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Jhansi News: परिषदीय विद्यालयों में साल दर साल घट रहे बच्चे

Mon, 15 Jul 2024 03:37 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2024 03:37 AM IST
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The number of children in council schools is decreasing year by year.
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। पानी की तरह पैसे बहाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। पिछले तीन साल के आंकड़े बताते हैं कि एक से आठवीं तक की कक्षाओं में चालीस हजार बच्चे कम हो गए।
बेसिक शिक्षा परिषद का महानगर से गांवों तक जाल है। कुल 1,452 विद्यालयों में 6,892 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षामित्र और अनुदेशक अलग से हैं। ज्यादा से ज्यादा बच्चे इन विद्यालयों में आएं, इसके लिए सरकार की ओर से तमाम सहूलियतें दी जाती हैं। फिर भी बच्चों की संख्या बढ़ने की जगह कम होती जा रही है। साल 2022-23 में बेसिक स्कूलों की कक्षा एक से आठवीं तक में 1,56,299 बच्चे पंजीकृत थे। जबकि, 2023-24 में यह संख्या घटकर 1,42,320 रह गई थी। हाल में शुरू हुए शिक्षण सत्र में इसमें और भी कमी देखने को मिल रही है। बच्चों के नामांकन के लिए एक जुलाई से स्कूल चलो अभियान शुरू किया गया था। 15 जुलाई तक स्कूलों में बच्चों के दाखिल किए जाने थे, इसमें एक ही दिन शेष है और 1,15,810 बच्चों का ही पंजीकरण हो सका है। अभियान के आखिरी दिन सोमवार को भी बच्चों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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बेसिक स्कूलों में बच्चों को यह मिलती हैं सहूलियतें
- पठन-पाठन की व्यवस्था नि:शुल्क होती है।
- मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
- नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं।
- दो जोड़ी यूनिफार्म, जूते और बैग खरीदने के लिए अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये भेजे जाते हैं।
- विद्यालयों का कायाकल्प कर स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
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अभिभावक बदलें धारणा, कम उम्र में हो प्रवेश
बेसिक स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या के संबंध में पूर्व शिक्षाधिकारी बीपी दोहरे का कहना है कि ज्यादातर अभिभावकों में आम धारणा है कि सरकारी के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है। वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में न पढ़ाकर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना बेहतर समझते हैं। अभिभावकों को यह धारणा बदलनी होगी। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रसकेंद्र गौतम का कहना है कि बेसिक स्कूलों में छह साल से कम आयु के बच्चों के प्रवेश नहीं होते हैं, जबकि निजी स्कूल तीन वर्ष के बच्चों के प्रवेश ले लेते हैं। एक बार बच्चा निजी स्कूल में पहुंच जाता है, तो वह बेसिक की ओर नहीं लौटता। इसमें बदलाव की जरूरत है।
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शिक्षकों की ओर से नामांकन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। घर-घर अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। अभिभावकों को स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा बच्चे बेसिक स्कूलों में पढ़ें, विभाग की ओर से इसके पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। - विपुल शिव सागर, बीएसए
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