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छह गांव के 25 किसान पैदा करेंगे स्ट्राबेरी
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झांसी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए छह गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के 25 किसान आधा-आधा एकड़ में खेती करेंगे। इसकी रोपाई नवंबर तक होगी। एक पौधे में नौ सौ ग्राम फल तैयार होता है।
किसानों की आय बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है स्ट्रॉबेरी की खेती करना। इसके लिए नाबार्ड और उद्यान विभाग के सहयोग से बबीना ब्लॉक के ग्राम बड़ौरा, नौहरा, महेशगढ़, घिसौली और मोंठ ब्लॉक के ग्राम साकिन और समथर में किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करेंगे। खास बात यह है कि ड्रिप सिंचाई से इसकी खेती होगी। ड्रिप सिंचाई पर बड़े किसानों को लागत का 80 प्रतिशत और छोटे किसानों को लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
फरवरी तक पककर तैयार होगी फसल
स्ट्रॉबेरी की रोपाइ के लिए सितंबर से पहले खेत की तीन बार जुताई, फिर गोबर की खाद अच्छे से बिखेर कर मिट्टी में मिलाई जाती है। पोटाश और फास्फोरस भी मिलाया जाता है। स्ट्रॉबेरी की विंटर डाउन, ओफ्रा, कमारोसा समेत विश्व भर में छह सौ किस्में हैं। फसल फरवरी तक पककर तैयार हो जाती है।
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एक एकड़ में तीन लाख लागत
स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर एक एकड़ में तीन लाख रुपये की लागत आती है। एक एकड़ में सौ क्विंटल पैदावार होती है और एक पौधे में 900 ग्राम फल प्राप्त होते हैं। खर्च निकालकर पांच लाख रुपये तक फायदा होता है। स्ट्रॉबेरी का उपयोग जैम, चॉकलेट आइसक्रीम, मिल्क शेक बनाने में किया जाता है।
स्ट्रॉबेरी के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। उद्यान विभाग नाबार्ड के सहयोग से किसानों के क्लस्टर बनाकर खेती करा रहा है। इसके अच्छे परिणाम आएंगे।
- विनय कुमार यादव, अधीक्षक राजकीय उद्यान
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किसानों की आय बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है स्ट्रॉबेरी की खेती करना। इसके लिए नाबार्ड और उद्यान विभाग के सहयोग से बबीना ब्लॉक के ग्राम बड़ौरा, नौहरा, महेशगढ़, घिसौली और मोंठ ब्लॉक के ग्राम साकिन और समथर में किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करेंगे। खास बात यह है कि ड्रिप सिंचाई से इसकी खेती होगी। ड्रिप सिंचाई पर बड़े किसानों को लागत का 80 प्रतिशत और छोटे किसानों को लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
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फरवरी तक पककर तैयार होगी फसल
स्ट्रॉबेरी की रोपाइ के लिए सितंबर से पहले खेत की तीन बार जुताई, फिर गोबर की खाद अच्छे से बिखेर कर मिट्टी में मिलाई जाती है। पोटाश और फास्फोरस भी मिलाया जाता है। स्ट्रॉबेरी की विंटर डाउन, ओफ्रा, कमारोसा समेत विश्व भर में छह सौ किस्में हैं। फसल फरवरी तक पककर तैयार हो जाती है।
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एक एकड़ में तीन लाख लागत
स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर एक एकड़ में तीन लाख रुपये की लागत आती है। एक एकड़ में सौ क्विंटल पैदावार होती है और एक पौधे में 900 ग्राम फल प्राप्त होते हैं। खर्च निकालकर पांच लाख रुपये तक फायदा होता है। स्ट्रॉबेरी का उपयोग जैम, चॉकलेट आइसक्रीम, मिल्क शेक बनाने में किया जाता है।
स्ट्रॉबेरी के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। उद्यान विभाग नाबार्ड के सहयोग से किसानों के क्लस्टर बनाकर खेती करा रहा है। इसके अच्छे परिणाम आएंगे।
- विनय कुमार यादव, अधीक्षक राजकीय उद्यान