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Jhansi News: भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनेंगे जल अवशोषण ट्रेंच
Mon, 31 Aug 2026 01:06 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:06 AM IST
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ललितपुर। बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकने और भूमिगत जलस्तर बढ़ाने के लिए अब ''वीबी-जी राम जी'' योजना के तहत जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां बारिश का पानी तेजी से बहकर बर्बाद हो जाता है।
जिले में कुल 415 ग्राम पंचायतें हैं, जहां विकास कार्यों के लिए मनरेगा योजना संचालित है। जिले में 1,96,706 पंजीकृत जॉबकार्ड धारक हैं, जिनमें से 1,19,713 सक्रिय हैं। जुलाई माह से मनरेगा को बदले हुए स्वरूप—''विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन'' (वीबी-जी राम जी)—के तहत जिले में लागू किया गया है। इस नई योजना में जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को 125 दिन तक रोजगार दिए जाने की गारंटी है। साथ ही, तय समय में भुगतान न होने पर मुआवजे का प्रावधान, पारदर्शिता के लिए जीपीएस ट्रैकिंग और सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्ति और जलवायु संरक्षण को प्रमुखता दी गई है।
कैसे काम करेंगे जल अवशोषण ट्रेंच?
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए जमीन पर जल अवशोषण ट्रेंच बनाए जाएंगे। ये ट्रेंच एक से दो फीट चौड़े, दो से तीन फीट गहरे और आवश्यकतानुसार लंबाई के होंगे। इनके निर्माण से बारिश के बहते पानी की गति नियंत्रित होगी और उसे जमीन में समाने का पर्याप्त मौका मिलेगा। इससे भूजल रिचार्ज होने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव पर भी रोक लगेगी। विशेषकर ढलान वाले और तेज जल बहाव वाले क्षेत्रों में ये संरचनाएं बेहद उपयोगी साबित होंगी। इसके लिए सभी ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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जल संरक्षण के साथ मिलेगा रोजगार
इस योजना के दोहरे लाभ हैं। एक तरफ जहां जल संरक्षण से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध होगा। ग्राम पंचायतें अपनी जरूरत के अनुसार स्थानों को चिह्नित कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रही हैं।
जनपद में मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। ट्रेंचिंग के माध्यम से इसी पानी को रोककर जमीन के अंदर सोखने का अवसर दिया जाएगा, जिससे भविष्य में जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। जुलाई में योजना लागू होने के बाद पहले चरण में पौधारोपण के लिए गड्ढे खुदवाए गए थे, और अब जल संरक्षण के लिए ट्रेंच निर्माण की कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है।
— रमेश कुमार यादव, उपायुक्त श्रम रोजगार
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जिले में कुल 415 ग्राम पंचायतें हैं, जहां विकास कार्यों के लिए मनरेगा योजना संचालित है। जिले में 1,96,706 पंजीकृत जॉबकार्ड धारक हैं, जिनमें से 1,19,713 सक्रिय हैं। जुलाई माह से मनरेगा को बदले हुए स्वरूप—''विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन'' (वीबी-जी राम जी)—के तहत जिले में लागू किया गया है। इस नई योजना में जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को 125 दिन तक रोजगार दिए जाने की गारंटी है। साथ ही, तय समय में भुगतान न होने पर मुआवजे का प्रावधान, पारदर्शिता के लिए जीपीएस ट्रैकिंग और सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्ति और जलवायु संरक्षण को प्रमुखता दी गई है।
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कैसे काम करेंगे जल अवशोषण ट्रेंच?
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए जमीन पर जल अवशोषण ट्रेंच बनाए जाएंगे। ये ट्रेंच एक से दो फीट चौड़े, दो से तीन फीट गहरे और आवश्यकतानुसार लंबाई के होंगे। इनके निर्माण से बारिश के बहते पानी की गति नियंत्रित होगी और उसे जमीन में समाने का पर्याप्त मौका मिलेगा। इससे भूजल रिचार्ज होने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव पर भी रोक लगेगी। विशेषकर ढलान वाले और तेज जल बहाव वाले क्षेत्रों में ये संरचनाएं बेहद उपयोगी साबित होंगी। इसके लिए सभी ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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जल संरक्षण के साथ मिलेगा रोजगार
इस योजना के दोहरे लाभ हैं। एक तरफ जहां जल संरक्षण से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर जॉब कार्ड धारक श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध होगा। ग्राम पंचायतें अपनी जरूरत के अनुसार स्थानों को चिह्नित कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रही हैं।
जनपद में मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर बर्बाद हो जाता है। ट्रेंचिंग के माध्यम से इसी पानी को रोककर जमीन के अंदर सोखने का अवसर दिया जाएगा, जिससे भविष्य में जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। जुलाई में योजना लागू होने के बाद पहले चरण में पौधारोपण के लिए गड्ढे खुदवाए गए थे, और अब जल संरक्षण के लिए ट्रेंच निर्माण की कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है।
— रमेश कुमार यादव, उपायुक्त श्रम रोजगार