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छात्र करेंगे ऑनस्क्रीन डिसेक्शन

Wed, 06 Apr 2016 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 06 Apr 2016 02:18 AM IST
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student will online discussion
bundelkhand university, jhansi hindi news - फोटो : demo
प्रशांत शर्मा
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में जूलॉजी के प्रैक्टिकल में अब जानवरों का वर्चुअल डिसेक्शन (आभासी विच्छेदन) कराया जाएगा, इसके लिए वर्चुअल डिसेक्शन लैब बनाई गई है। लैब में छात्र ऑनस्क्रीन डिसेक्शन करना सीखेंगे।

लैब में एलईडी स्क्रीनें लगवाई गई हैं। एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसमें अलग-अलग सात जानवरों के आभासी विच्छेदन करने की पूर्ण प्रक्रिया अपलोड की गई है। सॉफ्टवेयर के जरिए जूलॉजी के स्टूडेंट्स ऑनस्क्रीन प्रैक्टिकल कर सकेंगे। स्क्रीन पर जानवरों के हर छोटे से छोटे पार्ट की जानकारी दी जाएगी। लगातार स्क्रीन पर निर्देश फ्लैश होते रहेंगे, उसी के अनुसार स्टूडेंट्स जानवरों का आभासी विच्छेदन करेंगे।
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विच्छेदन की शुरूआत में छात्रों को जानवर के किन-किन अंगों पर पिन लगानी है, इसकी जानकारी दी जाएगी। फिर बताया जाएगा कि उसके विच्छेदन के दौरान कहां-कहां कैंची चलाएं। स्क्रीन पर फ्लैश होने वाले दिशा-निर्देशों से इतर छात्र यदि माउस चलाता है, तो सॉफ्टवेयर आभासी विच्छेदन नहीं करेगा।
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अभी सात जानवर हुए अपलोड
आभासी विच्छेदन के लिए तैयार हुए सॉफ्टवेयर के शुरूआती दौर में अभी सात जानवरों की डिटेल अपलोड की गई है। इसमें मेंढक के साथ-साथ स्टार फिश, गाय की आंख, फ्रूट फ्लाई, आउल पैलेट, स्क्वीड शामिल है। इसका एक प्रमुख फायदा ये है कि स्टूडेंट्स अब उन जानवरों का भी आभासी विच्छेदन कर सकते हैं, जिसे वह शायद यथार्थ में न कर पाते। आगे कोर्स के हिसाब से जानवरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।


यूजीसी ने लगा रखी है रोक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों में प्रयोगात्मक जानवरों की चीरफाड़ पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इसकी वजह रिसर्च के नाम पर जीव-जंतुओं के साथ क्रूरतम व्यवहार न हो पाए। इसके लिए लैब में विच्छेदन से जुड़े वीडियो या ई-लर्निंग मैटेरियल्स के उपयोग के निर्देश हैं। तर्क यह भी दिया गया है कि प्रतिबंध लगने से हर साल 19 मिलियन जीव-जंतुओं को देश की प्रयोगशालाओं में बचाया जा सकेगा।
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