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Jhansi News: जिला अस्पताल की इमरजेंसी दूसरी बिल्डिंग में होगी शिफ्ट
Sat, 11 Jul 2026 02:26 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:26 AM IST
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झांसी। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले रोगियों के लिए सीढि़यां अथवा स्लोप पर चढ़ना काफी मुश्किल होता है। अधिकांश रोगियों की सांसें फूल जाती है या तेजी से जी घबराने लगता है। यदि रोगी एंबुलेंस से आता है, तो उसे स्ट्रेचर से इमरजेंसी कक्षा तक पहुंचाने में कर्मियों की सांसें फूल जाती है। इसके चलते अब अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी शिफ्ट करने की तैयारी में जुट गया है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी वर्षों से ओपीडी बिल्डिंग के भूतल पर चलती थी, जहां रोगियों और एंबुलेंस का आना-जाना सुगम था। तत्कालीन एसआईसी डॉ. प्रमोद कटियार ने जगह कम होने का तर्क देते हुए इमरजेंसी को बर्न यूनिट के बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया। यहां इमरजेंसी के लिए पर्याप्त जगह तो है मगर उपचार के लिए कक्ष तक पहुंचना रोगी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसकी वजह इमरजेंसी में आने वाले रोगियों की हालत खराब होती है, ऐसे में यदि रोगी सीढ़ी अथवा स्लैब से कक्ष तक पहुंचता है, तो उसकी सांस उखड़ जाती है। कई रोगियों का जी घबराने लगते हैं। यदि एबुलेंस अथवा निजी वाहन से रोगी आता है, तो उसे स्ट्रेचर से उपचार कक्ष तक पहुंचाना परिजनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन समस्याओं के चलते अब अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी को दूसरी जगह शिफ्ट करने का मन बना लिया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जिला अस्पताल में कैंसर रोगियों के लिए बने डे-केयर सेंटर की बिल्डिंग में इमरजेंसी शिफ्ट करने की योजना है। वहीं, डे-केयर सेंटर को वर्तमान इमरजेंसी कक्ष में शिफ्ट किया जा सकता है।
एसआईसी डॉ. आरके सक्सेना का कहना है कि वर्तमान इमरजेंसी के उपचार कक्ष तक पहुंचना रोगी के लिए अथवा परिजनों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। इमरजेंसी के उपचार कक्ष तक पहुंचना का रास्ता सुगम होना चाहिए। इसलिए इमरजेंसी को शिफ्ट करने की योजना बनाई है।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी वर्षों से ओपीडी बिल्डिंग के भूतल पर चलती थी, जहां रोगियों और एंबुलेंस का आना-जाना सुगम था। तत्कालीन एसआईसी डॉ. प्रमोद कटियार ने जगह कम होने का तर्क देते हुए इमरजेंसी को बर्न यूनिट के बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया। यहां इमरजेंसी के लिए पर्याप्त जगह तो है मगर उपचार के लिए कक्ष तक पहुंचना रोगी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसकी वजह इमरजेंसी में आने वाले रोगियों की हालत खराब होती है, ऐसे में यदि रोगी सीढ़ी अथवा स्लैब से कक्ष तक पहुंचता है, तो उसकी सांस उखड़ जाती है। कई रोगियों का जी घबराने लगते हैं। यदि एबुलेंस अथवा निजी वाहन से रोगी आता है, तो उसे स्ट्रेचर से उपचार कक्ष तक पहुंचाना परिजनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन समस्याओं के चलते अब अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी को दूसरी जगह शिफ्ट करने का मन बना लिया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जिला अस्पताल में कैंसर रोगियों के लिए बने डे-केयर सेंटर की बिल्डिंग में इमरजेंसी शिफ्ट करने की योजना है। वहीं, डे-केयर सेंटर को वर्तमान इमरजेंसी कक्ष में शिफ्ट किया जा सकता है।
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एसआईसी डॉ. आरके सक्सेना का कहना है कि वर्तमान इमरजेंसी के उपचार कक्ष तक पहुंचना रोगी के लिए अथवा परिजनों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। इमरजेंसी के उपचार कक्ष तक पहुंचना का रास्ता सुगम होना चाहिए। इसलिए इमरजेंसी को शिफ्ट करने की योजना बनाई है।
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