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Jhansi News: कारसेवकों पर हर वक्त मंडराता रहता था गिरफ्तारी का खतरा

Fri, 05 Jan 2024 01:56 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jan 2024 01:56 AM IST
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The threat of arrest always loomed over kar sevaks
झांसी। राममंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर हर वक्त गिरफ्तारी का खतरा बना रहता था। पुलिस ने सभी कारसेवकों को सूचीबद्ध कर रखा था और उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती थी। आए दिन कारसेवकों के घरों पर पुलिस की टीमें दबिश देती रहती थीं। पुलिस से बचने के लिए अक्सर कारसेवकों को पड़ोसियों का सहारा लेना पड़ जाता था। अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना की तिथि नजदीक आने के साथ-साथ राम मंदिर आंदोलन के दौरान सक्रिय रहने वालों की आंखों में आंदोलन की यादें तरोताजा होती जा रहीं हैं।
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राम मंदिर आंदोलन के दौरान झांसी में कारसेवकों का एक बड़ा कुनबा तैयार हो गया था। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि तब पुलिस ने जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 9,253 सक्रिय कारसेवकों को चिह्नित कर रखा था। इन कारसेवकों की हर गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर रहती थी। पुलिस की खुफिया शाखा भी इनकी टोह लेती रहती थी। आंदोलन के दरम्यान ढाई हजार से अधिक कारसेवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था और इन्हें तीन दिन से लेकर डेढ़ महीने तक जेल में रखा गया था। बाकी कारसेवकों पर भी हर समय गिरफ्तारी का खतरा बना रहता था। जबकि, आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं की ओर से उन्हें गिरफ्तारी से बचने के निर्देश दिए गए थे, ताकि आंदोलन की धार कमजोर न पड़ने पाए। ऐसे में तमाम कारसेवक पुलिस से बचने के लिए अपने घरों में नहीं सोते थे। घर में मौजूद होने की स्थिति में अचानक पुलिस के पहुंचने पर वे पड़ोसियों के यहां कूद जाते थे। इसे लेकर उन्होंने पहले से ही पड़ोसियों को सचेत कर रखा था और पुलिस के पहुंचने पर घर से निकलने के अपने खुफिया रास्ते भी बना रखे थे।
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जुर्म बताए बगैर कर लिया जाता था गिरफ्तार
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे जिला शासकीय अधिवक्ता मृदुलकांत श्रीवास्तव ने बताया कि आंदोलन के दौरान पुलिस दमनकारी नीति अपनाए हुए थी। कारसेवकों को जुर्म बताए बगैर ही गिरफ्तार कर लिया जाता था। इसके अलावा यह भी नहीं बताया जाता था कि उन्हें ले जाया कहां जा रहा है। अक्सर पुलिस कारसेवकों की गिरफ्तारी कर उन्हें दूसरे जनपदों में बनाई गईं अस्थायी जेलों में भेज देती थी। हालांकि, जेल से छूटने के बाद कारसेवक एक बार फिर आंदोलन में सक्रिय हो जाते थे। उन्होंने कहा कि उस वक्त का जुनून ही अलग था।
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पुलिस भविष्य बर्बाद होने की देती थी चेतावनी
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे वरिष्ठ अधिवक्ता उदय सोनी ने बताया कि पुलिस कारसेवकों को आंदोलन से दूर करने के तमाम प्रयास करती थी। परिवार के लोगों को पुलिस युवा कारसेवकों को आंदोलन से दूर रखने की चेतावनी देती थी। पुलिस डराती दिखाती थी कि मुकदमा दर्ज होने और जेल जाने से भविष्य खराब हो जाएगा। इसके बाद कभी नौकरी नहीं लग पाएगी। लेकिन, उस दौर में राम मंदिर आंदोलन के प्रति लोगों के जज्बात ही अलग थे। न कारसेवक पीछे हटते थे और न ही उनके परिवार के लोग। सभी राम का काज मानकर आंदोलन में सक्रिय रहते थे। अधिवक्ता ने बताया कि आंदोलन के दौरान उन्हें खुद जेल जाना पड़ा था।
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