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हाथ में तर्पण को लिया जल, आंखों में आए आंसू
Jhansi
Updated Sat, 17 Sep 2016 01:00 AM IST
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हाथ में तर्पण को लिया जल, आंखों में आए आंसू
- फोटो : demo
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पूर्वजों की याद में दान-धर्म करने का पर्व पितृ पक्ष शुक्रवार से शुरू हो गया। लोगों ने जलाशयों पर अपने पूर्वजों को अर्घ्य देकर उन्हें याद किया। पितरों को पानी देने के लिए जैसे ही लोगों ने हाथों में जल लिया, उनकी आंखें पिता की याद में नम हो गईं।
भाद्रपद माह की पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या तक पितृ पक्ष रहता है। शुक्रवार से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलने वाले पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति व तृप्ति के लिए उनका आह्वान कर श्राद्ध करते है। पहले दिन लोग शुक्रवार को जलाशयोें में पहुंचे। यहां ब्राह्मणों ने मंत्रों उच्चारण के बीच श्राद्ध कर्ता को कुशा की अंगूठियां अनामिका उंगलियों में पहनाकर एवं कुशा को हाथ में लेकर पहलेे चावल से देवताओं को, जवा से सप्त ऋषियों को तथा तिल से पितरों को तर्पण कराया। इसके बाद में जल में खडे़ होकर सूर्य तथा पितरों की जलांजलि दिलाई। इस दौरान कई लोग अपने पुरखों व हाल ही में दिवंगत हुए परिजन को तर्पण देते वक्त भावुक नजर आए।
जलाशयों में तर्पण के बाद श्राद्ध करने वालों ने पितरों को भोजन अर्पण करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया।
इन जलाशयों में होता है तर्पण कार्य
महानगर के इन जलाशयों में लोग श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन तर्पण देते है, इनमें लक्ष्मी तालाब के तट से लगा सिद्ध की बगिया, भूतनाथ मंदिर क्षेत्र, झरना गेट, पानी वाली धर्मशाला व आंतिया तालाब है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर उसका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए। पुरखों का तर्पण दक्षिण दिशा में किया जाता है।
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भाद्रपद माह की पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या तक पितृ पक्ष रहता है। शुक्रवार से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलने वाले पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति व तृप्ति के लिए उनका आह्वान कर श्राद्ध करते है। पहले दिन लोग शुक्रवार को जलाशयोें में पहुंचे। यहां ब्राह्मणों ने मंत्रों उच्चारण के बीच श्राद्ध कर्ता को कुशा की अंगूठियां अनामिका उंगलियों में पहनाकर एवं कुशा को हाथ में लेकर पहलेे चावल से देवताओं को, जवा से सप्त ऋषियों को तथा तिल से पितरों को तर्पण कराया। इसके बाद में जल में खडे़ होकर सूर्य तथा पितरों की जलांजलि दिलाई। इस दौरान कई लोग अपने पुरखों व हाल ही में दिवंगत हुए परिजन को तर्पण देते वक्त भावुक नजर आए।
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जलाशयों में तर्पण के बाद श्राद्ध करने वालों ने पितरों को भोजन अर्पण करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया।
इन जलाशयों में होता है तर्पण कार्य
महानगर के इन जलाशयों में लोग श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन तर्पण देते है, इनमें लक्ष्मी तालाब के तट से लगा सिद्ध की बगिया, भूतनाथ मंदिर क्षेत्र, झरना गेट, पानी वाली धर्मशाला व आंतिया तालाब है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर उसका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए। पुरखों का तर्पण दक्षिण दिशा में किया जाता है।
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