फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   True love story after that remove akbar prapossal

पवित्र प्रेम के लिए ठुकरा दिया था अकबर की पटरानी बनने का प्रस्ताव

Fri, 05 Feb 2021 01:38 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2021 01:38 AM IST
विज्ञापन
True love story after that remove akbar prapossal
झांसी। ओरछा की राज नृत्यांगना रायप्रवीण न केवल नृत्यांगना थी बल्कि ओरछा के महाराजा इंद्रजीत सिंह की प्रेमिका भी थीं। वह नृत्यकला में जितनी पारंगत थी, उतनी ही काव्य कला में भी। साहित्य के क्षेत्र में रायप्रवीण महाकवि केशव की शिष्या थीं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में रायप्रवीण का जितना नाम था, उतने ही उनके रूप सौंदर्य के चर्चे भी दूर- दूर तक थे। ओरछा की राज नृत्यांगना के रूप लावण्य की चर्चा बादशाह अकबर तक पहुंची और उन्होंने रायप्रवीण को दिल्ली दरबार बुला भेजा। उनके समक्ष पटरानी बनकर रहने का प्रस्ताव भी रखा पर रायप्रवीण ने महाराजा इंद्रजीत के प्रति अपने पवित्र प्रेम के लिए बादशाह की पटरानी बनने का प्रस्ताव तो ठुकरा ही दिया, साथ ही अकबर को कविता के माध्यम से ऐसा जवाब दिया जिसे सुनकर उन्होंने रायप्रवीण को ससम्मान विदाई देकर उनके प्रेमी इंद्रजीत सिंह के पास ओरछा वापस भेज दिया।
विज्ञापन

सत्रहवीं सदी में अकबर दिल्ली की गद्दी पर सत्तासीन थे, उधर ओरछा में महाराजा इंद्रजीत सिंह। एक शाम ओरछा के राजामहल के ठीक बगल में स्थित दरबारेआम में इंद्रजीत सिंह जनता की समस्याएं सुन रहे थे, कि अचानक चार मुगल घुड़सवार वहां पहुंचे तथा महाराजा से मिलने की इजाजत चाही, आज्ञा मिलते ही उन्होंने अकबर के द्वारा भेजी गई पाती इंद्रजीत के हाथ में थमा दी। पाती पढ़ते ही ओरछा के महाराजा के माथे पर बल पड़ गए, लिखा था पत्र पाते ही रायप्रवीण को दिल्ली दरबार भेज दिया जाए। इंद्रजीत सिंह के लिए रायप्रवीण महज एक नृत्यांगना नहीं थी, वह उनकी प्रेयसी भी थीं। पर, इंद्रजीत सिंह ने न तो रायप्रवीण को दिल्ली भेजा और न ही पाती का कोई जवाब दिया। इस नाफरमानी से बादशाह अकबर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, उन्होंने ओरछा राज्य की मनसबदारी (आर्थिक मदद) बंद करने के साथ ही दूसरा पत्र भेजा, जिसमें लिखा था इसके बाद भी रायप्रवीण को बादशाह के दरबार में न भेजा गया तो ओरछा राज्य मुगल सेना से युद्ध के लिए तैयार रहे। शाम ढल चुकी थी, रोज की तरह महाराजा इंद्रजीत सिंह किले के बगल में ही स्थित रायप्रवीण के महल में बैठे थे, पर आज रास रंग नहीं चल रहा था, भादों की काली रात के सन्नाटे को चीरतीं कुछ भयावह सी आवाजें आ रहीं थीं। महाकवि केशव को भी बुलाया गया। तीनों के बीच मंत्रणा हुई।
विज्ञापन

रायप्रवीण ने काव्यमय अंदाज में कहा, स्वारथ और परमारथ को चित्त विचार करो तुम सोई, जामे में रहे प्रभु की प्रभुता और मोर पतिव्रत भंग न हुई, इसका अर्थ था हे महाराज ऐसा कार्य करिए जिससे आपके प्रभुत्व पर आंच न आए और मेरा आपके प्रति जो पतिव्रत धर्म है वह भी भंग न हो। महाकवि केशव ने कहा कि वह रायप्रवीण के साथ दिल्ली दरबार जाएंगे, उन्हें पूरा भरोसा है कि वह अपनी काव्य कला से अकबर को लाजवाब कर देंगी। रायप्रवीण को लेकर महाकवि केशव बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचे। रूप सौंदर्य को देखकर अकबर मुग्ध हो गए, उन्होंने रायप्रवीण के समक्ष प्रस्ताव रखा आप चाहें तो मेरे हरम में पटरानी बनकर रहें और आप चाहें तो नवरत्न बनकर। रायप्रवीण ने अदब के साथ बादशाह से कहा जिल्लेइलाही आप इस मुल्क के सरताज हैं, आपका हुक्म ही अंतिम सत्य है, पर इसके पहले कि आप कोई निर्णय लें मेरी छोटी से विनती जरूर सुन लें। रायप्रवीण ने अकबर के दरबार में एक दोहा पेश किया, विनती रायप्रवीण की सुनिए शाह सुजान, जूठी पातर भकत हैं वारी, वायस, श्वान। दरबार में सन्नाटा छा गया। रायप्रवीण ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा हुजूर मेरा रोम रोम महाराजा इंद्रजीत सिंह के स्पर्श से जूठा हो चुका है, मैं तो जूठी पत्तल के समान हूं, हमारे बुंदेलखंड में जूठी पत्तल को वारी जाति का व्यक्ति जो पत्तलें फेंकता है वह और कौआ और कुत्ता खाते हैं, अगर आप जूठी पत्तल को खाना चाहते हैं तो मुझे यह जरूर बताएं कि इन तीन में से आप कौैन हैं। कुछ देर लगा अब रायप्रवीण को मृत्युदंड तय है, पर बादशाह ओरछा की राजनृतकी के सात्विक प्रेम की पराकाष्ठा से इस कदर प्रभावित हुआ कि उसने न केवल ओरछा की मनसबदारी यथावत कर दी बल्कि रायप्रवीण और महाकवि केशव को हीरे जवाहरात भेंटकर ओरछा के लिए ससम्मान रवाना किया। इस तरह ओरछा के महाराजा इंद्रजीत सिंह और रायप्रवीण का प्रेम अमर हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रायप्रवीण की प्रेम की पराकाष्ठा बताती है कि भौतिक सुखों से कई गुना ऊपर है पवित्र प्रेम
घनश्याम बाथम
पुरातत्व अधिकारी ओरछा
रायप्रवीण की प्रेमगाथा बुंदेलखंड की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में एक है।
हेमंत गोस्वामी
गाइड ओरछा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed