फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Story of schools .. sold as many books as they decided, the price is also arbitrary

Jhansi News: स्कूलों की कहानी.. जितनी ठानी उतनी किताबें चला दीं, कीमत भी मनमानी

Fri, 07 Apr 2023 11:26 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2023 11:26 PM IST
विज्ञापन
Story of schools .. sold as many books as they decided, the price is also arbitrary
झांसी। नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और स्कूलों की मनमानी चरम पर है। हाल ये है कि कक्षा एक में ही कोई स्कूल नौ तो कोई 14 किताबें चल रहा है। एक पुस्तक के बढ़ते ही करीब ढाई सौ रुपये का इजाफा हो जाता है। ऐसे में किताबों का सेट खरीदने पर साढ़े बारह सौ रुपये तक का अंतर आ जाता है।
विज्ञापन

चाहें सीबीएसई बोर्ड हो या फिर आईसीएसई, इन प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ाई लगातार महंगी होती जा रही है। इसके पीछे स्कूलों द्वारा किताबों से लेकर ड्रेस तक में अपने नियम चलाना भी एक बड़ी वजह है। हर स्कूल में कितनी किताब चलेंगी, ये विद्यालय प्रबंधन की इच्छा पर निर्भर हो गया है। कब ड्रेस बदल दी जाए, ये भी स्कूल ही तय करते हैं। अभिभावकों ने बताया कि कक्षा एक में बच्चे को प्रवेश कराने पर ही पांच से छह हजार रुपये तक का खर्च आ जा रहा है। इसमें 50 फीसदी पैसा तो किताबें खरीदने में ही खर्च हो जाता है। इसके बाद स्कूलों की फीस, ड्रेस आदि पर भी पैसा खर्च होता है। अभिभावकों का कहना है कि वह अपने खर्चों में कटौती करके बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाई कराने के लिए भेजते हैं। मगर दिनों दिन महंगी होती पढ़ाई ने उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कई अभिभावकों ने बताया कि जितना पैसा वो महीने में कमा नहीं पाते हैं, उतना तो बच्चों को प्रवेश दिलाने में खर्च हो गया। अब बची पूंजी से गृहस्थी चलानी पड़ रही है।
विज्ञापन


किताब के सेट की कीमतों में ये है अंतर
आईसीएसई बोर्ड सीबीएसई बोर्ड
क्लास एक स्कूल दूसरा स्कूल एक स्कूल दूसरा स्कूल
1- 2614 3753 2520 3630
2- 2707 3967 2635 4034
3- 3251 4460 2715 4183
4- 3637 4355 2812 4311
5. 4244 5280 2937 4200
6. 4694 5746 3923 4945
7. 4909 5922 3825 4705
8. 5112 6070 3920 4805


सीधे आकर शिकायत करें अभिभावक, करेंगे कार्रवाई: डीआईओएस डीआईओएस ओपी सिंह का कहना है कि अगर अभिभावकों को लगता है कोई स्कूल मनमानी कर रहा है तो इसकी शिकायत दर्ज कराएं। अगर किसी स्कूल में नौ और किसी में 15 किताबें चल रही हैं तो परिजनों की शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अगर कोई स्कूल छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे और यूनिफॉर्म आदि किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करता है या फिर पांच साल से पहले ड्रेस बदल दी है तो भी विभाग आकर मुझे लिखित में शिकायत दें। ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये बोले अभिभावक

.......................

स्कूल लगातार किताबें बढ़ाते जा रहे हैं। इससे पढ़ाई भी महंगी होती जा रही है। स्कूलों की इस मनमानी पर रोक लगनी चाहिए। - रीना अरोरा, गोविंद चौराहा।



किताब, बैग, ड्रेस सब महंगे हो चुके हैं। खुद के खर्च में कटौती करके परिजन स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। पढ़ाई इतनी महंगी नहीं होनी चाहिए। - संगीता शर्मा, नर्सिंग राव टौरिया।



प्राइवेट शिक्षक हूं। हर महीने 10-12 हजार रुपये कमा पता हूं। बच्चे को प्रवेश दिलाने में आठ हजार खर्च हो गए। अब जमा पूंजी से घर का खर्च चला रहा हूं। - सुशील, खातीबाबा।




मेरा बेटे ने कक्षा एक तो बेटी ने कक्षा सात में प्रवेश लिया है। दोनों बच्चों के एडमिशन में 11 हजार रुपये खर्च हो गए। दिनों दिन पढ़ना मुश्किल हो रहा है। - निहाल यादव, बाहर दतिया गेट।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed