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पारीछा पावर प्लांट की यूनिट बंद होने की 11 साल बाद शुरू हुई विजिलेंस जांच
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झांसी। पारीछा थर्मल पावर प्लांट की एक यूनिट के लगातार तीन महीने तक बंद रहने की विजिलेंस जांच 11 साल बाद शुरू हो गई है। सरकार ने इसे बड़ी चूक माना है। इस मामले में विजिलेंस ने प्लांट के तत्कालीन अफसरों से लेकर निचले स्तर तक के कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट की 210 मेगावाट की एक यूनिट दिसंबर 2011 में बंद हो गई थी, जिससे लगातार तीन महीने तक उत्पादन ठप बना रहा था। मार्च 2012 में यूनिट शुरू हो पाई थी। इससे बिजली उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ राजस्व का भी भारी नुकसान हुआ था। हालांकि, तब इस मामले को तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया था। लेकिन, अब 11 साल बाद सरकार ने इसे भारी चूक मानते हुए इसकी विजिलेंस जांच शुरू करा दी है। इसके साथ ही विजिलेंस ने पुरानी फाइलों की परतें खोलना शुरू कर दी हैं। विजिलेंस की ओर से चालीस लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस तत्कालीन चीफ इंजीनियर से लेकर टेक्नीशियन तक को दिए गए हैं। उनसे यूनिट बंद होने की स्पष्ट वजह पूछी गई है।
तय होगी जवाबदेही, होगी कार्रवाई
झांसी। लगातार तीन महीने तक पावर प्लांट की एक यूनिट के बंद रहने को सरकार ने गंभीर चूक माना है। विजिलेंस जांच के जरिये इस मामले में अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक की जवाबदेही तय की जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि, उस समय प्लांट में तैनात कर्मचारियों में से कुछ अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन ये कर्मचारी भी विजिलेंस जांच के दायरे में हैं
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तब पांच यूनिट थीं, अब हैं छह
झांसी। जिस समय पारीछा की एक यूनिट ठप हुई थी, उस समय वहां प्लांट में पांच यूनिट थीं। जबकि, अब छह यूनिट स्थापित हैं। इनमें 110, 210 व 250 मेगावाट की दो-दो यूनिट हैं। प्लांट की उत्पादन क्षमता 1140 मेगावाट है।
यह हैं जांच के मुख्य बिंदु
- तीन महीने तक बंद रहने वाली यूनिट की स्थापना पर कितना खर्च आया था?
- यूनिट बंद रहने से बिजली उत्पादन में कितनी कमी आई थी और राजस्व का कितना नुकसान हुआ था?
- इसके मेंटनेंस से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी किस-किस पर थी?
- यूनिट को दुबारा से शुरू करने पर कितना खर्च आया था?
- यूनिट से सीधे तौर पर जुड़े कर्मचारियों व अधिकारियों ने इसके बंद होने के क्या कारण बताए थे?
- यूनिट के लिए टर्बाइन व अन्य उपकरण की आपूर्ति किन फर्मों ने और किन शर्तों के साथ की थी, इस पर कितना खर्च आया था?
- संबंधित कंपनियों की ओर से बंद होने के क्या कारण बताए गए थे और दुबारा शुरू करने के लिए किस तरह की मदद कंपनियों ने की थी?
- सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी थे और उन पर तब क्या कार्रवाई की थी।
शासन के निर्देश पर पारीछा की एक यूनिट के लगातार तीन महीने तक बंद रहने की जांच की जा रही है। तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
- आलोक कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक - विजिलेंस
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट की 210 मेगावाट की एक यूनिट दिसंबर 2011 में बंद हो गई थी, जिससे लगातार तीन महीने तक उत्पादन ठप बना रहा था। मार्च 2012 में यूनिट शुरू हो पाई थी। इससे बिजली उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ राजस्व का भी भारी नुकसान हुआ था। हालांकि, तब इस मामले को तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया था। लेकिन, अब 11 साल बाद सरकार ने इसे भारी चूक मानते हुए इसकी विजिलेंस जांच शुरू करा दी है। इसके साथ ही विजिलेंस ने पुरानी फाइलों की परतें खोलना शुरू कर दी हैं। विजिलेंस की ओर से चालीस लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस तत्कालीन चीफ इंजीनियर से लेकर टेक्नीशियन तक को दिए गए हैं। उनसे यूनिट बंद होने की स्पष्ट वजह पूछी गई है।
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तय होगी जवाबदेही, होगी कार्रवाई
झांसी। लगातार तीन महीने तक पावर प्लांट की एक यूनिट के बंद रहने को सरकार ने गंभीर चूक माना है। विजिलेंस जांच के जरिये इस मामले में अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक की जवाबदेही तय की जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि, उस समय प्लांट में तैनात कर्मचारियों में से कुछ अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन ये कर्मचारी भी विजिलेंस जांच के दायरे में हैं
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तब पांच यूनिट थीं, अब हैं छह
झांसी। जिस समय पारीछा की एक यूनिट ठप हुई थी, उस समय वहां प्लांट में पांच यूनिट थीं। जबकि, अब छह यूनिट स्थापित हैं। इनमें 110, 210 व 250 मेगावाट की दो-दो यूनिट हैं। प्लांट की उत्पादन क्षमता 1140 मेगावाट है।
यह हैं जांच के मुख्य बिंदु
- तीन महीने तक बंद रहने वाली यूनिट की स्थापना पर कितना खर्च आया था?
- यूनिट बंद रहने से बिजली उत्पादन में कितनी कमी आई थी और राजस्व का कितना नुकसान हुआ था?
- इसके मेंटनेंस से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी किस-किस पर थी?
- यूनिट को दुबारा से शुरू करने पर कितना खर्च आया था?
- यूनिट से सीधे तौर पर जुड़े कर्मचारियों व अधिकारियों ने इसके बंद होने के क्या कारण बताए थे?
- यूनिट के लिए टर्बाइन व अन्य उपकरण की आपूर्ति किन फर्मों ने और किन शर्तों के साथ की थी, इस पर कितना खर्च आया था?
- संबंधित कंपनियों की ओर से बंद होने के क्या कारण बताए गए थे और दुबारा शुरू करने के लिए किस तरह की मदद कंपनियों ने की थी?
- सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी थे और उन पर तब क्या कार्रवाई की थी।
शासन के निर्देश पर पारीछा की एक यूनिट के लगातार तीन महीने तक बंद रहने की जांच की जा रही है। तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
- आलोक कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक - विजिलेंस