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एक तिहाई से ज्यादा तालाब रहेंगे खाली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2016 12:21 AM IST
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तालाब
- फोटो : demopic
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झांसी। बेतवा नदी से जुड़े बांधों में पानी की कमी के कारण इस बार जनपद के एक तिहाई से ज्यादा तालाब नहीं भर पाएंगे। सिर्फ सौ तालाबों को ही भरा जा सकेगा। ऐसे में गांवों में पानी का और संकट गहराना तय है।
माताटीला बांध से होकर आने वाले पानी को ढुकुवां व पारीछा बांध की मदद से बेतवा नदी से जुड़ी नहरों में छोड़ा जाता है। इस बार रबी की फसल के लिए नहरों का संचालन रोस्टर से अधिक हुआ। इस कारण माताटीला बांध में पानी की कमी हो गई है। दस दिन नहरें चलाने के लिए ही पानी बचा है। ऐसे में सिंचाई विभाग की चिंता बढ़ गई है।
आमतौर पर गर्मियों में जनपद के 166 तालाब व पोखर भरे जाते हैं। पानी की कमी के कारण अब नहर के पास स्थित 100 तालाब व पोखरों को ही भरा जा सकेगा। इससे छूटे तालाबों से जुड़े जानवरों के समक्ष पेयजल संकट गहराना तय है। इतना ही नहीं, संबंधित क्षेत्र के लोगों को पलायन के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है। सिंचाई विभाग ने इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है। ज्ञात हो कि मई माह के पहले सप्ताह में तालाब व पोखर भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है।
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बांधों में यह है जलस्तर की स्थिति
माताटीला बांध में वर्तमान जलस्तर 302.12 मिलियन घन मीटर, ढुकुवां बांध में 262.22 मिलियन घन मीटर, पारीछा बांध में194.40 मिलियन घन मीटर, डोंगरी बांध में 266 मिलियन घन मीटर, पहूज बांध में 230.70 मिलियन घन मीटर, खपरार बांध में 267 मिलियन घन मीटर, सपरार बांध में 217.41 मिलियन घन मीटर, पहाड़ी बांध में 190.50 मिलियन घन मीटर, लहचूरा बांध में 178.61 मिलियन घन मीटर व बड़वार झील में 181.31 मिलियन घन मीटर है। इनमें ढुकुवां बांध, डोंगरी बांध, खपरार बांध, लहचूरा बांध में उपयोगी पानी खत्म हो चुका है। जबकि माताटीला, पारीछा, पहूज व बड़वार झील में पीने के लिए पानी सुरक्षित है।
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माताटीला बांध से होकर आने वाले पानी को ढुकुवां व पारीछा बांध की मदद से बेतवा नदी से जुड़ी नहरों में छोड़ा जाता है। इस बार रबी की फसल के लिए नहरों का संचालन रोस्टर से अधिक हुआ। इस कारण माताटीला बांध में पानी की कमी हो गई है। दस दिन नहरें चलाने के लिए ही पानी बचा है। ऐसे में सिंचाई विभाग की चिंता बढ़ गई है।
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आमतौर पर गर्मियों में जनपद के 166 तालाब व पोखर भरे जाते हैं। पानी की कमी के कारण अब नहर के पास स्थित 100 तालाब व पोखरों को ही भरा जा सकेगा। इससे छूटे तालाबों से जुड़े जानवरों के समक्ष पेयजल संकट गहराना तय है। इतना ही नहीं, संबंधित क्षेत्र के लोगों को पलायन के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है। सिंचाई विभाग ने इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है। ज्ञात हो कि मई माह के पहले सप्ताह में तालाब व पोखर भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है।
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बांधों में यह है जलस्तर की स्थिति
माताटीला बांध में वर्तमान जलस्तर 302.12 मिलियन घन मीटर, ढुकुवां बांध में 262.22 मिलियन घन मीटर, पारीछा बांध में194.40 मिलियन घन मीटर, डोंगरी बांध में 266 मिलियन घन मीटर, पहूज बांध में 230.70 मिलियन घन मीटर, खपरार बांध में 267 मिलियन घन मीटर, सपरार बांध में 217.41 मिलियन घन मीटर, पहाड़ी बांध में 190.50 मिलियन घन मीटर, लहचूरा बांध में 178.61 मिलियन घन मीटर व बड़वार झील में 181.31 मिलियन घन मीटर है। इनमें ढुकुवां बांध, डोंगरी बांध, खपरार बांध, लहचूरा बांध में उपयोगी पानी खत्म हो चुका है। जबकि माताटीला, पारीछा, पहूज व बड़वार झील में पीने के लिए पानी सुरक्षित है।