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Jhansi News: फाइलों में दबकर घुट गया विजिलेंस की जांच रिपोर्ट का दम
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी /आगरा। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अवर अभियंता पद से बर्खास्त चल रहे अम्बरीश गौतम की संदिग्ध हालात में मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए। उन्होंने विश्वविद्यालय में 200 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत विजिलेंस से की गई थी। विजिलेंस ने जांच के बाद दो साल पहले शासन को रिपोर्ट भेज दी, लेकिन जांच में क्या सामने आया, इतने साल बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, आज तक पता नहीं चल सका। शिकायत भी फाइलों में दबकर रह गई।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को करोड़ों रुपये की वित्तीय मदद शासन से मुहैया कराई जाती है, लेकिन अपनी चहेती फर्मों के फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से यह पैसा खर्च किया गया। अम्बरीश ने तमाम कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसमेें उन्होंने बताया था कि एक लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए टेंडर कराना आवश्यक होता है, लेकिन विश्वविद्यालय में तमाम सारे काम बिना टेंडर के अपनी मनचाही फार्मों के बीच बांट दिए जाते हैं। गुपचुप तरीके से भुगतान भी कर दिया जाता है। विश्वविद्यालय में निर्माण एजेंसियों के चयन में भी जमकर मनमानी हुई। सरकारी पैनल में पंजीकृत एजेंसियों की जगह करोड़ों रुपये के काम रेवड़ी की तरह अपनी चहेती फर्म को बांटे गए। इसके सबूत भी विजिलेंस को अम्बरीश ने मुहैया कराए। विश्वविद्यालय में सुंदरीकरण के नाम पर 10 करोड़ रुपये से अधिक अनियमित तरीके से खर्च किए गए। ग्लोसाइन बोर्ड एवं साइनेज के काम के लिए 1.26 करोड़ का भुगतान हुआ जबकि भवन निर्माण समिति ने सिर्फ 50 लाख ही स्वीकृत किए थे। इसके बावजूद 76.74 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ।
कई अन्य भुगतान भी मनमाने तरीके से किए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन के कई अधिकारियों के रिश्तेदारों की फर्म को भी करोड़ों रुपये का भुगतान का आरोप है। इनमें से कई मामलों की शिकायत अम्बरीश ने की थी। विजिलेंस ने जांच करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी लेकिन, जांच रिपोर्ट का आज तक कुछ पता नहीं चल सका।
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इस संबंध में मिली शिकायत की जांच करके रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी। शासन के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।- आलोक शर्मा एसपी विजिलेंस
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झांसी /आगरा। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अवर अभियंता पद से बर्खास्त चल रहे अम्बरीश गौतम की संदिग्ध हालात में मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए। उन्होंने विश्वविद्यालय में 200 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत विजिलेंस से की गई थी। विजिलेंस ने जांच के बाद दो साल पहले शासन को रिपोर्ट भेज दी, लेकिन जांच में क्या सामने आया, इतने साल बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, आज तक पता नहीं चल सका। शिकायत भी फाइलों में दबकर रह गई।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को करोड़ों रुपये की वित्तीय मदद शासन से मुहैया कराई जाती है, लेकिन अपनी चहेती फर्मों के फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से यह पैसा खर्च किया गया। अम्बरीश ने तमाम कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसमेें उन्होंने बताया था कि एक लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए टेंडर कराना आवश्यक होता है, लेकिन विश्वविद्यालय में तमाम सारे काम बिना टेंडर के अपनी मनचाही फार्मों के बीच बांट दिए जाते हैं। गुपचुप तरीके से भुगतान भी कर दिया जाता है। विश्वविद्यालय में निर्माण एजेंसियों के चयन में भी जमकर मनमानी हुई। सरकारी पैनल में पंजीकृत एजेंसियों की जगह करोड़ों रुपये के काम रेवड़ी की तरह अपनी चहेती फर्म को बांटे गए। इसके सबूत भी विजिलेंस को अम्बरीश ने मुहैया कराए। विश्वविद्यालय में सुंदरीकरण के नाम पर 10 करोड़ रुपये से अधिक अनियमित तरीके से खर्च किए गए। ग्लोसाइन बोर्ड एवं साइनेज के काम के लिए 1.26 करोड़ का भुगतान हुआ जबकि भवन निर्माण समिति ने सिर्फ 50 लाख ही स्वीकृत किए थे। इसके बावजूद 76.74 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ।
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कई अन्य भुगतान भी मनमाने तरीके से किए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन के कई अधिकारियों के रिश्तेदारों की फर्म को भी करोड़ों रुपये का भुगतान का आरोप है। इनमें से कई मामलों की शिकायत अम्बरीश ने की थी। विजिलेंस ने जांच करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी लेकिन, जांच रिपोर्ट का आज तक कुछ पता नहीं चल सका।
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इस संबंध में मिली शिकायत की जांच करके रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी। शासन के निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।- आलोक शर्मा एसपी विजिलेंस