंटकर कई शहरों से आए दिगंबर पंचायतों के प्रतिनिधियों ने चार्तुमास करने का निवेदन किया। इनमें जयपुर के शांति लाल बड़जात्या, वीरेंद्र कुमार, गजेंद्र कुमार, सूरत के अमृत कुमार, गाजियाबाद के जम्मू प्रसाद जैन, झांसी के प्रकाश चंद्र जैन, ललितपुर के नेमिचंद जैन आदि रहे।
व्यवस्था में सहयोग देने वाले सम्मानित
यति सम्मेलन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग देने वालों को महोत्सव समिति ने सम्मानित किया। इनमें जैन वीर सेवा दल जयपुर, स्काउट गाइड के बच्चों, सब इंस्पेक्टर महेश यादव, मक्खन लाल जैन, विनय उपाध्याय, मनीराम कुशवाहा, विष्णु जैन, राजकुमार जैन, सरोज जैन, संध्या सराफ, प्रमोद जैन, जिनेंद्र सराफ, आलोक जैन, अमीश जैन, आशीष जैन, रीतू जैन, अरुण जैन, अजीत शास्त्री, अशोक क्रांतिकारी आदि रहे। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष प्रदीप जैन आदित्य, महामंत्री प्रवीण जैन, सुभाष जैन, राजीव जैन सिर्स, पुरुषोत्तम पुरवार, प्रदीप पाटनी, प्रसन्न नायक, विनोद जैन, जिनेंद्र जैन, यूथप जैन, डा. एसके द्विवेदी, डा. प्रतीक गुबरेले, संजय सिंघई आदि मौजूद रहे।