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बदहाली को खुशहाली में बदलेंगे आम, अमरूद, बेर
झांसी/ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:44 AM IST
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झांसी। लगातार प्रकृति की मार से जूझ रहे जनपद के किसानों ने पारंपरिक गेहूं, चना और सरसों के साथ आम और अमरूद के फलों की खेती करना भी शुरू कर दिया है। शासन द्वारा चलाई जा रही औद्यानिक खेती की योजना का लाभ लेते हुए 106 किसानों ने 106 हेक्टेयर भूमि में उद्यान लगाया है।
औद्यानिक खेती के लिए शासन किसानों को प्रति किसान तीन-तीन हजार रुपये प्रति माह रखरखाव हेतु दे रहा है। वहीं, किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए उद्यान विभाग ने बेर को हथियार बनाया है। बटिंग कर तैयार की गई बेर की नई नस्ल से जिले के करीब 600 किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
जनपद में परंपरागत तिलहन, दलहन व खाद्यान्न की फसलें ही होती हैं। पिछले तीन सालों में कभी बेमौसम बारिश, कभी सूखा और कभी ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूट सी गई है। बर्बादी का आलम यह है कि सदमे के कारण जिले में चार दर्जन से अधिक किसान अपनी जान जे चुके हैं।
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बुंदेली किसानों को इस भयावह स्थिति से उबारने के लिए शासन ने औद्यानिक खेती की योजना बनाई है। जिले में मार्च 2016 तक 250 हेक्टेयर भूमि में उद्यान रोपित कराने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 106 हेक्टेयर भूमि में उद्यान लगाए जा चुके हैं।
बुंदेलखंड में बेर की खेती की परंपरा नहीं है। लेकिन उद्यान विभाग ने इस बेर को भी किसानों की आर्थिक स्थिति संवारने का हथियार बनाया है। जिले के छह सौ किसानों ने करीब 103 हेक्टेयर में 11485 बेर के पौधे लगा लिए हैं। शासन द्वारा भी बेर लगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अब तक इन किसानों के लिए 80,800 रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिए जा चुके हैं। बेर के पारंपरिक पेड़ से ही कलमें तैयार कर उसे विकसित किया जाता है, जिसमें तेंदू साइज के बेर उग रहे हैं। यह बेर बाजार में अच्छी कीमत में बिकते हैं।
उद्यान अधीक्षक नारायण बाग डा. डीएस यादव ने बताया कि एक किसान को सिर्फ एक हेक्टेयर में उद्यान लगवाया जा रहा है। शासन ने 250 के लक्ष्य के सापेक्ष छह माह का अनुदान 48 लाख रुपये जारी कर दिया है। खेतों में अमरूद, नीबू, किन्नो (संतरा), आम, जामुन, आंवला आदि के पौधों का रोपण कराया जा रहा है। उद्यान लगाने से किसानों को नियमित आय होती रहेगी।
इस दर पर उपलब्ध हैं फलदार पौधे
पौध दर
---- -----
अमरूद 24
नीबू 18
किन्नो (संतरा) 18
आम 30
जामुन 06
उन्नत जामुन 30
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औद्यानिक खेती के लिए शासन किसानों को प्रति किसान तीन-तीन हजार रुपये प्रति माह रखरखाव हेतु दे रहा है। वहीं, किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए उद्यान विभाग ने बेर को हथियार बनाया है। बटिंग कर तैयार की गई बेर की नई नस्ल से जिले के करीब 600 किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
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जनपद में परंपरागत तिलहन, दलहन व खाद्यान्न की फसलें ही होती हैं। पिछले तीन सालों में कभी बेमौसम बारिश, कभी सूखा और कभी ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूट सी गई है। बर्बादी का आलम यह है कि सदमे के कारण जिले में चार दर्जन से अधिक किसान अपनी जान जे चुके हैं।
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बुंदेली किसानों को इस भयावह स्थिति से उबारने के लिए शासन ने औद्यानिक खेती की योजना बनाई है। जिले में मार्च 2016 तक 250 हेक्टेयर भूमि में उद्यान रोपित कराने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 106 हेक्टेयर भूमि में उद्यान लगाए जा चुके हैं।
बुंदेलखंड में बेर की खेती की परंपरा नहीं है। लेकिन उद्यान विभाग ने इस बेर को भी किसानों की आर्थिक स्थिति संवारने का हथियार बनाया है। जिले के छह सौ किसानों ने करीब 103 हेक्टेयर में 11485 बेर के पौधे लगा लिए हैं। शासन द्वारा भी बेर लगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अब तक इन किसानों के लिए 80,800 रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिए जा चुके हैं। बेर के पारंपरिक पेड़ से ही कलमें तैयार कर उसे विकसित किया जाता है, जिसमें तेंदू साइज के बेर उग रहे हैं। यह बेर बाजार में अच्छी कीमत में बिकते हैं।
उद्यान अधीक्षक नारायण बाग डा. डीएस यादव ने बताया कि एक किसान को सिर्फ एक हेक्टेयर में उद्यान लगवाया जा रहा है। शासन ने 250 के लक्ष्य के सापेक्ष छह माह का अनुदान 48 लाख रुपये जारी कर दिया है। खेतों में अमरूद, नीबू, किन्नो (संतरा), आम, जामुन, आंवला आदि के पौधों का रोपण कराया जा रहा है। उद्यान लगाने से किसानों को नियमित आय होती रहेगी।
इस दर पर उपलब्ध हैं फलदार पौधे
पौध दर
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अमरूद 24
नीबू 18
किन्नो (संतरा) 18
आम 30
जामुन 06
उन्नत जामुन 30