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झांसी में बनेगी आधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
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soil test lab
झांसी। मिट्टी की उर्वकता जांचने के लिए झांसी में अत्याधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला (स्वाइल टेस्टिंग लैब) बनेगी। सवा करोड़ की लागत से बनने वाली बुंदेलखंड की यह पहली आधुनिक लैब होगी। इसके जरिए मिट्टी के रोजाना एक हजार से अधिक नमूनों का सटीक परीक्षण किया जा सकेगा। कृषि विभाग द्वारा इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। जल्द बजट जारी होने की संभावना जताई जा रही है। आधुनिक दौर में कृषि के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। फसल रोपाई से पहले मिट्टी की पहचान करना जरूरी होता जा रहा है। आने वाले समय में खाद एवं बीज को खेतों की मिट्टी के प्रकृति के मुताबिक इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। इसको देखते हुए सरकार स्वाइल टेस्टिंग को बढ़ावा दे रही है। मृदा संरक्षण अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि नए टेस्टिंग लैब में अत्याधुनिक आईसीपी-ओईएस मशीन स्थापित होगी। स्वाइल टेस्टिंग की सबसे आधुनिक मशीनों में इसे शुमार किया जाता है। बुंदेलखंड के जिले के लिए यह पहली अत्याधुनिक मशीन होगी। इससे रोजाना एक हजार से अधिक सैंपल टेस्ट किए जा सकेंगे जबकि अभी बमुश्किल 80-100 सैंपल का ही परीक्षण हो पाता है। अभी मौजूदा सेटअप में नमूना परीक्षण के लिए मैनुअल काम करना पड़ता है। इस वजह से टेस्टिंग रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता है। मैनुअल काम होने की वजह से परिणाम में त्रुटियों की संभावना रहती है जबकि आईसीपी मशीन के जरिए आटोमैटिक तकनीक के माध्यम से नमूनों का परीक्षण होगा। बेहद कम समय में ही यह मिट्टी के भीतर छिपे कार्बन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक, मैगनीज, सल्फर, मैग्नीशियम, बोरान जैसे तमाम तत्वों का आसानी से पता लगा सकेगी। इस मशीन के जरिए परीक्षण में न सिर्फ लगने वाला समय कम हो जाएगा बल्कि परिणाम में त्रुटि की गुंजाइश भी करीब खत्म हो जाएगी।
अधिकारियों का कहना है इसके जरिए परीक्षण में आने वाली लागत भी घट जाएगी। अभी एक टेस्ट करने में करीब 150 रुपये की लागत आती है लेकिन, इसके जरिए यह लागत घटकर करीब 35 रुपये तक हो जाएगी। उनका कहना है पूरे प्रोजेक्ट पर करीब सवा करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान किया गया है। बताया कि लैब के लिए पिछले माह केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया था। मृदा संरक्षण विभाग ने प्रस्ताव तैयार करके इसे केंद्र सरकार को भेज दिया। बजट स्वीकृत होने के साथ ही इस दिशा में काम आगे शुरू किया जाएगा।
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अधिकारियों का कहना है इसके जरिए परीक्षण में आने वाली लागत भी घट जाएगी। अभी एक टेस्ट करने में करीब 150 रुपये की लागत आती है लेकिन, इसके जरिए यह लागत घटकर करीब 35 रुपये तक हो जाएगी। उनका कहना है पूरे प्रोजेक्ट पर करीब सवा करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान किया गया है। बताया कि लैब के लिए पिछले माह केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया था। मृदा संरक्षण विभाग ने प्रस्ताव तैयार करके इसे केंद्र सरकार को भेज दिया। बजट स्वीकृत होने के साथ ही इस दिशा में काम आगे शुरू किया जाएगा।
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