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Jhansi News: एरच नगरी पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे मध्यकालीन युग के शासक
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एरच। पौराणिक और प्राचीन महत्व के साथ ही मध्यकाल मे एरच अपने बैभव पर था। उस समय विविध ताकतवर राजाओं ने इस पर अधिकार करने के लिए संघर्ष किया है। इतिहासकार डाॅ. चित्रगुप्त बताते हैं कि मध्यकाल से पूर्व एरच नगर महोबा के चंदेल वंश के अंतर्गत था। चंदेल राजाओ ने इसे प्रांत की मान्यता दी थी। चंदेल राजाओं में यशोवर्मन जैसे श्रेष्ठ राजाओं का समय भी एरच नगर ने देखा है। उन दिनों गड़कुडार पर चंदेलों के प्रांतपति रहा करते थे। एरच नगर को प्रशासनिक नगर के रूप में उपयोग किया जाता था।
अलाउद्वीन खिलजी के समय में उसके एक सूबेदार ने चंदेरी से ही शासन करना शुरू किया और उसने एरच पर अधिकार करना चाहा लेकिन इस क्षेत्र के योद्धाओं ने उसे प्रभाव नहीं जमाने दिया, तब खिलजी ने एरच पर अधिकार के लिए अपने बेटे खिज खां के नेतृत्व में एक बड़ी सेना दक्षिण की ओर भेजी, जो एरच भी पहुंच गई। इतनी बड़ी सेना ने एरच और गढ़कुडार पर अपना अधिकार जमा लिया। यह सेना झांसी, सागर होते हुए दक्षिण की ओर निकल गई। इस अभियान के बाद दिल्ली सल्तनत के अधीन एरच हो गया था।
मध्यकाल में यहां पर जामा मस्जिद नाम से एक बड़ी मस्जिद स्थापित की गई जो वर्तमान समय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित इमारत है। नगर अति प्राचीन है, यहां पर बारह, बामन, नरसिंह भगवान ने अवतार लिया था। एरच जो कि पौराणिक गाथाओं के लिए जाना जाता है, यहां पर कभी होलिकाष्ट नहीं लगता है। इस मौके पर संत उमेशदत्त शाडिल्य, सर्वेश पटेल, भारत सिंह सेंगर पूर्व प्रधानाध्यापक, रघुवीरशरण सहाय ने बताया कि एरच का इतिहास गौरवशाली रहा है।
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अलाउद्वीन खिलजी के समय में उसके एक सूबेदार ने चंदेरी से ही शासन करना शुरू किया और उसने एरच पर अधिकार करना चाहा लेकिन इस क्षेत्र के योद्धाओं ने उसे प्रभाव नहीं जमाने दिया, तब खिलजी ने एरच पर अधिकार के लिए अपने बेटे खिज खां के नेतृत्व में एक बड़ी सेना दक्षिण की ओर भेजी, जो एरच भी पहुंच गई। इतनी बड़ी सेना ने एरच और गढ़कुडार पर अपना अधिकार जमा लिया। यह सेना झांसी, सागर होते हुए दक्षिण की ओर निकल गई। इस अभियान के बाद दिल्ली सल्तनत के अधीन एरच हो गया था।
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मध्यकाल में यहां पर जामा मस्जिद नाम से एक बड़ी मस्जिद स्थापित की गई जो वर्तमान समय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित इमारत है। नगर अति प्राचीन है, यहां पर बारह, बामन, नरसिंह भगवान ने अवतार लिया था। एरच जो कि पौराणिक गाथाओं के लिए जाना जाता है, यहां पर कभी होलिकाष्ट नहीं लगता है। इस मौके पर संत उमेशदत्त शाडिल्य, सर्वेश पटेल, भारत सिंह सेंगर पूर्व प्रधानाध्यापक, रघुवीरशरण सहाय ने बताया कि एरच का इतिहास गौरवशाली रहा है।
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