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बजट के फेर में फंसा आई बैंक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Dec 2016 01:20 AM IST
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- फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आई बैंक के प्रस्ताव पर मुहर लगे छह माह हो चुके हैं, लेकिन अब तक प्रदेश सरकार ने बजट जारी नहीं किया है। इससे आई बैंक का निर्माण रुका हुआ है। आई बैंक बनाने में 65 लाख रुपये खर्च होंगे।
मेडिकल कॉलेज का नेत्र विभाग पिछले चार-पांच सालों से आई बैंक खोलने के प्रयास कर रहा था। करीब छह माह पूर्व कॉलेज प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में शासन से आई बैंक के लिए 65 लाख रुपये की मांग की गई। शासन ने भी इस पर मुहर भी लगा दी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में पहली आई बैंक खुलने का रास्ता साफ हो गया लेकिन, अब तक शासन की ओर से बजट के रूप में एक रुपये तक जारी नहीं किया गया है। आई बैंक नेत्र विभाग के ऊपर खुलना है।
बजट से खरीदी जाएंगी मशीनें
मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि शासन की ओर से जब बजट भेजा जाएगा, तो आई बैंक के लिए जरूरी मशीनों की खरीद की जाएगी। इसमें नेत्रदान के पूर्व आंखों के सेल की जांच करने के लिए स्टेकुलर माइक्रोस्कोप, ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल में आने वाला ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, स्टोरेज मशीन आदि शामिल हैं।
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रिसर्च में भी मिलेगी मदद
मेडिकल कॉलेज में एमएस की तीन सीटें हैं। तीन साल का कोर्स होने से नौ मेडिकल सर्जन के छात्र होते हैं। अब तक ऑपरेशन थिएटर में होने वाले ऑपरेशन के जरिए यह प्रशिक्षित होते हैं। मगर आई बैंक खुलने से एमएस छात्रों को रिसर्च में काफी मदद मिलेगी। नेत्रदान करने वालों मेें जिनकी आंखों की सेल तीन हजार प्रति स्क्वैर मीटर से कम होगी, उन्हें प्रत्यारोपण में इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसलिए इन पर मेडिकल स्टूडेंट रिसर्च कर सकेंगे।
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मेडिकल कॉलेज का नेत्र विभाग पिछले चार-पांच सालों से आई बैंक खोलने के प्रयास कर रहा था। करीब छह माह पूर्व कॉलेज प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में शासन से आई बैंक के लिए 65 लाख रुपये की मांग की गई। शासन ने भी इस पर मुहर भी लगा दी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में पहली आई बैंक खुलने का रास्ता साफ हो गया लेकिन, अब तक शासन की ओर से बजट के रूप में एक रुपये तक जारी नहीं किया गया है। आई बैंक नेत्र विभाग के ऊपर खुलना है।
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बजट से खरीदी जाएंगी मशीनें
मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि शासन की ओर से जब बजट भेजा जाएगा, तो आई बैंक के लिए जरूरी मशीनों की खरीद की जाएगी। इसमें नेत्रदान के पूर्व आंखों के सेल की जांच करने के लिए स्टेकुलर माइक्रोस्कोप, ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल में आने वाला ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, स्टोरेज मशीन आदि शामिल हैं।
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रिसर्च में भी मिलेगी मदद
मेडिकल कॉलेज में एमएस की तीन सीटें हैं। तीन साल का कोर्स होने से नौ मेडिकल सर्जन के छात्र होते हैं। अब तक ऑपरेशन थिएटर में होने वाले ऑपरेशन के जरिए यह प्रशिक्षित होते हैं। मगर आई बैंक खुलने से एमएस छात्रों को रिसर्च में काफी मदद मिलेगी। नेत्रदान करने वालों मेें जिनकी आंखों की सेल तीन हजार प्रति स्क्वैर मीटर से कम होगी, उन्हें प्रत्यारोपण में इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसलिए इन पर मेडिकल स्टूडेंट रिसर्च कर सकेंगे।